Pawan Khera Arrest Case: सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, गिरफ्तारी के लिए 60 पुलिसकर्मी पहुंचे घर

Pawan Khera गिरफ्तारी मामले ने राजनीतिक और कानूनी बहस को तेज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई, जबकि गिरफ्तारी के लिए 60 पुलिसकर्मी उनके

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में गुरुवार को जोरदार बहस देखने को मिली। अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। 

नई दिल्ली: Pawan Khera की याचिका पर Supreme Court of India ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका असम पुलिस द्वारा दर्ज FIR के संबंध में अग्रिम जमानत (anticipatory bail) की मांग को लेकर दायर की गई थी। यह FIR Himanta Biswa Sarma की पत्नी Riniki Bhuyan Sarma की शिकायत पर दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पवन खेड़ा ने यह दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं।

अब इस मामले में अगली सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर अहम प्रभाव पड़ सकता है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि खेड़ा ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं। इसके बाद असम पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू की, जिसमें मानहानि और कथित फर्जी दस्तावेजों से जुड़े आरोप शामिल हैं।

मामले की सुनवाई जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदुरकर की पीठ ने की। पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह मामला असाधारण है क्योंकि इसमें राजनीतिक बयानबाजी और कथित आपराधिक कार्रवाई का मिश्रण है। सिंघवी ने अदालत में यह भी कहा कि गिरफ्तारी की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आरोपी जांच में सहयोग कर रहे हैं और वे फरार नहीं हैं।

Pawan Khera Arrest Case: सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, गिरफ्तारी के लिए 60 पुलिसकर्मी पहुंचे घर

“60 पुलिसकर्मी घर पहुंचे” – गंभीर आरोप

सुनवाई के दौरान सिंघवी ने दावा किया कि गिरफ्तारी के लिए लगभग 50 से 60 पुलिसकर्मी दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित पवन खेड़ा के आवास पर पहुंचे थे।उन्होंने इस कार्रवाई को अत्यधिक बताते हुए कहा कि यह किसी “आतंकवादी” की तरह व्यवहार करने जैसा था, जबकि मामला मुख्य रूप से मानहानि और दस्तावेजों के आरोपों से जुड़ा है।

सिंघवी ने अदालत में सवाल उठाया कि जब अधिकतर आरोप जमानती प्रकृति के हैं, तो गिरफ्तारी की आवश्यकता क्यों है। उन्होंने कहा कि जांच के लिए अन्य विकल्प मौजूद हैं और हिरासत में पूछताछ आवश्यक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दोषी भी माना जाए, तब भी उसे गिरफ्तार करना जरूरी नहीं होता जब तक कि वह जांच में बाधा न डाल रहा हो।

सरकार का पक्ष: गंभीर आरोप और विदेशी कनेक्शन की जांच

असम राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि यह मामला केवल मानहानि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें फर्जी दस्तावेजों और संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच शामिल है। सरकारी पक्ष ने दावा किया कि पवन खेड़ा ने जिन दस्तावेजों का उल्लेख किया था, वे जांच में नकली पाए गए हैं।

इसके अलावा, कुछ दस्तावेज विदेशी कंपनियों से जुड़े होने का दावा भी किया गया, जिससे मामले की गंभीरता बढ़ जाती है। सरकारी वकील ने यह भी कहा कि यह जांच जरूरी है कि क्या किसी विदेशी ताकत की भूमिका इस पूरे प्रकरण में शामिल हो सकती है।

Leave a comment