भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन इसी बीच सरकारी नीतियों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। Ather Energy के सह-संस्थापक और सीईओ तरुण मेहता ने ऑटो सेक्टर के लिए लागू प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बिजनेस न्यूज़: भारत सरकार की ऑटो सेक्टर के लिए बनाई गई PLI (Production Linked Incentive) नीति को लेकर अब बहस तेज हो गई है। Ather Energy के सह-संस्थापक और CEO Tarun Mehta ने सरकार के इस रुख पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह स्कीम मुख्य रूप से “ग्लोबल चैंपियंस” यानी बड़ी और स्थापित कंपनियों के लिए बनाई गई है, जबकि स्टार्टअप्स को इससे बाहर रखा जा रहा है।
मेहता का तर्क है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर की असली नींव स्टार्टअप्स ने रखी है, ऐसे में उन्हें प्रोत्साहन न देना एक बड़ी नीति संबंधी चूक हो सकती है।
क्या है विवाद की जड़?
भारत सरकार की ऑटो PLI स्कीम का उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियों को समर्थन देना है। लेकिन इस स्कीम में शामिल होने के लिए कंपनियों के लिए सख्त वित्तीय शर्तें तय की गई हैं:
- कम से कम ₹10,000 करोड़ का वैश्विक राजस्व
- ₹3,000 करोड़ के फिक्स्ड एसेट्स
इन मानकों के कारण कई उभरते EV स्टार्टअप्स जैसे River और Euler Motors इस स्कीम से बाहर हो गए हैं।
तरुण मेहता की आपत्ति: “इंजन को बाहर कर दिया गया”
तरुण मेहता का तर्क है कि भारत में EV क्रांति की असली नींव इन्हीं “इलेक्ट्रिक-फर्स्ट” स्टार्टअप्स ने रखी है। उन्होंने कहा कि, अगर EV इंडस्ट्री एक ट्रेन है, तो स्टार्टअप्स उसका इंजन हैं। इंजन को हटाकर डिब्बों के आगे बढ़ने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उनका मानना है कि सरकार का “ग्लोबल चैंपियंस” पर फोकस करना समझ में आता है, लेकिन इससे नए और इनोवेटिव खिलाड़ियों को नजरअंदाज करना दीर्घकालिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है। पिछले एक दशक में भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है, जिसमें स्टार्टअप्स की बड़ी भूमिका रही है:
- नई बैटरी और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीक का विकास
- लोकलाइजेशन (स्थानीय निर्माण) को बढ़ावा
- स्मार्ट सॉफ्टवेयर और कनेक्टेड फीचर्स का उपयोग
- पारंपरिक कंपनियों को प्रतिस्पर्धा के लिए मजबूर करना
आज कई स्टार्टअप्स न केवल तकनीकी नवाचार में बल्कि बिक्री और मार्केट शेयर में भी अग्रणी हैं।
बिना PLI के भी निवेश और रोजगार
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मेहता ने उदाहरण देते हुए बताया कि Ather Energy ने बिना PLI लाभ के भी बड़े स्तर पर योगदान दिया है:
- 4,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार
- हजारों अप्रत्यक्ष नौकरियां
- रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में भारी निवेश
- महाराष्ट्र में ₹2,000 करोड़ का नया ग्रीनफील्ड प्लांट
यह दर्शाता है कि स्टार्टअप्स पहले से ही सरकार के लक्ष्यों को पूरा करने में योगदान दे रहे हैं।
लागत में असमानता: 16% तक का नुकसान
मेहता के अनुसार, मौजूदा नीति के कारण नए EV निर्माताओं को 13–16% तक का लागत नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसका कारण यह है कि:
- बड़ी कंपनियों को PLI इंसेंटिव मिल रहा है
- स्टार्टअप्स को समान समर्थन नहीं मिल रहा
- प्रतिस्पर्धा में असंतुलन पैदा हो रहा है
यह स्थिति लंबे समय में इनोवेशन को धीमा कर सकती है। तरुण मेहता ने पूरी PLI स्कीम को खत्म करने की बात नहीं कही, बल्कि उसमें सुधार (calibration) का सुझाव दिया है।










