बिहार की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। राज्य सरकार द्वारा पंचायत स्तर पर “सहयोग शिविर” आयोजित करने की नई पहल के बीच कांग्रेस ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर विवादित टिप्पणी करते हुए उन्हें निशाने पर लिया है।
पटना: बिहार सरकार ने आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पंचायत स्तर पर ‘सहयोग शिविर’ आयोजित करने का फैसला किया है। यह पहल Samrat Choudhary के नेतृत्व में शुरू की जा रही है और इसके लिए 30 अप्रैल 2026 को दिशा-निर्देश जारी किए गए। राज्यभर में यह अभियान 19 मई 2026 से एक साथ शुरू होगा, जिसका उद्देश्य लोगों की शिकायतों का मौके पर ही निपटारा करना और सरकारी सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है।
हालांकि, इस कदम को लेकर विपक्ष ने भी प्रतिक्रिया दी है। बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता Asit Nath Tiwari ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नई जिम्मेदारी संभालने के बाद ज्यादा सक्रियता दिखा रहे हैं, जिसे उन्होंने एक कहावत के जरिए व्यक्त किया।
क्या है “सहयोग शिविर” योजना?
बिहार सरकार ने आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए पंचायत स्तर पर “सहयोग शिविर” आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह अभियान 19 मई 2026 से पूरे राज्य में शुरू किया जाएगा। सरकार के मुताबिक इस पहल का उद्देश्य है:
- सरकारी सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना
- प्रशासन और जनता के बीच दूरी कम करना
- शिकायतों का मौके पर निपटारा करना
यह पहल ग्रामीण प्रशासन को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।
कांग्रेस का हमला: “दिखावा और राजनीतिक स्टंट”
इस योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता Asit Nath Tiwari ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एक विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि नए नेतृत्व द्वारा ऐसी घोषणाएं केवल दिखावा हैं और जमीनी स्तर पर इनका असर सीमित रहेगा। तिवारी ने आरोप लगाया कि:
- पहले भी ऐसी योजनाएं लागू की गई थीं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले
- ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकारी आसानी से उपलब्ध नहीं होते
- प्रशासनिक व्यवस्था आम लोगों की समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है
“नीतीश मॉडल” पर भी उठाए सवाल
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कांग्रेस प्रवक्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी “गांव-गांव प्रशासन” जैसी पहल की गई थी, लेकिन यह जमीनी स्तर पर सफल नहीं हो पाई। उनका दावा है कि:
- योजनाओं की घोषणा तो होती है, लेकिन क्रियान्वयन कमजोर रहता है
- आम लोगों को अधिकारियों तक पहुंचने में दिक्कत होती है
- प्रशासनिक जवाबदेही की कमी बनी रहती है
कांग्रेस ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी निशाना साधते हुए कहा कि:
- निर्णय लेने में नौकरशाही का वर्चस्व है
- निर्वाचित नेतृत्व की भूमिका सीमित हो जाती है
- आम जनता की समस्याएं प्राथमिकता नहीं बन पातीं
यह आरोप राज्य में शासन प्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस को जन्म देता है। इस राजनीतिक बयानबाजी के दौरान कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। प्रधानमंत्री Narendra Modi की नीतियों पर सवाल उठाते हुए गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को मुद्दा बनाया गया।









