दिल्ली PG हादसा: चौथी गिरफ्तारी, खतरनाक बिल्डिंग गिराने का काम शुरू

दिल्ली के सत्य निकेतन PG हादसे में लेबर कॉन्ट्रैक्टर गिरफ्तार हुआ। MCD ने खतरनाक इमारत गिराना शुरू किया। सुप्रीम कोर्ट भी देशभर की जर्जर इमारतों पर सुनवाई करेगा

दिल्ली के सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने के मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश से लेबर कॉन्ट्रैक्टर को गिरफ्तार किया है। हादसे के बाद MCD ने पड़ोसी खतरनाक इमारत को गिराना शुरू कर दिया। मामले में अब तक चार गिरफ्तारियां हुई हैं।

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG बिल्डिंग गिरने के हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कासगंज से लेबर कॉन्ट्रैक्टर को गिरफ्तार किया है। यह इस मामले में चौथी गिरफ्तारी है। वहीं, दिल्ली नगर निगम (MCD) ने हादसे वाली इमारत से सटी एक अन्य खतरनाक बिल्डिंग को गिराने का काम शुरू कर दिया है।

6 सितंबर को ‘हॉस्टल डेज’ नाम की इमारत ढह गई थी। हादसे में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई थी और 5 लोग घायल हुए थे। घटना के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं।

हादसे वाली इमारत से सटी बिल्डिंग पर MCD का एक्शन

MCD ने मंगलवार को सत्य निकेतन में उस इमारत को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की, जो हादसे में ढही ‘हॉस्टल डेज’ बिल्डिंग से सटी हुई है। अधिकारियों ने हादसे के बाद इस पड़ोसी इमारत को खतरनाक घोषित किया था।

इस बिल्डिंग में गर्ल्स PG संचालित हो रहा था। पड़ोसी इमारत गिरने के बाद इसे खाली करा लिया गया था। मंगलवार को शुरू हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई शाम तक चली और इसे बुधवार सुबह दोबारा शुरू किया जाना है।

प्रशासन का यह कदम इलाके में मौजूद दूसरी जर्जर इमारतों को लेकर बढ़ी चिंता के बीच आया है।

हादसे में अब तक चार गिरफ्तारियां

पुलिस ने सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के मामले में उत्तर प्रदेश के कासगंज से एक लेबर कॉन्ट्रैक्टर को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या चार हो गई है।

इससे पहले पुलिस ने PG के मालिक हरिराम बंसल, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार किया था। तीनों को सोमवार रात पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था।

अदालत ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि उनके बेटे महेश को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।

बेसमेंट में पानी और मरम्मत के दौरान हादसे की जांच

पुलिस जांच में इमारत की संरचना और मरम्मत कार्य को भी जांच के दायरे में रखा गया है। पुलिस रिमांड के दौरान महेश ने जांच अधिकारी को बताया कि PG संचालित करने वाली कंपनी की शिकायत के बाद बेसमेंट में पानी भरने और सीलन की समस्या को दूर करने के लिए मरम्मत का काम कराया जा रहा था।

बताया गया कि बेसमेंट से पानी निकालने के बाद निर्माण कार्य के दौरान पावर ट्रोवेल मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच में यह आशंका भी सामने आई है कि मशीन से उत्पन्न कंपन और पहले से कमजोर संरचना के कारण इमारत पर अतिरिक्त असर पड़ा और वह भरभराकर गिर गई।

हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

गर्ल्स PG की दीवारों और छत में दिखी दरारें

हादसे से कुछ मिनट पहले पड़ोसी गर्ल्स PG में रहने वाली दो छात्राओं ने अपने कमरे की दीवारों और छत में आई दरारों का वीडियो बनाया था। यह वीडियो घटना के बाद सामने आया।

छात्राएं अर्निका और मानसी दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राएं बताई गई हैं। वीडियो में 20 वर्षीय अर्निका को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि इमारत गिरने वाली लग रही है।

इस घटनाक्रम ने आसपास की इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि इलाके की अन्य इमारतें रहने के लिहाज से सुरक्षित हैं या नहीं।

दिल्ली PG हादसा: चौथी गिरफ्तारी, खतरनाक बिल्डिंग गिराने का काम शुरू

FIR में पुरानी नींव और अतिरिक्त मंजिलों का जिक्र

साउथ कैंपस थाने में ASI प्रफुल टोप्पो की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। FIR के मुताबिक, इमारत की पुरानी नींव भार सहने की स्थिति में नहीं थी, इसके बावजूद उसमें अतिरिक्त मंजिलें बनाई गईं।

इसी पहलू को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण और भवन सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

1,120 PG के सर्वे में 52 खस्ताहाल मिले

हादसे के बाद MCD कमिश्नर संजीव खिरवार के निर्देश पर दिल्ली में PG और इमारतों का सर्वे शुरू किया गया है। सर्वे के पहले दिन 1,120 PG की जांच की गई, जिनमें 52 को खस्ताहाल पाया गया।

MCD ने सभी जोन के बिल्डिंग एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को अपने-अपने क्षेत्रों की इमारतों का निरीक्षण कर 10 सितंबर तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

इस सर्वे की जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में शामिल की जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होनी है।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

सत्य निकेतन PG हादसे का मामला मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने संकेत दिया कि अदालत इस मुद्दे को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखना चाहती।

अदालत देशभर में जर्जर और अवैध इमारतों की स्थिति की समीक्षा करने पर विचार कर रही है। अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरे सीनियर एडवोकेट अजीत सिन्हा द्वारा सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए हादसे का उल्लेख किए जाने के बाद सामने आया। सिन्हा अवैध और असुरक्षित इमारतों से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत की सहायता कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहले भी अवैध इमारतों को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। अब अदालत उनके पालन की स्थिति की समीक्षा कर सकती है।

हादसे के बाद MCD के पांच अधिकारी निलंबित

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार को सोमवार को निलंबित कर दिया। उनके साथ चार इंजीनियरिंग अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई पूरी होने तक निलंबन की कार्रवाई की गई है।

इसके बाद IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को MCD के साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। 2016 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी सौरभ फिलहाल साउथ वेस्ट जोन के डिप्टी कमिश्नर हैं।

सत्य निकेतन में करीब 300 मकान, 170 में PG

सत्य निकेतन का मौजूदा स्वरूप समय के साथ बदला है। यह क्षेत्र 1965 से 1970 के बीच झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए बसाया गया था। 1970 के दशक में दिल्ली यूनिवर्सिटी का साउथ कैंपस शुरू होने के बाद इलाके में कॉलेजों की संख्या बढ़ी और छात्रों के रहने के लिए PG का चलन बढ़ गया।

इलाके में करीब 300 मकान बताए जाते हैं, जिनमें लगभग 170 में PG संचालित होते हैं। कई मूल आवंटियों द्वारा अपने मकान बेच दिए जाने के बाद यहां आवासीय ढांचे और इस्तेमाल में भी बदलाव आया।

पुरानी इमारतों पर अतिरिक्त मंजिलों का दबाव

अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट जगदीश ममगैन के अनुसार, दिल्ली की कई पुरानी इमारतें अतिरिक्त मंजिलों का भार उठाने के हिसाब से तैयार नहीं की गई थीं। ऐसे में समय के साथ उनमें किए गए निर्माण बदलाव सुरक्षा के लिहाज से चुनौती पैदा कर सकते हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली के करीब 75 लाख घरों में से केवल 1.75 लाख इमारतों के पास स्वीकृत बिल्डिंग लेआउट प्लान हैं। ऐसे आंकड़े राजधानी में भवन सुरक्षा, निर्माण मानकों और पुराने आवासीय ढांचे की निगरानी को लेकर व्यापक सवाल खड़े करते हैं।

घायलों से मिलीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना में घायल लोगों से मुलाकात की और उनके लिए सहायता का ऐलान किया। प्रशासन की ओर से हादसे के बाद राहत, जांच और सुरक्षा से जुड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली के PG क्षेत्रों में भवन सुरक्षा की निगरानी को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। फिलहाल पुलिस की जांच, MCD का सर्वे और खतरनाक इमारतों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में इस मामले का दायरा दिल्ली से आगे बढ़कर देशभर की जर्जर और अवैध इमारतों तक जा सकता है।

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