विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 का आयोजन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए देवघर प्रशासन ने नए फुट ओवरब्रिज, अरघा, सीसीटीवी निगरानी, मिस्ट कूलिंग सिस्टम और बेहतर कतार व्यवस्था समेत कई विशेष इंतजाम किए हैं।
देवघर: विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम का श्रावणी मेला 2026 शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलने वाले इस महापर्व को लेकर जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। इस बार श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक दर्शन उपलब्ध कराने के लिए मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में कई नई व्यवस्थाएं की गई हैं।
30 जुलाई से शुरू होगा विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला
देवघर का विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन और बाबा मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा, सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। प्रशासन का दावा है कि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में अधिक व्यवस्थित और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान कम परेशानी का सामना करना पड़े।

मंदिर परिसर से लेकर पूरे मेला क्षेत्र तक साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, चिकित्सा और सुरक्षा के इंतजाम अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। अधिकारियों ने सभी व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा कर आवश्यक निर्देश भी जारी किए हैं।
नया फुट ओवरब्रिज और बेहतर कतार व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बाबा मंदिर परिसर में शीघ्र दर्शनम मार्ग और सामान्य कतार के लिए संस्कार भवन से महाकाल भैरव मंदिर तक नया फुट ओवरब्रिज तैयार कर लिया गया है। हालांकि इसका उद्घाटन पहले प्रस्तावित तिथि पर नहीं हो सका, लेकिन आवश्यक तकनीकी जांच पूरी होने के बाद इसे मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।
इस बार मंदिर में प्रवेश और निकास व्यवस्था को भी नए तरीके से व्यवस्थित किया गया है। श्रद्धालुओं को सिंह द्वार और वीआईपी गेट के पास से प्रवेश कराया जाएगा, जबकि निकास पूर्वी और पश्चिमी द्वार से होगा। पंडित शिवराम झा चौक से नेहरू पार्क क्यू कॉम्प्लेक्स होते हुए श्रद्धालु फुट ओवरब्रिज के माध्यम से मंदिर तक पहुंचेंगे। इससे भीड़ का दबाव कम होगा और दर्शन प्रक्रिया अधिक सुगम बनेगी।
अरघा, बाह्य अरघा और शीघ्र दर्शन की नई व्यवस्था
30 जुलाई से श्रद्धालु पहले की तरह अरघा के माध्यम से बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कर सकेंगे। मंदिर प्रशासन ने अरघा की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया है। वहीं जो श्रद्धालु लंबी कतार में नहीं लग सकते, उनके लिए बाह्य अरघा की सुविधा भी पहले की तरह उपलब्ध रहेगी।
शीघ्र दर्शनम मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नाथबाड़ी में होल्डिंग प्वाइंट और पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। यहां पेयजल, बिजली, स्वच्छता और अतिरिक्त सफाई कर्मियों की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 30 जुलाई से शीघ्र दर्शनम कूपन का शुल्क 300 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया जाएगा। साथ ही श्रावणी मेले के दौरान रविवार और सोमवार को शीघ्र दर्शनम की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी तथा पूरे मेले में वीआईपी दर्शन व्यवस्था भी बंद रहेगी।
आकर्षक विद्युत सज्जा और आधुनिक सुविधाएं
इस बार बाबा मंदिर और पूरे मेला क्षेत्र को विशेष विद्युत सज्जा से सजाया गया है। आकर्षक रोशनी की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल के चंदननगर के कलाकारों को दी गई है, जो हर वर्ष अपनी अनूठी लाइटिंग के लिए प्रसिद्ध हैं। प्रशासन का मानना है कि यह सजावट कांवरियों और श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगी।
श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत देने के लिए बाबा मंदिर के गर्भगृह में नौ टन क्षमता का अतिरिक्त एयर कंडीशनर लगाया गया है। वहीं संस्कार भवन में मिस्ट कूलिंग सिस्टम की व्यवस्था की गई है, ताकि लंबी कतार में खड़े श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत मिल सके।
सुरक्षा के लिए सीसीटीवी और मजबूत निगरानी व्यवस्था
श्रावणी मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। मंदिर परिसर और पूरे मेला क्षेत्र में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी नेहरू पार्क स्थित आधुनिक कंट्रोल रूम से की जाएगी। इसके अलावा पुलिस बल की तैनाती शुरू हो चुकी है और भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त जवानों की भी व्यवस्था की गई है।
नेहरू पार्क में दो बड़े डोम पंडाल बनाए गए हैं, जबकि उमा भवन, संस्कार भवन, सुविधा भवन, प्रशासनिक भवन, क्यू कॉम्प्लेक्स और मंदिर परिसर के 22 सहायक मंदिरों में रंग-रोगन और साफ-सफाई का कार्य पूरा कर लिया गया है। जिला प्रशासन का कहना है कि इस बार श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम दर्शन का अनुभव मिलेगा। उद्देश्य केवल भीड़ नियंत्रण नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराना है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद श्रद्धालु देवघर से सुखद और संतोषजनक अनुभव लेकर लौटें।










