Russia Oil Sanctions: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ का खतरा, क्या भारत को मिल सकती है राहत?

Russia Oil Sanctions: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव अमेरिकी संसद में अटक गया है। जानें क्या भारत को फिलहाल राहत मिली है और आगे क्या हो

अमेरिकी सीनेट में पिछले महीने भारी बहुमत से पारित रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में विरोध का सामना कर रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले इस बिल के आगे बढ़ने की संभावना कम नजर आ रही है।

Russia Oil Sanctions Bill: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव अमेरिकी राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है। अमेरिकी सीनेट से भारी बहुमत के साथ पारित रूस प्रतिबंध विधेयक अब प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अटकता नजर आ रहा है। ऐसे में भारत समेत रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए फिलहाल राहत की संभावना बन सकती है।

रूस से तेल खरीदने वालों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव

अमेरिकी सीनेट में पारित इस विधेयक के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा रूस पर लगाए गए ऊर्जा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले प्रमुख देशों पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।

रूस के प्रमुख तेल खरीदारों में चीन, भारत और तुर्किये जैसे देश शामिल हैं। ऐसे में कानून लागू होने की स्थिति में इसका असर केवल अमेरिका-रूस संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी सांसदों के एक वर्ग को आशंका है कि प्रस्तावित कानून राष्ट्रपति को व्यापक स्तर पर टैरिफ लगाने के लिए अतिरिक्त कानूनी अधिकार दे सकता है। अमेरिकी खुदरा क्षेत्र और यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स जैसे कारोबारी संगठनों ने भी संभावित आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंता जताई है।

भारत ने क्या कहा?

रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संकेत दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान को तेल खरीद से जोड़ने पर सवाल उठाते हुए कहा कि युद्ध का अंत बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि भारत जैसे करीब 1.4 अरब आबादी वाले देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चुनौती है। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन के अपने विचार हैं और भारत उनका सम्मान करता है, लेकिन दूसरे देशों को भारत के दृष्टिकोण का भी सम्मान करना चाहिए।

जयशंकर के अनुसार, संघर्ष का समाधान इस बात से तय नहीं होना चाहिए कि कौन-सा देश तेल, खनिज, धातु, उर्वरक या अन्य वस्तुएं खरीद रहा है। भारत बातचीत, संवाद और कूटनीति को ही समाधान का रास्ता मानता है।

Russia Oil Sanctions: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ का खतरा, क्या भारत को मिल सकती है राहत?

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है रूसी तेल?

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 30.3 प्रतिशत रही। इस अवधि में भारत ने लगभग 134.7 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया, जिसमें करीब 40.8 अरब डॉलर का तेल रूस से आया। रियायती कीमतों पर रूसी कच्चा तेल मिलने से भारत को आयात लागत नियंत्रित रखने में मदद मिली है। इसके अलावा इससे ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने और घरेलू महंगाई पर दबाव कम करने में भी सहायता मिली।

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि भारत को केवल टैरिफ की धमकियों के आधार पर अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक यदि रूसी तेल आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी बना रहता है, तो भारत को अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।

क्या मिडटर्म इलेक्शन से पहले अटक सकता है बिल?

सीनेट में विधेयक को 86-11 के बड़े बहुमत से समर्थन मिला था। हालांकि प्रतिनिधि सभा में इसके पारित होने की राह आसान नहीं दिख रही है। अमेरिकी सांसदों के बीच इस बात को लेकर मतभेद हैं कि कानून से राष्ट्रपति को मिलने वाली टैरिफ शक्तियां कितनी व्यापक होंगी और इसका अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।

रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने संकेत दिया है कि 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म इलेक्शन से पहले इस विधेयक पर वोटिंग मुश्किल हो सकती है। अगले कुछ हफ्तों में सांसदों के वॉशिंगटन में सीमित समय रहने की वजह से भी विधायी प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना है।

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