बेगूसराय में प्रखंड प्रमुख का चुनाव रद, स्टेपलर से पिन किए गए थे मतपत्रों के बंडल; 2 अफसरों से जवाब-तलब

बेगूसराय के छौड़ाही में मनोज यादव का प्रमुख चुनाव रद्द कर पद रिक्त घोषित किया गया। मतपत्रों की सीलिंग और गिनती में गड़बड़ी पर दो अफसरों से जवाब मांगा।
बेगूसराय में प्रखंड प्रमुख का चुनाव रद, स्टेपलर से पिन किए गए थे मतपत्रों के बंडल; 2 अफसरों से जवाब-तलब
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छौड़ाही प्रखंड प्रमुख के निर्वाचन को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग का यह आदेश चार नवंबर 2026 को जारी किया गया। आयोग ने निर्वाचन से संबंधित अभिलेखों और वीडियोग्राफी की जांच करने के साथ दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह कार्रवाई की है। जांच में पाया गया कि मतपत्रों को निर्धारित तरीके से सीलबंद करने के बजाय स्टेपलर से पिन किया गया था। इसके अलावा मतगणना के दौरान भी तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आयोग ने इन गड़बड़ियों को चुनावी नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है।

यह मामला 27 अगस्त 2024 को छौड़ाही प्रखंड प्रमुख पद के लिए हुए चुनाव से जुड़ा है। उस समय प्रमुख पद के लिए मनोज कुमार यादव और दिनेश पासवान मैदान में थे। दोनों प्रत्याशियों को बराबर मत मिलने के बाद लॉटरी के माध्यम से परिणाम तय किया गया था, जिसमें मनोज यादव को विजेता घोषित किया गया था। इसके बाद दिनेश पासवान ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग में याचिका दायर की थी। उन्होंने निर्वाचन में अनियमितता, मतपत्रों की गोपनीयता भंग होने और मतगणना के नियमों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया था।

दिनेश पासवान की ओर से दायर वाद संख्या 48/2024 में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और नियमों के पालन को चुनौती दी गई थी। आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान निर्वाचन से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध वीडियोग्राफी का अवलोकन किया। जांच में सामने आया कि मतगणना के समय सभी पंचायत समिति सदस्यों को एक-एक करके मतपत्र दिखाने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी। नियमानुसार मतपत्रों की जांच और गिनती में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी मानी जाती है।

जांच में यह भी पाया गया कि वैध और अवैध मतपत्रों को अलग-अलग पैकेट में रखने और उन्हें नियमानुसार सील करने में लापरवाही बरती गई। मतपत्रों के बंडल को स्टेपलर से पिन किया गया था, जबकि चुनावी प्रक्रिया में निर्धारित तरीके से उन्हें सुरक्षित और सीलबंद रखना जरूरी था। इसके साथ ही लॉटरी से संबंधित अभिलेखों को भी नियमानुसार सीलबंद नहीं किया गया था। आयोग ने माना कि इन प्रक्रियागत कमियों से निर्वाचन की पारदर्शिता और मतपत्रों की सुरक्षा प्रभावित हुई।

राज्य निर्वाचन आयोग ने बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली 2006 के नियम 102 और तीन जून 2009 को जारी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया। इसके आधार पर आयोग ने मनोज कुमार यादव के निर्वाचन को निरस्त करते हुए छौड़ाही प्रखंड प्रमुख का पद रिक्त घोषित कर दिया। अब इस पद पर नए सिरे से चुनाव कराया जाएगा। आयोग के फैसले के बाद छौड़ाही प्रखंड में प्रमुख पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां फिर तेज होने की संभावना है।

इस मामले में आयोग ने तत्कालीन निर्वाची पदाधिकारी सह मंझौल के तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी प्रमोद कुमार और तत्कालीन प्रेक्षक सह बेगूसराय के जिला आपूर्ति पदाधिकारी सोमनाथ सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। दोनों अधिकारियों से पूछा गया है कि निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान सामने आई अनियमितताओं के लिए उनकी ओर से क्या कदम उठाए गए थे और नियमों का पालन क्यों नहीं कराया गया। जिला प्रशासन को दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेकर अपनी टिप्पणी के साथ दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भेजने का निर्देश दिया गया है।

आयोग ने केवल चुनाव रद्द करने का आदेश जारी नहीं किया है, बल्कि संबंधित पक्षों तक इसकी सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया भी शुरू कराई है। जिला पंचायती राज पदाधिकारी ने पांच नवंबर को छौड़ाही के प्रखंड विकास पदाधिकारी को पत्र भेजकर संबंधित लोगों को 24 घंटे के भीतर नोटिस तामील कराने का निर्देश दिया। इसमें याचिकाकर्ता दिनेश पासवान के साथ मनोज यादव, सौरभ कुमार वर्मा और सनोज कुमार शर्मा को भी आदेश की जानकारी देने की बात कही गई है। जिला स्तर से आदेश मिलने के बाद संबंधित पक्षों को नोटिस पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक सूची के अनुसार छौड़ाही प्रखंड प्रमुख के रिक्त पद पर नए निर्वाचन के लिए 19 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है। आयोग के पांच नवंबर के पत्रांक 4330 में इस चुनाव का उल्लेख किया गया है। इस तरह अब छौड़ाही में प्रमुख पद के लिए दोबारा निर्वाचन कराया जाएगा। नए चुनाव में पंचायत समिति सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी और सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि इस बार निर्वाचन प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों के अनुसार संपन्न हो।

इस फैसले से छौड़ाही प्रखंड की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। करीब दो साल पहले हुए निर्वाचन को रद्द किए जाने के बाद अब प्रमुख पद पर नए सिरे से चुनाव की तैयारी होगी। वहीं तत्कालीन निर्वाची पदाधिकारी और प्रेक्षक से मांगे गए जवाब के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल आयोग का आदेश लागू होने के साथ मनोज कुमार यादव का निर्वाचन निरस्त हो चुका है और प्रमुख का पद रिक्त माना जाएगा।

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