भागलपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर से विकास कार्य प्रभावित, खतरे के निशान से 47 सेंटीमीटर ऊपर पानी

भागलपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 47 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। कहलगांव और सुल्तानगंज में स्थिति गंभीर होने से विकास कार्य प्रभावित हैं।
भागलपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर से विकास कार्य प्रभावित, खतरे के निशान से 47 सेंटीमीटर ऊपर पानी
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भागलपुर जिले में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की चिंता को और गहरा कर दिया है। नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और इसका सीधा असर जिले के कई इलाकों में चल रहे विकास कार्यों पर पड़ रहा है। भागलपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 47 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने की स्थिति में बताया जा रहा है। वहीं कहलगांव और सुल्तानगंज में भी नदी का बढ़ता पानी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है।

3 सितंबर को जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार भागलपुर में गंगा का जलस्तर 33.50 मीटर, कहलगांव में 31.87 मीटर और सुल्तानगंज में 35.92 मीटर दर्ज किया गया था। इसके अलावा इस्माईलपुर-बिंदटोली में 32.18 मीटर और राघोपुर में 33.15 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया। इन सभी स्थानों पर जलस्तर में बढ़ने की प्रवृत्ति दर्ज की गई थी।

गंगा के बढ़ते पानी का असर खास तौर पर निचले इलाकों और नदी किनारे बसे गांवों पर दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर पानी के फैलाव के कारण आवागमन और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। खेतों और ग्रामीण रास्तों के बाद अब बाढ़ के पानी की वजह से उन इलाकों में चल रहे निर्माण और विकास कार्यों को भी रोकना या धीमा करना पड़ रहा है, जहां मशीनों और मजदूरों के लिए पहुंचना मुश्किल हो गया है।

जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों के लिए संसाधनों को सक्रिय रखा है। प्रभावित इलाकों में नाव, मानवबल और जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। SDRF और NDRF की टीमों की भी तैनाती की गई है। प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य तेज किए जाएंगे।

गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे गंभीर असर कहलगांव और सुल्तानगंज क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। दोनों ही इलाके गंगा के किनारे बसे हैं और जलस्तर बढ़ने के साथ यहां निचले हिस्सों में पानी पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। सुल्तानगंज में गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर पहले भी प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता सामने आती रही है। हालिया रिपोर्टों में भागलपुर, सुल्तानगंज और कहलगांव में गंगा के चेतावनी स्तर से ऊपर जाने की जानकारी भी सामने आई है।

भागलपुर के खरीक अंचल में बाढ़ का प्रभाव पहले ही दिखाई दे चुका है। जिला प्रशासन के मुताबिक राघोपुर-काजीकोरैया बांध को नुकसान पहुंचने के बाद राघोपुर पंचायत प्रभावित हुई थी। 1 सितंबर को क्षतिग्रस्त हिस्से में दोबारा नुकसान होने के बाद अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम कटाव बढ़ गया और ब्रीच करीब 400 मीटर तक पहुंच गया। बांध की सुरक्षा के लिए जियो बैग और बालू भरे बोरों के साथ बड़ी संख्या में मशीनों और मजदूरों को लगाया गया है।

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार राघोपुर पंचायत में पांच राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। यहां पेयजल, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम किया गया है। 28 चापाकलों को चालू या दुरुस्त किया गया, पांच नए चापाकल लगाए गए और प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की जांच भी कराई गई है।

बाढ़ की स्थिति का असर सिर्फ लोगों के घर और खेतों तक सीमित नहीं है। सड़क, बांध, पुल-पुलिया और अन्य आधारभूत संरचनाओं से जुड़े कार्यों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। जिन क्षेत्रों में पानी लगातार बढ़ रहा है, वहां निर्माण सामग्री पहुंचाना, मशीनों को ले जाना और मजदूरों से काम कराना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में कई विकास योजनाओं की गति प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों की सुरक्षा और बाढ़ से बचाव पर है।

नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण ग्रामीण इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से अनावश्यक रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय अधिकारियों को सूचना देने और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने को कहा है।

गंगा के साथ-साथ कोसी नदी के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई है। प्रशासन के मुताबिक कुरसेला, मदरौनी और चोरहर में कोसी का जलस्तर बढ़ा है। इससे जिले के उन इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है, जहां दोनों नदियों के बढ़ते पानी का असर पड़ सकता है।

फिलहाल भागलपुर में प्रशासन की चुनौती दोहरी है। एक तरफ बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखना और राहत-बचाव व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ बाढ़ का पानी कम होने के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों, बांधों और दूसरी आधारभूत संरचनाओं की मरम्मत तथा रुके हुए विकास कार्यों को दोबारा गति देनी होगी। लगातार बढ़ता जलस्तर इस काम को फिलहाल मुश्किल बना रहा है।

जिला प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ जरूरी आधारभूत सुविधाओं को बहाल करने की तैयारी भी जारी है। हालांकि स्थायी रूप से विकास कार्यों को पूरी गति तभी मिल पाएगी, जब गंगा का जलस्तर नीचे आएगा और प्रभावित इलाकों में पानी का दबाव कम होगा। फिलहाल कहलगांव, सुल्तानगंज और भागलपुर के नदी किनारे के इलाकों में लोगों के साथ-साथ प्रशासन की नजर भी गंगा के जलस्तर पर टिकी हुई है।

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