असम के DDO देवेश्वर बोरा को करोड़ों की कथित ठगी के मामले में गिरफ्तार किया गया। विजिलेंस के मुताबिक, वह CM और बड़े नेताओं की आवाज की नकल कर लोगों को सरकारी ठेका, नौकरी और लाइसेंस दिलाने का भरोसा देता था।
गुवाहाटी: असम राज्य सिविल सर्विस के अधिकारी और धेमाजी के जिला विकास अधिकारी (DDO) देवेश्वर बोरा को मुख्यमंत्री विजिलेंस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ सरकारी ठेका, सरकारी नौकरी और शराब की दुकान का लाइसेंस दिलाने का दावा कर लोगों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये वसूलने का मामला सामने आया है। जांच एजेंसी के अनुसार, कथित धोखाधड़ी का सिलसिला वर्ष 2011 से चल रहा था। जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि लोगों का विश्वास जीतने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई, मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ नेताओं तथा मंत्रियों की आवाज की नकल कर फोन करवाए जाते थे।
मुख्यमंत्री विजिलेंस की शुरुआती जांच के मुताबिक, बोरा ने कथित तौर पर एक व्यक्ति से 2 करोड़ रुपये और दूसरे व्यक्ति से 50 लाख रुपये लिए। उन पर राजनीतिक नेता रमेन बरठाकुर से भी 50 लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप है। इसके अलावा सरकारी बंगले की मरम्मत से जुड़े एक ठेकेदार को काम पूरा होने के बाद भुगतान नहीं करने की शिकायत भी सामने आई है।
एजेंसी का कहना है कि मामले में पीड़ितों की संख्या और कथित वित्तीय लेन-देन की कुल रकम आगे की जांच में बढ़ सकती है।
बड़े नेताओं की आवाज की नकल से बनाता था भरोसा
CM विजिलेंस की SSP रोजी कलिता के मुताबिक, बोरा कथित तौर पर लोगों के सामने अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता था। जांच के दौरान कुछ पीड़ितों ने बताया कि उन्हें बड़े नेताओं और मंत्रियों से फोन पर बातचीत कराई जाती थी।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन फोन कॉल में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई, मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ नेताओं एवं मंत्रियों की आवाज की नकल की जाती थी।
इस कथित तरीके से लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की जाती थी कि बोरा की सरकार और सत्ता के शीर्ष स्तर तक सीधी पहुंच है। इसके बाद सरकारी ठेका, नौकरी या लाइसेंस जैसे काम कराने के नाम पर उनसे पैसे लिए जाते थे।
विजिलेंस के मुताबिक, इस भरोसे के कारण कुछ लोगों ने बोरा को लाखों और करोड़ों रुपये तक दिए। एजेंसी का यह भी कहना है कि बोरा एक व्यक्ति से प्राप्त रकम को दूसरे व्यक्ति को देने के लिए इस्तेमाल करता था और इसी तरह कथित नेटवर्क को संचालित किया जाता था।
अकेला नहीं था बोरा, टीम की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान मुख्यमंत्री विजिलेंस को कथित धोखाधड़ी में अन्य लोगों की भूमिका के संकेत भी मिले हैं। एजेंसी के अनुसार, बोरा अकेले काम नहीं कर रहा था और उसके साथ एक टीम जुड़ी हुई थी।
इस नेटवर्क में शामिल लोग कथित तौर पर संभावित पीड़ितों से संपर्क करने, फोन पर बातचीत कराने और पैसों के लेन-देन में मदद करते थे। अब जांच एजेंसी इन लोगों की पहचान करने और कथित अपराध में उनकी भूमिका का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
विजिलेंस के पास कई लोगों की शिकायतें पहुंचने के बाद अलग-अलग शिकायतों और FIR को जोड़कर देवेश्वर बोरा के खिलाफ केस नंबर 14/26 दर्ज किया गया है।
एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ठगी का कुल वित्तीय आकार कितना है और इस नेटवर्क से कितने लोग प्रभावित हुए हैं।
9 मोबाइल फोन बरामद, केवल एक SIM बोरा के नाम
जांच के दौरान बोरा के पास से 9 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। विजिलेंस के मुताबिक, इनमें इस्तेमाल किए गए SIM कार्ड में केवल एक बोरा के नाम पर था, जबकि बाकी SIM दूसरे लोगों के नाम पर पाए गए।
अब जांचकर्ता इन मोबाइल नंबरों और SIM कार्ड के इस्तेमाल की जानकारी जुटा रहे हैं। अधिकारियों का यह पता लगाने का प्रयास है कि दूसरे व्यक्तियों के नाम पर जारी SIM कार्ड वास्तव में कौन इस्तेमाल कर रहा था।
जांच में मोबाइल फोन के डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। विजिलेंस इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत संभावित अपराधों की भी जांच कर रही है।
यह जांच कथित फोन प्रैंक या आवाज की नकल तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लोगों, संचार माध्यमों और पैसों के लेन-देन की पूरी श्रृंखला को समझने पर भी केंद्रित है।
परिवार के नाम पर संपत्तियों की भी पड़ताल
मुख्यमंत्री विजिलेंस बोरा की कथित आय से अधिक संपत्ति की भी जांच कर रही है। शुरुआती जांच में गुवाहाटी और लखीमपुर में उनकी कथित संपत्तियों से संबंधित जानकारी सामने आने की बात कही गई है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, कुछ संपत्तियां उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर होने की जानकारी मिली है। यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ संपत्तियां उनके भाई के नाम पर रखी गई थीं।
जांच अधिकारियों ने बोरा के भाई का बयान भी दर्ज किया है। अब एजेंसी बोरा की घोषित आय, संभावित अवैध आय और उनके तथा परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों का मिलान करने की प्रक्रिया में है।
यदि जांच में आय और संपत्तियों के बीच कोई असंगति सामने आती है, तो एजेंसी उसके आधार और स्रोत की भी जांच कर सकती है।
अरुणाचल प्रदेश में भी धोखाधड़ी का मामला
देवेश्वर बोरा के खिलाफ अरुणाचल प्रदेश में भी धोखाधड़ी से संबंधित मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। असम CM विजिलेंस इस मामले को भी अपनी जांच में शामिल कर रही है।
एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या असम में सामने आए कथित नेटवर्क और अरुणाचल प्रदेश से जुड़े मामले के बीच कोई संबंध है। इसके लिए पुराने रिकॉर्ड, शिकायतों और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।
फिलहाल इस संबंध में जांच जारी है और किसी भी आरोप का अंतिम निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
ठेके, नौकरी और लाइसेंस के नाम पर कथित वसूली
विजिलेंस के अनुसार, बोरा पर सरकारी काम दिलाने के अलावा सरकारी नौकरी और शराब की दुकान का लाइसेंस दिलाने का दावा करके पैसे लेने के आरोप हैं।
ऐसे मामलों में सरकारी पद और कथित राजनीतिक संपर्क का इस्तेमाल कर भरोसा पैदा करना जांच का महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। अगर जांच एजेंसी के आरोप सही साबित होते हैं, तो मामले में सरकारी पद के कथित दुरुपयोग के साथ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े कई पहलू सामने आ सकते हैं।
हालांकि, अभी जांच जारी है और अदालत में आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। गिरफ्तार किया जाना किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता।
डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड पर नजर
जांच आगे बढ़ने के साथ मोबाइल फोन, SIM कार्ड, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भूमिका बढ़ सकती है। एजेंसी कथित नेटवर्क में शामिल लोगों और पैसों के अंतिम उपयोग का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
विजिलेंस यह भी जांच रही है कि जिन लोगों से कथित तौर पर पैसे लिए गए, उन्हें सरकारी काम या अन्य सुविधाएं दिलाने के लिए किसी अधिकारी या विभाग से संपर्क किया गया था या नहीं।
इससे मामले में कथित धोखाधड़ी के तरीके और सरकारी तंत्र के किसी संभावित दुरुपयोग की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
जांच में और नाम सामने आने की संभावना
देवेश्वर बोरा की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा उनके कथित नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन, मोबाइल और SIM कार्ड तथा संपत्तियों तक फैल गया है।
मुख्यमंत्री विजिलेंस के अनुसार, शिकायतों की संख्या बढ़ सकती है और जांच के दौरान नए पीड़ितों या कथित सहयोगियों की पहचान भी हो सकती है।
फिलहाल एजेंसी कथित ठगी की कुल रकम, नेटवर्क में शामिल लोगों और संपत्तियों के स्रोत की जांच कर रही है। मामले की आगे की दिशा जांच से सामने आने वाले डिजिटल, वित्तीय और दस्तावेजी साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
असम में एक सरकारी अधिकारी पर लगे इन गंभीर आरोपों ने सरकारी पद और कथित प्रभाव का इस्तेमाल कर लोगों से धन वसूलने के सवाल को भी सामने ला दिया है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा।









