एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायु सेना का नया और 51वां उप प्रमुख नियुक्त किया गया है। उन्होंने इस पद पर एयर मार्शल नागेश कपूर का स्थान लिया है। इससे पहले आशुतोष दीक्षित एकीकृत रक्षा स्टाफ (Integrated Defence Staff) के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
IAF Vice Chief: भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) में शीर्ष स्तर पर बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को देश का नया उप वायुसेना प्रमुख (Vice Chief of the Air Staff) नियुक्त किया गया है। वे भारतीय वायुसेना के 51वें उप प्रमुख बने हैं। उन्होंने यह जिम्मेदारी एयर मार्शल नागेश कपूर से संभाली है।
इस नई नियुक्ति के साथ वायुसेना के वरिष्ठ नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किया गया है, जो भारत की रक्षा रणनीति और आधुनिकीकरण की दिशा में अहम माना जा रहा है।
लंबा और प्रतिष्ठित सैन्य करियर
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना में तीन दशकों से अधिक के अनुभव के साथ एक अनुभवी फाइटर पायलट रहे हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ पदों पर कार्य किया है। उनके पास 3300 घंटे से अधिक उड़ान अनुभव है और उन्होंने कई प्रकार के लड़ाकू एवं परिवहन विमानों का संचालन किया है।
इनमें एचपीटी-32, एएन-32, एवीआरओ, किरण, जगुआर, आईएल-78 और हॉक जैसे विमान शामिल हैं। उनका परिचालन अनुभव और तकनीकी समझ उन्हें भारतीय वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करता है।
कारगिल युद्ध और महत्वपूर्ण ऑपरेशनों में भूमिका
एयर मार्शल दीक्षित के करियर में सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक कारगिल युद्ध (1999) के दौरान उनकी भूमिका रही है। इस दौरान उन्होंने वायुसेना के महत्वपूर्ण अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सफेद सागर में भी हिस्सा लिया, जो उस समय भारत की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा थे।
इन अभियानों में वायुसेना की निर्णायक भूमिका ने युद्ध के दौरान भारत की स्थिति को मजबूत किया था। उनका परिचालन अनुभव इन्हीं अभियानों से और अधिक समृद्ध हुआ, जिसने उन्हें रणनीतिक और नेतृत्व क्षमता के स्तर पर मजबूत बनाया।

वरिष्ठ नेतृत्व में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने इससे पहले इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) के प्रमुख के रूप में भी कार्य किया है। इसके अलावा वे सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) रह चुके हैं। उन्होंने साउथ वेस्टर्न एयर कमांड में भी वरिष्ठ वायुसेना अधिकारी के रूप में जिम्मेदारियां निभाई हैं, जहां उन्होंने परिचालन तैयारियों और रणनीतिक योजना में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अपने कार्यकाल के दौरान एयर मार्शल दीक्षित ने भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने कई भविष्य की रक्षा तकनीकों से जुड़े प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया है। उनकी भूमिका विशेष रूप से स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आधुनिक युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण रही है।
स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाओं में योगदान
वायुसेना के उप प्रमुख के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान कई प्रमुख स्वदेशी विमान परियोजनाओं में प्रगति दर्ज की गई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस Mk-1A
- LCA Mk-2
- एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA)
इन परियोजनाओं को भारतीय वायुसेना की भविष्य की ताकत के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।











