चंद्रपुरा गोलीकांड में दंपती के बाद घायल बेटे ने भी तोड़ा दम: एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत

चंद्रपुरा गोलीकांड में दंपती के बाद घायल बेटे रोहित सिन्हा की भी रांची में मौत हो गई। तीन मौतों के बाद भी करीब 13 दिन में एक आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ।
चंद्रपुरा गोलीकांड में दंपती के बाद घायल बेटे ने भी तोड़ा दम: एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत
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झारखंड के बोकारो जिले के चंद्रपुरा में 17 सितंबर की शाम हुई गोलीबारी की घटना अब और गंभीर हो गई है। पश्चिमीपल्ली स्थित डीवीसी कॉलोनी में हुए इस हमले में घायल 30 वर्षीय रोहित सिन्हा ने बुधवार सुबह रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इससे इस हत्याकांड में मरने वालों की संख्या तीन हो गई है। इससे पहले रोहित के पिता नरेश सिन्हा और मां रेणू देवी की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के करीब 13 दिन बाद परिवार के तीसरे सदस्य की मौत ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

17 सितंबर की देर शाम चंद्रपुरा थाना क्षेत्र की पश्चिमीपल्ली डीवीसी कॉलोनी में नरेश सिन्हा के आवास एच/एम-14 को हथियारबंद अपराधियों ने निशाना बनाया था। उस समय इलाके में तेज बारिश हो रही थी। इसी दौरान घर में घुसे हमलावरों ने फायरिंग कर दी। गोलियों की चपेट में आने से नरेश सिन्हा और उनकी पत्नी रेणू देवी की मौत हो गई, जबकि उनका बेटा रोहित गंभीर रूप से घायल हो गया था। पुलिस के मुताबिक घटना के बाद से ही मामले की जांच की जा रही थी।

रोहित को गोली लगने के बाद पहले स्थानीय स्तर पर इलाज दिया गया था, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बोकारो जनरल अस्पताल रेफर किया गया। बाद में बेहतर इलाज के लिए रांची के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उनके शरीर में फंसी गोलियों को निकालने के लिए ऑपरेशन भी किया था। कुछ गोलियां निकाली गई थीं, जबकि गर्दन सहित शरीर के अन्य हिस्सों में फंसी गोलियों के कारण उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। मंगलवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और बुधवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजन विपिन सिन्हा ने रोहित की मौत की पुष्टि की है।

रोहित की मौत से अब पुलिस के सामने इस मामले को सुलझाने की चुनौती और बढ़ गई है। घटना के शुरुआती दिनों में रोहित को इस मामले का महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी माना जा रहा था। पुलिस उसके होश में आने और स्थिति बेहतर होने का इंतजार कर रही थी, क्योंकि घटना के समय घर के अंदर वास्तव में क्या हुआ, हमलावर कितने थे और उन्होंने किस तरह हमला किया, इन सवालों के जवाब में रोहित से महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद थी। अब उसकी मौत के बाद पुलिस को उपलब्ध तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर ही मामले की कड़ियां जोड़नी होंगी।

घटना के बाद पुलिस ने घर से कई सामान और दस्तावेज भी जांच के लिए जुटाए थे। रिपोर्टों के अनुसार आवास से डायरी और लैपटॉप सहित कई चीजें साक्ष्य के तौर पर ली गईं। पुलिस ने नरेश सिन्हा के कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल शुरू की थी। बताया गया कि नरेश सिन्हा पहले ब्याज पर पैसे देने का काम करते थे और हाल के दिनों में उन्होंने पैतृक जमीन भी बेची थी। पुलिस इसी तरह के संभावित कारणों और विवादों की कड़ियों को जांच रही थी, लेकिन किसी एक वजह को अब तक आधिकारिक तौर पर हत्या का कारण घोषित नहीं किया गया है।

जांच में रोहित के मोबाइल और लैपटॉप को भी महत्वपूर्ण माना गया था। पुलिस ने उसके संपर्कों, लेनदेन और अन्य डिजिटल जानकारियों से सुराग तलाशने की कोशिश की। कुछ रिपोर्टों में उसके कारोबारी संबंधों में विवाद की बात भी सामने आई थी, लेकिन पुलिस ने इसे हत्या का निश्चित कारण नहीं बताया है। इसलिए इन सभी पहलुओं को जांच के संभावित कोण के तौर पर ही देखा जा रहा है।

घटना के समय रेणू देवी अपनी बेटी से मोबाइल पर वीडियो कॉल पर बात कर रही थीं। रिपोर्ट के अनुसार इसी दौरान गोली चलने की आवाज बेटी ने सुनी। इसके बाद उसने परिवार के एक रिश्तेदार को फोन कर स्थिति देखने के लिए कहा। तेज बारिश के बीच रिश्तेदार मौके पर पहुंचे तो घर के पास गंभीर रूप से घायल लोग पड़े थे। बाद में घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। रेणू देवी को चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया, जबकि रोहित को गंभीर हालत में आगे के इलाज के लिए भेजा गया।

हमले की सूचना मिलने के बाद पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंची थीं। जांच के दौरान आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के अलावा आसपास के लोगों से पूछताछ भी की। जांच में डॉग स्क्वायड और बैलिस्टिक टीम की मदद लिए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। पुलिस की कोशिश थी कि घटनास्थल से मिले फोरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए हमलावरों की पहचान तक पहुंचा जा सके।

बोकारो पुलिस की ओर से मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। अधिकारियों ने अलग-अलग संभावित कोणों से मामले की जांच शुरू की थी। पुलिस ने कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने की बात भी कही थी। हालांकि, 30 सितंबर तक इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। जागरण की ताजा रिपोर्ट के अनुसार घटना के करीब पखवाड़े बाद भी पुलिस मामले का उद्भेदन नहीं कर पाई है।

इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। घटना के बाद से लगातार जांच चलने के बावजूद अभी तक किसी संदिग्ध को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। हालांकि पुलिस का कहना है कि अपराधियों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। चूंकि मामला तीन हत्याओं में बदल चुका है, इसलिए अब जांच एजेंसियों पर जल्द से जल्द हमलावरों की पहचान और घटना के पीछे की वजह सामने लाने का दबाव भी बढ़ गया है।

घटना के समय चंद्रपुरा थाना प्रभारी के पद पर बदलाव भी हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार घटना के आसपास ही पुलिस अधिकारियों के तबादले और पदस्थापन से संबंधित आदेश जारी हुए थे। पुराने थाना प्रभारी विक्रम कुमार के स्थान पर श्रीनिवास सिंह ने जिम्मेदारी संभाली थी। ताजा रिपोर्ट में पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए इस प्रशासनिक बदलाव को भी चर्चा में लाया गया है। हालांकि यह कहना कि थाना प्रभारी के बदलाव के कारण जांच प्रभावित हुई, एक रिपोर्ट में व्यक्त आकलन है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि किसी आधिकारिक जांच निष्कर्ष के रूप में नहीं हुई है।

मृतक नरेश सिन्हा मूल रूप से बिहार के गया जिले के रहने वाले बताए गए हैं और लंबे समय से चंद्रपुरा में रह रहे थे। वे चंद्रपुरा थर्मल से जुड़ी एक निजी कंपनी में काम करते थे और सेवानिवृत्त हो चुके थे। उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी होने की जानकारी सामने आई थी। हमले में पति-पत्नी की मौत के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी उम्मीद घायल बेटे रोहित के ठीक होने की थी, लेकिन करीब 13 दिनों तक जिंदगी के लिए संघर्ष करने के बाद उसकी भी मौत हो गई।

रोहित की मौत के बाद अब इस मामले में तीन पोस्टमार्टम और तीन मौतों से जुड़े साक्ष्य पुलिस जांच का हिस्सा होंगे। घटना में इस्तेमाल हथियार, गोलियों और बैलिस्टिक रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले नमूने, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, डिजिटल उपकरणों तथा परिवार के वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस इन्हीं कड़ियों को जोड़कर हमलावरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

परिवार के तीन सदस्यों की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर भी घटना को लेकर चिंता और आक्रोश है। शुरुआती दिनों में सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की थी। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा झारखंड प्रदेश की ओर से भी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई थी। स्थानीय स्तर पर लोगों की मांग है कि घटना का जल्द खुलासा हो और दोषियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

पुलिस के सामने अब सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर 17 सितंबर की शाम नरेश सिन्हा के घर को ही निशाना क्यों बनाया गया। क्या हमला किसी पुराने विवाद, आर्थिक लेनदेन, निजी रंजिश या किसी अन्य कारण से जुड़ा था, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल पुलिस ने किसी एक कारण को अंतिम रूप से स्वीकार नहीं किया है और कई संभावित पहलुओं की जांच जारी है।

घटना के बाद से परिवार के घर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा तथा पुलिस गतिविधियां बढ़ी हुई थीं। अब रोहित की मौत के बाद केस की धाराओं और जांच की दिशा में भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती हमलावरों की पहचान करना और घटना के पीछे के वास्तविक कारण का पता लगाना है।

चंद्रपुरा गोलीकांड अब केवल डबल मर्डर का मामला नहीं रह गया है, बल्कि एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत की घटना बन चुका है। 17 सितंबर को हुई गोलीबारी में नरेश सिन्हा और रेणू देवी की मौके पर मौत हुई थी, जबकि रोहित ने 13 दिनों तक अस्पताल में इलाज के बाद दम तोड़ दिया। 30 सितंबर तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने के कारण मामले की जांच पर सवाल उठ रहे हैं। अब लोगों की नजर पुलिस की एसआईटी और जांच टीम की अगली कार्रवाई पर है कि वह इस वारदात की कड़ियों को कब तक जोड़ पाती है और हमलावरों तक कैसे पहुंचती है।

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