भिवाड़ी की बिल्लू लेबर कॉलोनी में गैस सिलेंडर बदलते समय लीकेज से भीषण आग लग गई। हादसे में एक ही परिवार के सात लोग झुलस गए। पड़ोसियों की मदद से बड़ा हादसा टला। सभी घायलों को प्राथमिक इलाज के बाद अलवर रेफर किया गया।
भिवाड़ी; राजस्थान के भिवाड़ी के साथलका गांव स्थित बिल्लू लेबर कॉलोनी में गुरुवार सुबह गैस सिलेंडर लीकेज के कारण बड़ा हादसा हो गया। खाना बनाते समय सिलेंडर बदलने के दौरान अचानक गैस रिसाव शुरू हो गया, जिसके बाद कमरे में भीषण आग लग गई। हादसे में एक ही परिवार के सात लोग झुलस गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
घटना सुबह करीब 7:30 बजे हुई। स्थानीय लोगों की तत्परता और पड़ोसियों की मदद से बड़ा हादसा टल गया, हालांकि परिवार के सभी सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए अलवर रेफर किया गया है।
कैसे हुआ हादसा?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश निवासी नेम सिंह अपने परिवार के साथ बिल्लू कॉलोनी में किराए के कमरे में रहते हैं। गुरुवार सुबह परिवार के लिए खाना बनाया जा रहा था। इसी दौरान नेम सिंह घरेलू गैस सिलेंडर बदल रहे थे।
बताया जा रहा है कि सिलेंडर लगाते समय अचानक गैस लीकेज शुरू हो गया। कुछ ही सेकंड में कमरे में एलपीजी गैस फैल गई और आग भड़क उठी। आग इतनी तेजी से फैली कि कमरे में मौजूद परिवार के सभी सदस्य उसकी चपेट में आ गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगते ही कमरे में अफरा-तफरी मच गई और परिवार के सदस्य जान बचाने के लिए बाहर भागे।
सीसीटीवी में कैद हुई पूरी घटना
घटना के दौरान पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरा हादसा रिकॉर्ड हो गया। फुटेज में देखा जा सकता है कि सिलेंडर में आग लगने के बाद लोग घबराहट में बाहर निकलते हैं और आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ पड़ते हैं।
वीडियो में कुछ स्थानीय लोग जलते हुए सिलेंडर को कमरे से बाहर खींचने की कोशिश करते दिखाई देते हैं, ताकि आग आसपास के घरों तक न फैले।
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स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो पूरी कॉलोनी इसकी चपेट में आ सकती थी।
हादसे में घायल हुए परिवार के सात सदस्य
इस दर्दनाक हादसे में परिवार के सात सदस्य झुलस गए। घायलों में—
- नेम सिंह (35)
- उनकी पत्नी ममता (30)
- रिश्तेदार बृजेश (32)
- पुत्र पंकज (8)
- पुत्र छगन (6)
- पुत्री काजल (15)
- पुत्री किशनबती (12)
शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि परिवार के मुखिया नेम सिंह की हालत सबसे ज्यादा गंभीर है।
पड़ोसियों ने दिखाई बहादुरी
हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया।
स्थानीय निवासियों ने साहस दिखाते हुए
- घायलों को कमरे से बाहर निकाला
- आग पर काबू पाने की कोशिश की
- एंबुलेंस और पुलिस को सूचना दी
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि पड़ोसी समय पर मदद नहीं करते, तो जान-माल का नुकसान और ज्यादा हो सकता था।
अस्पताल में भर्ती, अलवर रेफर किए गए घायल
घायलों को पहले भिवाड़ी जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे, इसलिए उन्हें बेहतर इलाज के लिए अलवर रेफर कर दिया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, कुछ मरीजों को शरीर पर गहरे जलने के घाव आए हैं, लेकिन फिलहाल सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है।
पुलिस और प्रशासन ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही भिवाड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
डीएसपी कैलाश चौधरी ने बताया कि शुरुआती जांच में गैस सिलेंडर लीकेज हादसे की मुख्य वजह लग रही है। हालांकि तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जांच की जा रही है।
पुलिस सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों के बयान भी जुटा रही है।
गर्मियों में बढ़ जाते हैं गैस हादसे
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में एलपीजी सिलेंडर से जुड़े हादसों का खतरा बढ़ जाता है। अत्यधिक तापमान, खराब रेगुलेटर, पुरानी पाइप और गलत तरीके से सिलेंडर बदलना दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
एलपीजी गैस बेहद ज्वलनशील होती है और थोड़ी सी चिंगारी भी बड़े विस्फोट या आग का कारण बन सकती है।
गैस सिलेंडर इस्तेमाल करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
विशेषज्ञ घरेलू गैस सिलेंडर इस्तेमाल करते समय कई सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं।
सिलेंडर बदलते समय सावधानी जरूरी
सिलेंडर बदलते समय गैस रेगुलेटर सही तरीके से लगाना बेहद जरूरी होता है। यदि गैस की गंध आए तो तुरंत रेगुलेटर बंद करना चाहिए।
बिजली के स्विच का इस्तेमाल न करें
गैस लीकेज की स्थिति में पंखा, लाइट या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक स्विच ऑन या ऑफ नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे चिंगारी पैदा हो सकती है।
पाइप और रेगुलेटर की जांच करें
पुरानी या खराब गैस पाइप और रेगुलेटर समय-समय पर बदलना जरूरी है।
रसोई में वेंटिलेशन रखें
रसोई में हवा के आने-जाने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए ताकि गैस जमा न हो सके।
श्रमिक कॉलोनियों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस हादसे के बाद श्रमिक और किराएदार कॉलोनियों में सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कई लेबर कॉलोनियों में छोटे कमरों में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं और सुरक्षा उपकरणों की कमी रहती है।









