लड़की बोली जिम ऑनर ने चेंजिंग रूम में वीडियो बनाया: कहा- फिजिकल होना है, मना करोगी तो वायरल कर दूंगा

दावणगेरे में जिम संचालक पर चेंजिंग रूम में कथित वीडियो बनाकर युवती को धमकाने का आरोप लगा है। आरोपी ने खुद ब्लैकमेल किए जाने का दावा किया।
लड़की बोली जिम ऑनर ने चेंजिंग रूम में वीडियो बनाया: कहा- फिजिकल होना है, मना करोगी तो वायरल कर दूंगा
Photo Credit / Attribution: Google

जिम और फिटनेस सेंटर को लोग अपनी सेहत और फिटनेस सुधारने के लिए सुरक्षित जगह मानते हैं, लेकिन कर्नाटक के दावणगेरे से सामने आए एक मामले ने महिलाओं की निजता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक युवती ने जिम संचालक पर आरोप लगाया है कि उसने महिला चेंजिंग रूम में कथित तौर पर वीडियो बनाया और बाद में उसी वीडियो का इस्तेमाल उसे डराने-धमकाने के लिए किया। युवती का दावा है कि आरोपी उससे शारीरिक संबंध बनाने की मांग करता था और मना करने पर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देता था। आरोपी पक्ष ने हालांकि अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और मामले में ब्लैकमेल किए जाने की बात कही गई है।

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मामला दावणगेरे के पावर फिटनेस जिम से जुड़ा है। जिम संचालक और ट्रेनर इस्माइल के खिलाफ एक महिला ने शिकायत की है। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया कि जिम के महिला ड्रेसिंग या चेंजिंग रूम में कथित तौर पर वीडियो रिकॉर्ड किए जाते थे और बाद में इन्हीं रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल महिलाओं को धमकाने के लिए किया जाता था। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की।

पीड़िता के अनुसार, वह करीब डेढ़ साल से जिम जा रही थी। उसका आरोप है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान जिम के महिला चेंजिंग रूम में उसकी और दूसरी महिलाओं की कथित रिकॉर्डिंग की गई। महिला ने दावा किया कि बाद में इन वीडियो को लेकर उस पर दबाव बनाया गया। उसे कथित तौर पर धमकी दी जाती थी कि यदि उसने आरोपी की बात नहीं मानी तो वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिए जाएंगे या उसके परिवार के लोगों को दिखा दिए जाएंगे।

युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी उससे शारीरिक संबंध बनाने की मांग करता था। उसका कहना है कि जब उसने इसका विरोध किया तो उसे कथित वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई। ऐसे आरोपों के कारण मामला केवल जिम में सुरक्षा और निजता का नहीं रह जाता, बल्कि इसमें कथित डिजिटल ब्लैकमेल और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर पहलुओं की भी जांच जरूरी हो जाती है। हालांकि पुलिस जांच पूरी होने से पहले आरोपों को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।

महिला का दावा है कि आरोपी ने कथित वीडियो के जरिए उस पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश की। उसने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वीडियो सामने आने के डर से वह मानसिक तनाव में थी। महिला के अनुसार, आरोपी की ओर से कथित तौर पर यह दबाव बनाया जाता था कि जब उसे बुलाया जाए तो उसे वहां पहुंचना होगा और उसकी बात माननी होगी। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि कथित तौर पर पैसे की मांग किए जाने के आरोप सामने आए हैं।

मामले में सबसे गंभीर सवाल महिला चेंजिंग रूम की निजता को लेकर उठ रहा है। चेंजिंग रूम ऐसा स्थान है जहां लोग सामान्य तौर पर अपनी निजी गतिविधियों के दौरान पूर्ण गोपनीयता की उम्मीद करते हैं। ऐसे स्थान पर बिना जानकारी या सहमति के रिकॉर्डिंग किए जाने का आरोप बेहद गंभीर है। पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती होगी कि कोई रिकॉर्डिंग हुई थी या नहीं, रिकॉर्डिंग किस उपकरण से की गई, उसमें कौन-कौन लोग दिखाई दे रहे हैं और रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल किस तरह किया गया।

जांच का एक अहम हिस्सा आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की पड़ताल भी हो सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस जांच के दौरान मोबाइल में कई महिलाओं की कथित तस्वीरें और वीडियो मिलने का दावा किया गया है। हालांकि इन डिजिटल सामग्री की वास्तविक प्रकृति, संख्या और उनका स्रोत पुलिस की जांच तथा फोरेंसिक परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि जिम में उसके साथ यौन शोषण किया गया। उसने कहा कि कथित रिकॉर्डिंग को लेकर डर पैदा करके उस पर दबाव बनाया जाता था। इस तरह के आरोपों की जांच में महिला का बयान, डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा, जिम परिसर की व्यवस्था, CCTV सिस्टम और वहां मौजूद लोगों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि किसी CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग उपलब्ध है तो उससे यह भी पता लगाया जा सकता है कि संबंधित स्थान पर कौन-कौन लोग आते-जाते थे।

मामले का दूसरा पक्ष भी सामने आया है। आरोपी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार करने के बजाय खुद को ब्लैकमेल किए जाने की बात कही है। यानी जांच के दौरान पुलिस को दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल करनी होगी। केवल शिकायत या आरोपी के बयान के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। पुलिस को यह देखना होगा कि उपलब्ध डिजिटल और अन्य साक्ष्य किस पक्ष के दावे की पुष्टि करते हैं।

इस मामले ने जिम में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी बहस छेड़ दी है। देश के कई हिस्सों में जिम और फिटनेस सेंटरों में महिला सदस्यों के लिए अलग चेंजिंग रूम, महिला स्टाफ, नियंत्रित प्रवेश और CCTV जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया जाता है। हालांकि CCTV का इस्तेमाल भी इस तरह होना चाहिए कि सदस्यों की निजता प्रभावित न हो। चेंजिंग रूम और ऐसे निजी स्थानों के अंदर रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भी जिम संचालन को लेकर सुरक्षा मानकों पर जोर दिया गया है। अमरोहा में जारी दिशा-निर्देशों में महिलाओं के लिए महिला ट्रेनर, अलग चेंजिंग रूम, पहचान सत्यापन, CCTV और DVR जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिम संचालन में केवल उपकरण और ट्रेनर ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि सदस्यों की सुरक्षा और गोपनीयता भी व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

दावणगेरे मामले में पुलिस को यह भी जांचना होगा कि यदि कथित तौर पर किसी महिला की रिकॉर्डिंग की गई तो वह रिकॉर्डिंग कहां सुरक्षित रखी गई थी। क्या वह केवल मोबाइल में थी या किसी दूसरे डिवाइस अथवा ऑनलाइन अकाउंट में भी भेजी गई थी? क्या उसे किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा किया गया? क्या किसी को सोशल मीडिया पर भेजा गया? इन सवालों के जवाब मामले की दिशा तय कर सकते हैं।

यदि किसी व्यक्ति को निजी वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसकी इच्छा के खिलाफ किसी काम के लिए मजबूर किया गया हो, तो मामला गंभीर कानूनी धाराओं के तहत जांच के दायरे में आ सकता है। भारतीय न्याय संहिता में महिला की निजी गतिविधि की बिना सहमति तस्वीर या वीडियो कैप्चर करने से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं। डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल धमकी या जबरन वसूली के लिए किए जाने की स्थिति में अन्य धाराएं भी लागू हो सकती हैं। हालांकि किसी विशेष मामले में कौन-सी धाराएं लगेंगी, यह पुलिस की जांच और शिकायत में सामने आए तथ्यों पर निर्भर करता है।

मामले में यह पहलू भी महत्वपूर्ण है कि कथित वीडियो में यदि कई महिलाओं की रिकॉर्डिंग होने की बात सामने आती है तो जांच का दायरा बढ़ सकता है। उपलब्ध रिपोर्ट में एक पीड़िता ने दावा किया है कि पुलिस को आरोपी के मोबाइल से अन्य महिलाओं से संबंधित कथित सामग्री के बारे में भी जानकारी मिली। हालांकि यह दावा स्वतंत्र रूप से साबित होना बाकी है और पुलिस की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि ऐसी सामग्री वास्तव में क्या थी और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

महिलाओं की निजता से जुड़े मामलों में पीड़ितों की पहचान और निजी सामग्री की सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में कथित वीडियो या तस्वीरों को साझा करना या उन्हें दोबारा प्रसारित करना पीड़ित की परेशानी बढ़ा सकता है। इसलिए जांच के दौरान बरामद डिजिटल सामग्री को सार्वजनिक करने के बजाय पुलिस और फोरेंसिक एजेंसियों को ही उसका परीक्षण करना चाहिए।

यह मामला जिम संचालकों और फिटनेस सेंटर प्रबंधन के लिए भी एक गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जा सकता है। किसी भी फिटनेस सेंटर में सदस्य सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम, महिला स्टाफ, नियंत्रित प्रवेश, शिकायत व्यवस्था और निजी स्थानों की सुरक्षा जरूरी है। कर्मचारियों और ट्रेनरों के व्यवहार को लेकर भी स्पष्ट आचार संहिता होनी चाहिए। किसी सदस्य को धमकाने या उसकी निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करने की शिकायत मिलने पर तत्काल जांच की व्यवस्था होनी चाहिए।

फिलहाल दावणगेरे के इस मामले में पीड़िता के आरोप और आरोपी का पक्ष दोनों जांच के दायरे में हैं। पीड़िता का कहना है कि चेंजिंग रूम में कथित वीडियो बनाकर उसे शारीरिक संबंध के लिए दबाव में लाया गया और वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई, जबकि आरोपी की ओर से ब्लैकमेल किए जाने का दावा किया गया है। अब पुलिस के सामने चुनौती है कि वह डिजिटल साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए।

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