रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने सोमवार को भारतीय सशस्त्र बलों के लिए करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन प्रस्तावों में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की अलग-अलग जरूरतों को शामिल किया गया है।
Defence Acquisition Council: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने सोमवार, 7 सितंबर को लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन प्रस्तावों के तहत भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की विभिन्न परिचालन एवं रणनीतिक जरूरतों को पूरा किया जाएगा। खास बात यह है कि मंजूर किए गए प्रस्तावों में करीब 98 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योगों से किए जाने की योजना है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन रक्षा खरीद प्रस्तावों का उद्देश्य तीनों सेनाओं की क्षमताओं को मजबूत करना और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को बड़े स्तर पर ऑर्डर मिलने के साथ देश की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई DAC की बैठक
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 7 सितंबर को रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सशस्त्र बलों की मौजूदा और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न रक्षा प्रणालियों और उपकरणों से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया गया। DAC रक्षा खरीद से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय लेने वाली प्रमुख संस्था है। परिषद की मंजूरियों के बाद संबंधित रक्षा खरीद प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों और आगे की स्वीकृतियों के अनुसार आगे बढ़ती हैं।
भारतीय सेना के लिए कई अहम उपकरणों को मंजूरी
रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण उपकरणों और प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी गई है। इनमें केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) रेकी वाहन शामिल हैं। ये वाहन संभावित CBRN खतरों की पहचान और संबंधित परिस्थितियों में सैन्य अभियानों की क्षमता को मजबूत करने में उपयोगी होंगे।
इसके अलावा सेना के लिए हाई मोबिलिटी वाहन, सेल्फ-प्रोपेल्ड मैकेनिकल माइन लेयर्स और एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टरों से संबंधित प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली है। इन प्रणालियों का इस्तेमाल सैन्य बलों की गतिशीलता, परिचालन क्षमता और विभिन्न इलाकों में तैनाती को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।
![]()
ब्रिजिंग सिस्टम और अन्य सैन्य क्षमताओं पर जोर
DAC ने सेना के लिए ट्रॉवल टैंकों और सर्वत्र ब्रिज सिस्टम से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। ऐसे उपकरण कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सैन्य आवाजाही और अभियानों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सर्वत्र ब्रिज सिस्टम जैसे उपकरण विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी होते हैं, जहां सैन्य वाहनों और उपकरणों को नदियों, नालों या अन्य बाधाओं को पार कर आगे बढ़ाना होता है। वहीं, अन्य स्वीकृत प्रणालियां सेना की इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक क्षमताओं को मजबूत करने में मदद कर सकती हैं।
98% खरीद भारतीय उद्योगों से होने का महत्व
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि करीब 98 प्रतिशत रक्षा खरीद भारतीय उद्योगों से किए जाने की बात सामने आई है। यह भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरेलू कंपनियों से बड़े पैमाने पर रक्षा उपकरणों की खरीद होने से स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहन मिल सकता है। साथ ही इससे रक्षा क्षेत्र में तकनीकी क्षमता, उत्पादन आधार और आपूर्ति श्रृंखला के विस्तार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।








