Bihar Legislative Council: रामबचन राय बने कार्यकारी सभापति, जानें उनका राजनीतिक और अकादमिक सफर

Bihar Legislative Council के नए सभापति रामबचन राय का राजनीतिक और अकादमिक सफर चर्चा में है। पटना विश्वविद्यालय से जुड़े रहे रामबचन राय की पूरी प्रोफाइल और

जेडीयू नेता रामबचन राय को बिहार विधान परिषद का कार्यकारी सभापति बनाया गया है। इससे पहले सोमवार को अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद रामबचन राय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।

Bihar: जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और शिक्षाविद् रामबचन राय को बिहार विधान परिषद का नया सभापति बनाया गया है। यह बदलाव तत्कालीन सभापति अवधेश नारायण सिंह के पद से इस्तीफा देने के बाद हुआ है। सिंह ने 28 सितंबर 2026 को सभापति पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद विधान परिषद के शीर्ष पद की जिम्मेदारी जेडीयू के रामबचन राय को मिली।

रामबचन राय के नए दायित्व संभालने के बाद जेडीयू नेताओं ने उनसे मुलाकात कर शुभकामनाएं दीं। बिहार सरकार में मंत्री और जेडीयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार ने सभापति के कार्यालय में पहुंचकर उन्हें बधाई दी। इस नियुक्ति को बिहार की संसदीय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

लंबे विधायी अनुभव वाले नेता हैं रामबचन राय

रामबचन राय बिहार विधान परिषद के कामकाज और संसदीय प्रक्रियाओं से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। वह जुलाई 2024 से विधान परिषद के उपसभापति के पद पर कार्यरत थे। इससे पहले भी उन्होंने सदन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाली हैं। रामबचन राय को साल 2021 में राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद का सदस्य नामित किया गया था। इससे पहले 2015 में उन्हें विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल का उपनेता बनाया गया था।

इस लंबे अनुभव के कारण उन्हें सदन की कार्यवाही, नियमों और संसदीय परंपराओं की अच्छी समझ रखने वाले नेताओं में गिना जाता है। अब सभापति के रूप में उनकी जिम्मेदारी सदन की कार्यवाही को नियमों और निर्धारित संसदीय प्रक्रियाओं के अनुसार संचालित करने की होगी।

अति पिछड़ा समाज से आते हैं रामबचन राय

जेडीयू नेता श्रवण कुमार ने रामबचन राय की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि वह अति पिछड़ा समाज से आते हैं। उनके अनुसार, इस समुदाय से बिहार विधान परिषद के सभापति पद तक पहुंचने वाले वह दूसरे व्यक्ति हैं। जेडीयू की ओर से उनकी नियुक्ति पर खुशी जाहिर की गई है। पार्टी नेताओं ने इसे उनके लंबे राजनीतिक, सामाजिक और विधायी अनुभव से जोड़कर देखा है।

हालांकि, इस नियुक्ति का महत्व केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है। रामबचन राय का शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भी लंबा अनुभव रहा है, जो उनके सार्वजनिक जीवन की एक अलग पहचान बनाता है।

पटना यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे

राजनीति में सक्रिय होने से पहले रामबचन राय का अकादमिक क्षेत्र से भी गहरा जुड़ाव रहा है। वह पटना विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। हिंदी साहित्य और सामाजिक विषयों पर उनकी रुचि के कारण उन्हें एक शिक्षाविद् और साहित्य अध्येता के रूप में भी पहचान मिली। उनके समर्थकों का कहना है कि शिक्षा, साहित्य और विधायी कामकाज के अनुभव का संयोजन उन्हें संसदीय जिम्मेदारियों को समझने में मदद करता है।

बिहार विधान परिषद में बदलाव का संदर्भ

रामबचन राय की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब बिहार विधान परिषद की राजनीति भी सक्रिय है। राज्य में परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित हो चुका है। निर्वाचन आयोग के अनुसार इन सीटों पर मतदान 23 अक्टूबर 2026 को और मतगणना 27 अक्टूबर 2026 को होगी। इन आठ सीटों में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

जेडीयू ने इन चुनावों के लिए चार उम्मीदवारों के नाम भी घोषित किए हैं, जिनमें पटना स्नातक क्षेत्र से नीरज कुमार, तिरहुत स्नातक से अभिषेक झा, सारण शिक्षक से आनंद पुष्कर और दरभंगा शिक्षक से घनश्याम राय शामिल हैं।

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