बिजनौर में इस वर्ष किसानों को गेहूं की बुआई के लिए करीब दोगुना बीज उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि विभाग ने गेहूं के बीज का कोटा बढ़ाकर 14.5 हजार क्विंटल कर दिया है। किसानों को बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा और अक्टूबर से केंद्रों पर बीज उपलब्ध होगा।
उत्तर प्रदेश: बारिश के बीच गेहूं की बुआई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए राहत की खबर है। शासन ने बिजनौर जिले में गेहूं के बीज का कोटा बढ़ाकर 14.5 हजार क्विंटल कर दिया है। इससे इस वर्ष किसानों को पिछले वर्षों की तुलना में लगभग दोगुना बीज उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि विभाग के केंद्रों पर अक्टूबर से बीज मिलना शुरू होगा। किसानों को बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाएगा।
गेहूं के बीज का कोटा बढ़कर 14.5 हजार क्विंटल
बिजनौर में गन्ने के बाद गेहूं सबसे अधिक क्षेत्र में बोई जाने वाली फसल है। जिले के किसान लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि में गेहूं की खेती करते हैं। कोरोना के समय गेहूं के दाम गिरने के बाद किसानों ने गेहूं का रकबा एक लाख हेक्टेयर से भी कम कर दिया था। हालांकि, इसके बाद धीरे-धीरे गेहूं का रकबा फिर बढ़ा है।
कृषि विभाग के अनुसार, आमतौर पर जिले के किसानों को करीब साढ़े आठ हजार क्विंटल गेहूं का बीज उपलब्ध कराया जाता था। इस बार शासन ने इसे बढ़ाकर 14.5 हजार क्विंटल कर दिया है। अधिक बीज उपलब्ध कराने का उद्देश्य गेहूं की बुआई का रकबा बढ़ाना है।
अक्टूबर से कृषि केंद्रों पर मिलेगा बीज
जिले में इस वर्ष चीनी मिलों का पेराई सत्र भी पहले शुरू होने जा रहा है। चार चीनी मिलें सितंबर में और बाकी मिलें अक्टूबर में पेराई शुरू करेंगी। मिलों के जल्दी शुरू होने से गन्ने की कटाई और खेतों के खाली होने का काम भी पहले पूरा होने की उम्मीद है।
कृषि विभाग की ओर से किसानों को अक्टूबर में मिलों की पेराई शुरू होने के आसपास गेहूं का बीज उपलब्ध कराया जाएगा। पेराई शुरू होने से कुछ पहले या उसके बाद कृषि विभाग के केंद्रों से किसानों को बीज मिलना शुरू हो जाएगा।
गेहूं की खेती छोड़ रहे किसानों की समस्या पर भी काम
बिजनौर में कुछ किसान धीरे-धीरे गेहूं की बुआई से दूरी बना रहे हैं। इसके पीछे गन्ने की लेट बुआई और खेतों में समय पर श्रमिकों की उपलब्धता नहीं होना प्रमुख कारणों में शामिल है। गेहूं की कटाई के बाद गन्ने की बुआई में देरी होने की समस्या के समाधान पर भी काम किया जा रहा है।
बीते वर्ष बरकातपुर मिल ने अपने क्षेत्र में गेहूं की बुआई के साथ ही गन्ने की बुआई की तैयारी शुरू कर दी थी। इससे किसानों को दोनों फसलों के बीच समय प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
बीज खरीदते समय ही मिलेगा 50 प्रतिशत अनुदान
किसानों को गेहूं के बीज पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। पहले अनुदान की राशि बाद में किसान के बैंक खाते में पहुंचती थी। अब व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत बीज खरीदते समय ही अनुदान की राशि काट ली जाएगी। यानी किसान को बीज की पूरी कीमत नहीं चुकानी होगी, बल्कि 50 प्रतिशत अनुदान घटाने के बाद जितनी राशि उसके हिस्से में आएगी, उतना ही भुगतान करना होगा। इससे किसानों को बीज खरीदते समय ही आर्थिक राहत मिल सकेगी।











