ईरान में सत्ता के भीतर बढ़ा टकराव, राष्ट्रपति और सैन्य नेतृत्व आमने-सामने, हालात हुए गंभीर

ईरान में युद्ध के बीच राष्ट्रपति और सैन्य नेतृत्व के बीच टकराव बढ़ता दिख रहा है। मतभेद से राजनीतिक संकट और आर्थिक हालात और बिगड़ने की आशंका।

ईरान में युद्ध के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और सैन्य नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ते दिख रहे हैं। हालात को लेकर अलग रणनीतियों ने राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है, जिससे देश में आर्थिक और प्रशासनिक संकट गहराने की आशंका है।

US Iran War: Iran में जारी युद्ध के बीच अब सत्ता के भीतर टकराव की खबरें सामने आ रही हैं। Masoud Pezeshkian और Ahmad Vahidi के बीच बढ़ते मतभेद ने हालात को और जटिल बना दिया है। एक तरफ जहां राष्ट्रपति नरम रुख अपनाकर हालात को शांत करना चाहते हैं, वहीं सैन्य नेतृत्व सख्त रणनीति पर कायम है।

युद्ध को लेकर अलग-अलग सोच

ईरान के भीतर यह टकराव मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि मौजूदा युद्ध की स्थिति को कैसे संभाला जाए। राष्ट्रपति पेजेश्कियान का मानना है कि लगातार तनाव बढ़ाने और पड़ोसी देशों पर हमले करने से देश की स्थिति और खराब हो रही है।

दूसरी ओर, IRGC नेतृत्व का रुख सख्त है और वह अमेरिका व इजरायल को मुख्य दुश्मन मानते हुए आक्रामक नीति पर कायम रहना चाहता है। यही वैचारिक अंतर अब खुले मतभेद में बदलता नजर आ रहा है।

राष्ट्रपति की चेतावनी

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही युद्ध को नहीं रोका गया, तो आने वाले तीन से चार हफ्तों में देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ढह सकती है।

उन्होंने एक वीडियो संदेश के जरिए पड़ोसी देशों पर हो रहे हमलों को लेकर खेद भी जताया और सेना को ऐसे कदम रोकने के निर्देश दिए। हालांकि, उनके इस बयान के बाद भी हमलों का सिलसिला जारी रहा, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच तालमेल कमजोर हो गया है।

फैसलों की ताकत को लेकर विवाद

ईरान में सत्ता के भीतर बढ़ा टकराव, राष्ट्रपति और सैन्य नेतृत्व आमने-सामने, हालात हुए गंभीर

राष्ट्रपति ने यह भी मांग की है कि प्रशासनिक और रणनीतिक फैसलों की पूरी ताकत फिर से सरकार को दी जाए, ताकि हालात को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके।

लेकिन इस मांग को IRGC प्रमुख अहमद वाहिदी ने साफ तौर पर ठुकरा दिया। उनका कहना है कि मौजूदा संकट के लिए सरकार भी उतनी ही जिम्मेदार है, क्योंकि युद्ध शुरू होने से पहले जरूरी सुधार नहीं किए गए थे।

सत्ता में दरार के संकेत

इजरायली मीडिया सहित कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि ईरान की सत्ता के भीतर दरारें गहराने लगी हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो भविष्य में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। तख्तापलट जैसे कयास भी लगाए जा रहे हैं, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। फिर भी मौजूदा हालात ने इन आशंकाओं को हवा जरूर दी है।

आम लोगों पर बढ़ता असर

युद्ध और अंदरूनी टकराव का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। देश के कई शहरों में एटीएम खाली हो गए हैं या काम नहीं कर रहे हैं, जिससे लोगों को पैसे निकालने में परेशानी हो रही है।

ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं भी बार-बार बाधित हो रही हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों ने शिकायत की है कि पिछले तीन महीनों से उन्हें समय पर वेतन और भत्ते नहीं मिल रहे हैं।

महंगाई ने बढ़ाई मुश्किलें

युद्ध से पहले ही ईरान में महंगाई दर काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी थी। फरवरी में जरूरी सामानों की कीमतों में 105 प्रतिशत से 115 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

अब युद्ध के चलते हालात और खराब हो गए हैं। रोजमर्रा की चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम जनता की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। महंगाई और बेरोजगारी का दबाव मिलकर आर्थिक संकट को और गहरा बना रहा है।

बाहरी युद्ध के साथ अंदरूनी संघर्ष

ईरान इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ बाहरी मोर्चे पर युद्ध जारी है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता के भीतर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। यह स्थिति किसी भी देश के लिए बेहद संवेदनशील होती है, क्योंकि अंदरूनी अस्थिरता बाहरी दबाव को और बढ़ा देती है।

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