Aravalli Hills: अरावली कमिटी के एक्सटेंशन पर CJI सूर्यकांत सख्त, 2 महीने में रिपोर्ट देने का आदेश

Aravalli Hills मामले में CJI सूर्यकांत ने हाई पावर कमिटी की एक्सटेंशन मांग खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर तक रिपोर्ट देने का आदेश दिया

अरावली हिल्स की परिभाषा तय करने के लिए बनी हाई पावर्ड कमिटी की ओर से मांगे गए छह महीने के एक्सटेंशन पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कमिटी की 28 फरवरी 2027 तक का समय देने की मांग खारिज कर दी।

Aravalli Hills Case: अरावली पहाड़ियों की परिभाषा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर्ड कमिटी के कामकाज को लेकर सख्त रुख अपनाया है। भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कमिटी की रिपोर्ट दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया। कमिटी ने 28 फरवरी 2027 तक अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अब उसे दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कमिटी के लंबे एक्सटेंशन मांगने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर इतनी लंबी तारीख दी गई तो यह उनकी रिटायरमेंट के बाद की तारीख मांगने जैसा होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मौजूदा कमिटी निर्धारित समय में काम पूरा करने में सक्षम नहीं है, तो उसके पुनर्गठन पर विचार किया जा सकता है।

30 नवंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश

सोमवार को हुई सुनवाई में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने हाई पावर्ड कमिटी को स्पष्ट समयसीमा दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पैनल को 30 नवंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। पीठ ने कमिटी को तेजी से काम करने और जरूरत पड़ने पर दिन-रात काम करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख बताता है कि अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और इससे जुड़े पर्यावरणीय तथा अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर अदालत जल्द निष्कर्ष तक पहुंचना चाहती है।

कमिटी की ओर से 28 फरवरी 2027 तक कार्यकाल बढ़ाने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बजाय दो महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा तय कर दी।

कमिटी सक्षम नहीं तो किया जा सकता है पुनर्गठन

Aravalli Hills: अरावली कमिटी के एक्सटेंशन पर CJI सूर्यकांत सख्त, 2 महीने में रिपोर्ट देने का आदेश

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी कहा कि अगर कमिटी समय पर काम पूरा करने में सक्षम नहीं है, तो अदालत उसके पुनर्गठन पर विचार कर सकती है। यानी निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट दाखिल करना पैनल के लिए अब प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। अरावली हिल्स का मामला केवल भौगोलिक परिभाषा तक सीमित नहीं है। 

इस क्षेत्र से जुड़े पर्यावरणीय संरक्षण, भूमि उपयोग और खनन जैसे विषय भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश होने वाली कमिटी की रिपोर्ट आगे की न्यायिक प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकती है।

सभी हितधारकों से बातचीत के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ पैनल को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों सहित सभी प्रमुख हितधारकों से बातचीत करे। कोर्ट का उद्देश्य अरावली पहाड़ियों और पर्वत-श्रेणियों की परिभाषा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को व्यापक तरीके से समझना है। पीठ ने कमिटी को यह विकल्प भी दिया है कि यदि किसी विशेष मुद्दे पर तत्काल न्यायिक निर्णय की आवश्यकता महसूस होती है तो वह चुनिंदा विषयों पर अंतरिम रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। इससे अदालत महत्वपूर्ण सवालों पर अंतिम रिपोर्ट की प्रतीक्षा किए बिना अलग से विचार कर सकेगी।

2 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

रिपोर्ट के मुताबिक, अरावली पैनल को पहले 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। हालांकि, रिपोर्ट दाखिल करने की समयसीमा को लेकर अब अदालत ने नई व्यवस्था तय की है। कमिटी को 30 नवंबर तक रिपोर्ट देने का निर्देश मिलने के बाद मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को होगी। यह हाई पावर्ड एक्सपर्ट कमिटी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इसी साल गठित की गई थी। इसका उद्देश्य अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और उससे जुड़े विभिन्न विवादित पहलुओं की समीक्षा करना है।

CJI Surya Kant ने 24 नवंबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला था। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 को समाप्त होगा और वह इसी तारीख को सेवानिवृत्त होंगे।

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