सारे कोचिंग सेंटर बंद हो जाएं, स्कूलों में ऐसी व्यवस्था करेंगे'; CM बोले- NEET की तैयारी भी कराएंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि छात्रों को कोचिंग की जरूरत न पड़े। NEET की तैयारी भी स्कूलों में कराई जाएगी।
सारे कोचिंग सेंटर बंद हो जाएं, स्कूलों में ऐसी व्यवस्था करेंगे'; CM बोले- NEET की तैयारी भी कराएंगे
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पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी स्कूलों में ऐसी व्यवस्था तैयार करना चाहती है कि छात्रों को कोचिंग संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा, "हम ऐसी व्यवस्था करेंगे कि सारे कोचिंग सेंटर बंद हो जाएं। बच्चों को स्कूलों में ही इतनी अच्छी पढ़ाई मिले कि उन्हें बाहर जाने की जरूरत न पड़े।"

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की योजना छात्रों को स्कूल स्तर पर ही प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कराने की है। उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा यानी NEET की तैयारी भी सरकारी स्कूलों में कराई जाएगी, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी बड़े सपने पूरे कर सकें।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई सुधार किए हैं। स्कूलों में भवन निर्माण, शिक्षकों की नियुक्ति, स्मार्ट क्लास, लैब और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया गया है। अब अगला लक्ष्य शिक्षा की गुणवत्ता को उस स्तर तक पहुंचाना है, जहां छात्रों को कोचिंग संस्थानों की जरूरत ही न महसूस हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के लाखों छात्र हर साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे शहरों या निजी कोचिंग संस्थानों का रुख करते हैं। इससे परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूल और कॉलेज ही ऐसे केंद्र बनें, जहां छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी एक साथ मिल सके।

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था पर भी सख्त रुख दिखाया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा, "अपराध करने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। अपराधियों का पिंडदान कर दो, यानी कानून के दायरे में रहकर उनके खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई करो कि वे अपराध करने से पहले सौ बार सोचें।"

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपराध नियंत्रण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद शिक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारी स्कूलों में वास्तव में उच्च गुणवत्ता की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की व्यवस्था हो जाती है, तो इससे लाखों छात्रों को फायदा होगा। वहीं, कोचिंग संस्थानों की भूमिका और भविष्य को लेकर भी बहस शुरू हो गई है।

राजनीतिक गलियारों में भी मुख्यमंत्री के बयान की चर्चा है। समर्थक इसे शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ा विजन बता रहे हैं, जबकि विपक्ष का कहना है कि ऐसे लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक सुधार और संसाधनों की जरूरत होगी।

फिलहाल मुख्यमंत्री का यह बयान बिहार की शिक्षा व्यवस्था और अपराध नियंत्रण दोनों मुद्दों पर नई बहस छेड़ चुका है। आने वाले समय में सरकार इन घोषणाओं को किस तरह लागू करती है, इस पर छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों की नजर बनी रहेगी।

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