Budget 2026 से पहले इतिहास की झलक, 2022 में कैसे बदली थी बाजार की दिशा

Union Budget 2026 से पहले निवेशक 2022 के बजट को याद कर रहे हैं, जब क्रिप्टो टैक्स ऐलान से सेंसेक्स करीब 2000 अंक गिरा, लेकिन दिन के अंत मे बाजार ने जोरदार वापसी

Union Budget 2026 से पहले निवेशकों की नजर Budget 2022 पर है, जब क्रिप्टो टैक्स के ऐलान से सेंसेक्स करीब 2000 अंक गिर गया था। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स पर फोकस से बाजार ने दिन के अंत में मजबूती दिखाई थी।

Stock Market: यूनियन बजट 2026 से पहले जब बाजार एक बार फिर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, तो 2022 का बजट स्वाभाविक रूप से चर्चा में है। यही वजह है कि निवेशक यह समझना चाहते हैं कि आखिर उस साल ऐसा क्या हुआ था, जब सेंसेक्स ने बजट के दौरान लगभग 2000 अंकों का गोता लगा दिया था।

बजट और शेयर बाजार का पुराना रिश्ता

भारतीय शेयर बाजार का बजट से रिश्ता हमेशा से भावनात्मक और संवेदनशील रहा है। हर साल जब वित्त मंत्री संसद में यूनियन बजट पेश करती हैं, तो दलाल स्ट्रीट पर उम्मीद, डर और अनुमान एक साथ सक्रिय हो जाते हैं। टैक्स से जुड़े फैसले, सब्सिडी, सरकारी खर्च और नए सेक्टर पर फोकस जैसे ऐलान सीधे-सीधे बाजार की दिशा तय करते हैं। यही कारण है कि बजट के दिन बाजार में भारी Volatility देखने को मिलती है।

इतिहास गवाह है कि कुछ बजट ने बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, जबकि कुछ ने निवेशकों को गहरे झटके दिए। साल 2022 का बजट भी ऐसा ही एक उदाहरण है, जिसने खासकर नए निवेशकों को यह सिखाया कि बजट के दौरान बाजार में धैर्य सबसे बड़ा हथियार होता है।

बजट 2022 से पहले की उम्मीदें

साल 2022 की शुरुआत में निवेशकों को सरकार से कई उम्मीदें थीं। कोरोना महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए टैक्स में राहत, स्टार्टअप और टेक सेक्टर के लिए प्रोत्साहन, डिजिटल इंडिया को बढ़ावा और क्रिप्टो जैसे नए एसेट क्लास पर स्पष्ट नीति की उम्मीद की जा रही थी।

डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही थी और Crypto currency को लेकर युवाओं में खासा उत्साह था। ऐसे में बाजार को लग रहा था कि सरकार या तो इसे रेगुलेट करेगी या फिर किसी हल्के टैक्स ढांचे के साथ इसे स्वीकार करेगी।

क्रिप्टो टैक्स का चौंकाने वाला ऐलान

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने जब Virtual Digital Assets पर टैक्स का ऐलान किया, तो पूरा माहौल बदल गया। क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली कमाई पर सीधे 30 प्रतिशत फ्लैट टैक्स लगाने की घोषणा की गई। इतना ही नहीं, सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि इस सेक्टर में होने वाले घाटे को किसी अन्य मुनाफे से Set-off नहीं किया जा सकेगा।

इसके साथ ही हर ट्रांजैक्शन पर 1 प्रतिशत TDS लगाने का प्रावधान भी किया गया। यह ऐलान बाजार की उम्मीदों के बिल्कुल उलट था। निवेशकों को लगा कि सरकार ने बिना किसी ट्रांजिशन पीरियड के एक उभरते हुए सेक्टर पर सबसे सख्त टैक्स नियम लागू कर दिए हैं।

सेंसेक्स में 2000 अंकों की गिरावट का डर

हालांकि बजट भाषण के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन असली असर उसके बाद दिखा। बजट के तुरंत बाद वाले सत्रों में सेंसेक्स में तेज गिरावट देखने को मिली। कुछ ही समय में इंडेक्स लगभग 2000 अंकों तक लुढ़क गया।

निवेशकों के मन में यह डर बैठ गया कि सरकार आने वाले समय में टेक, फिनटेक और डिजिटल बिजनेस पर और सख्ती कर सकती है। इसका सीधा असर IT, Fintech और New Age कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही दबाव में आ गए।

पैनिक बिकवाली की असली वजह

इस गिरावट की वजह सिर्फ टैक्स नहीं था। बाजार को सबसे ज्यादा डर इस बात का था कि सरकार ने बिना किसी पूर्व संकेत के एक पूरे सेक्टर को सबसे ऊंचे टैक्स स्लैब में डाल दिया। इससे Policy Uncertainty का संकेत मिला, जो किसी भी बाजार के लिए नकारात्मक माना जाता है।

Foreign Institutional Investors यानी FIIs ने भी इस अनिश्चितता के बीच भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने गिरावट को और गहरा कर दिया। Retail Investors में भी घबराहट फैल गई और पैनिक सेलिंग का दौर शुरू हो गया।

बाजार की फितरत और यू-टर्न

शेयर बाजार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह झटकों को जल्दी पचाता है। शुरुआती हाहाकार के बाद जैसे-जैसे बजट के बाकी ऐलानों पर निवेशकों ने ध्यान दिया, तस्वीर बदलने लगी। इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपेक्स और ग्रोथ को लेकर सरकार के विजन ने बाजार को भरोसा दिया।

बजट भाषण खत्म होते-होते निवेशकों को यह समझ आने लगा कि सरकार का फोकस लंबी अवधि की आर्थिक मजबूती पर है। नतीजा यह हुआ कि बाजार ने जोरदार वापसी की।

दिन के अंत में राहत की सांस

दिन के अंत तक सेंसेक्स 849.40 अंकों की मजबूती के साथ 58,862.57 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 237 अंक चढ़कर 17,576.85 पर पहुंच गया। जिन निवेशकों ने घबराहट में बिकवाली नहीं की थी, उनके लिए यह एक बड़ी राहत थी।

यूनियन बजट 2026 से पहले निवेशकों के लिए सबक

जब यूनियन बजट 2026 नजदीक है, तो 2022 का यह अनुभव निवेशकों के लिए एक अहम सबक है। बजट के दिन बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। किसी एक ऐलान के आधार पर जल्दबाजी में फैसला लेना नुकसानदेह हो सकता है।

लॉन्ग टर्म निवेशक के लिए जरूरी है कि वह बजट को एक दिन की घटना न मानकर, सरकार की Overall Policy Direction को समझे। इतिहास बताता है कि बाजार ने हर बड़े झटके के बाद खुद को संभाला है और नई ऊंचाइयों तक पहुंचा है।

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