केरल सरकार ने CMRL से जुड़े कथित रिश्वत मामले में ED की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस जांच के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी और दामाद पीए मोहम्मद रियास के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
तिरुवंतपुरम: केरल की राजनीति में CMRL-Exalogic मामले को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली UDF सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस जांच का आदेश दिया है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा विपक्ष के नेता पिनराई विजयन, उनकी बेटी टी. वीणा और उनके पति पीए मोहम्मद रियास के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई की मांग की गई थी। राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने मामले की जांच के लिए पुलिस महानिदेशक (DGP) रावड़ा ए. चंद्रशेखर को जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। यह फैसला एडवोकेट जनरल की कानूनी राय पर विचार करने के बाद लिया गया।
ED ने FIR दर्ज करने की मांग की थी
CMRL मामले में ED ने राज्य पुलिस प्रमुख को रिपोर्ट भेजकर पिनराई विजयन, वीणा टी और पीए मोहम्मद रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने की मांग की थी।
ED का कहना है कि उसकी मनी लॉन्ड्रिंग जांच और Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत की गई तलाशी के दौरान कुछ ऐसे साक्ष्य सामने आए, जिनके आधार पर राज्य पुलिस द्वारा कथित भ्रष्टाचार के पहलू की जांच की जानी चाहिए।
ED ने अपनी रिपोर्ट PMLA की धारा 66(2) के तहत राज्य पुलिस के साथ साझा की थी। इस प्रावधान के तहत ED अपनी जांच के दौरान सामने आई ऐसी जानकारी दूसरी एजेंसियों को भेज सकती है, जो उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले अपराधों से संबंधित हो।
हालांकि, ED की ओर से लगाए गए आरोप अभी जांच के विषय हैं। इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता।
एडवोकेट जनरल की राय के बाद सरकार का फैसला
राज्य सरकार ने ED की रिपोर्ट मिलने के बाद मामले पर कानूनी राय लेने के लिए एडवोकेट जनरल से सलाह मांगी थी। 21 सितंबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक एडवोकेट जनरल ने FIR दर्ज करने या आगे की कार्रवाई का फैसला पुलिस पर छोड़ दिया था।
इसके बाद गृह विभाग ने सरकार के सामने मामला रखा। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के अनुसार, एडवोकेट जनरल की राय मिलने के बाद मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की गई।
चर्चा के बाद सरकार ने DGP को मामले की जांच करने का निर्देश देने का फैसला किया।
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने क्या कहा?
रमेश चेन्निथला ने बताया कि एडवोकेट जनरल की राय दो दिन पहले सरकार को प्राप्त हुई थी। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत की और जांच का आदेश जारी करने का निर्णय लिया।
गृह मंत्री के अनुसार, DGP को मामले की जांच सौंपने से संबंधित आदेश जारी किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि फिलहाल सरकार ने ED की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस स्तर पर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
यह निर्णय सीधे तौर पर आरोपों को साबित नहीं करता। जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, लेन-देन और अन्य साक्ष्यों का स्वतंत्र परीक्षण किया जाएगा।
CMRL और Exalogic के बीच कथित लेन-देन क्या है?
मामले की पृष्ठभूमि में कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) और वीणा से जुड़ी कंपनी Exalogic Solutions के बीच हुए कथित वित्तीय लेन-देन हैं।
ED ने आरोप लगाया है कि CMRL से Exalogic को भुगतान किए गए कुछ पैसे वास्तविक सेवाओं के बदले नहीं थे। एजेंसी ने इन लेन-देन को कथित तौर पर रिश्वत से जोड़ते हुए राज्य पुलिस से भ्रष्टाचार का अलग मामला दर्ज करने का अनुरोध किया है।
ED की रिपोर्ट में कथित तौर पर लेन-देन, बैंक खातों और जांच के दौरान जुटाई गई अन्य जानकारी का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन दावों की वैधानिक जांच अब राज्य पुलिस के स्तर पर आगे बढ़ेगी।
₹3.28 करोड़ के कथित भुगतान का मामला
ED की पहले की रिपोर्टों के अनुसार, CMRL से जुड़े कथित भुगतान और Exalogic से संबंधित लेन-देन इस जांच का प्रमुख हिस्सा हैं। एजेंसी ने कथित तौर पर लगभग ₹3.28 करोड़ के भुगतान को लेकर सवाल उठाए हैं और इसे भ्रष्टाचार के आरोपों से जोड़ा है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी जांच एजेंसी की रिपोर्ट में दर्ज आरोप और अदालत में साबित अपराध अलग-अलग कानूनी अवस्थाएं हैं। पिनराई विजयन, वीणा टी और पीए मोहम्मद रियास के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच और संभावित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
मामले में पिनराई विजयन, वीणा और रियास के नाम
ED की रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के अलावा उनकी बेटी टी. वीणा और दामाद पीए मोहम्मद रियास का नाम है। रियास वर्तमान में विधायक हैं और पूर्व में राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
ED ने राज्य पुलिस से Prevention of Corruption Act के तहत कार्रवाई की मांग की है। राज्य सरकार की ओर से अब DGP को जांच सौंपने का निर्णय लिया गया है।
इस घटनाक्रम के बाद मामले का अगला चरण पुलिस जांच होगा। जांच के आधार पर FIR दर्ज करने और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
CPI(M) ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए
सरकार के फैसले के बाद विपक्षी दल CPI(M) ने इसकी आलोचना की है। पार्टी ने ED की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार द्वारा जांच आगे बढ़ाने के निर्णय पर सवाल उठाए हैं।
CPI(M) नेताओं ने केंद्र की एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, सरकार ने कहा है कि उसका निर्णय एडवोकेट जनरल की कानूनी राय और ED की ओर से भेजी गई रिपोर्ट की जांच के आधार पर लिया गया है।
इस तरह मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं, लेकिन जांच का कानूनी पक्ष अब पुलिस की प्रक्रिया से आगे बढ़ेगा।
CMRL-Exalogic मामले की जांच का अगला चरण
CMRL-Exalogic मामला पहले से ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दायरे में रहा है। सितंबर 2026 में ED ने राज्य पुलिस को भ्रष्टाचार से जुड़े अलग मामले पर विचार करने के लिए अपनी रिपोर्ट भेजी थी।
अब केरल सरकार के निर्देश के बाद DGP के नेतृत्व में पुलिस इस रिपोर्ट और उसमें शामिल सामग्री की जांच करेगी। इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि उपलब्ध सामग्री से संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं और आगे FIR तथा अन्य कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी आगे की कानूनी स्थिति
फिलहाल सरकार ने केवल जांच का आदेश दिया है। यह किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं है। पुलिस जांच के दौरान ED की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।
मामले में आगे FIR दर्ज होती है या नहीं, किन धाराओं में कार्रवाई होती है और जांच किस दिशा में जाती है, यह आने वाले चरणों में स्पष्ट होगा।
इस घटनाक्रम ने केरल की राजनीति में CMRL-Exalogic विवाद को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। एक ओर ED की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस जांच शुरू हो रही है, वहीं दूसरी ओर CPI(M) ने सरकार के फैसले की आलोचना की है। अब जांच की प्रगति और उसके निष्कर्ष इस मामले की आगे की कानूनी और राजनीतिक दिशा तय करेंगे।











