सूत्रों के मुताबिक EOU की अलग-अलग टीमों ने बुधवार सुबह तड़के एक साथ कई स्थानों पर दबिश दी। छापेमारी अभियंता के पटना स्थित आवास, पैतृक घर, रिश्तेदारों से जुड़े परिसरों और दिल्ली में कथित संपत्तियों तक फैली हुई है। कार्रवाई के दौरान बैंक खातों, निवेश संबंधी दस्तावेजों, जमीन-जायदाद के कागजात, लॉकर और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में अभियंता की वैध आय और अर्जित संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर सामने आया था। इसी आधार पर विस्तृत जांच शुरू की गई। आरोप है कि सरकारी सेवा के दौरान अर्जित आय की तुलना में कहीं अधिक मूल्य की चल और अचल संपत्तियां बनाई गईं। इन संपत्तियों के स्रोतों की भी जांच की जा रही है।
EOU की टीम छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंकिंग रिकॉर्ड को खंगाल रही है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित अतिरिक्त संपत्ति किन स्रोतों से अर्जित की गई और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भी भूमिका रही है। जांच के दायरे में निवेश, भूमि खरीद, मकान निर्माण और अन्य वित्तीय लेन-देन शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं। हालांकि EOU की ओर से आधिकारिक तौर पर जब्ती की पूरी जानकारी अभी साझा नहीं की गई है। कार्रवाई पूरी होने के बाद बरामद दस्तावेजों और संपत्तियों का मूल्यांकन किया जाएगा।
बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आय से अधिक संपत्ति के मामलों में EOU और निगरानी एजेंसियों ने कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। ऐसे मामलों में पहले वित्तीय जांच की जाती है, फिर साक्ष्य मिलने पर प्राथमिकी दर्ज कर विशेष अदालत से सर्च वारंट प्राप्त किया जाता है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति के ठिकानों पर छापेमारी की जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी एजेंसियों की सख्ती को दर्शाती है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
फिलहाल पटना, दिल्ली और अन्य स्थानों पर EOU की कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसियां छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और संपत्तियों का आकलन कर रही हैं। माना जा रहा है कि कार्रवाई पूरी होने के बाद इस मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।