दिल्ली एम्स में अब फेस ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हो गई है, जो एसिड अटैक, आग या गंभीर दुर्घटना से प्रभावित मरीजों के लिए वरदान साबित होगी। इस प्रक्रिया में चेहरे की त्वचा, मांसपेशियां, नसें और कभी-कभी हड्डियां भी बदल दी जाती हैं। यह सर्जरी प्लास्टिक सर्जरी से अलग, जटिल और विशेषज्ञ टीम द्वारा अंजाम दी जाती है।
Face Transplant India: दिल्ली एम्स ने नई चिकित्सा सुविधा शुरू की है, जिसमें मरीजों का चेहरा आंशिक या पूरी तरह डोनर के टिश्यू और नसों के जरिए बदला जाता है। यह सर्जरी 10 से 30 घंटे तक चल सकती है और विशेष रूप से एसिड अटैक, आग या सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के लिए मददगार है। मरीजों को रजिस्ट्रेशन और कई विभागों की टीम द्वारा टेस्ट और जांच के बाद सर्जरी का समय तय किया जाता है, जिससे चेहरे के भाव और ब्लड फ्लो को बहाल किया जा सके।
फेस ट्रांसप्लांट
दिल्ली एम्स में अब फेस ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हो रही है। यह सर्जरी केवल त्वचा बदलने तक सीमित नहीं है बल्कि मांसपेशियों, नसों, खून की नलिकाओं और कभी-कभी जबड़े तक को शामिल करती है। यह प्रक्रिया विशेष रूप से एसिड अटैक, आग या सड़क दुर्घटना से प्रभावित मरीजों के लिए वरदान साबित होती है। सर्जरी में 10 से 30 घंटे तक का समय लग सकता है और इसे कई विशेषज्ञों की टीम मिलकर अंजाम देती है।
फेस ट्रांसप्लांट पूरी तरह डोनर (ब्रेन डेड व्यक्ति) के चेहरे से होता है। मरीज के खराब हिस्सों को हटाकर डोनर के टिश्यू, मांसपेशियों और नसों को जोड़ दिया जाता है। इसका उद्देश्य चेहरे के भाव, मुस्कान और ब्लड फ्लो को बहाल करना है। हालांकि, सर्जरी के बाद एंटी रिजेक्शन दवाएं दी जाती हैं ताकि शरीर नया टिश्यू स्वीकार करे।

प्लास्टिक सर्जरी और फेस ट्रांसप्लांट में अंतर
फेस ट्रांसप्लांट प्लास्टिक सर्जरी से अलग है। प्लास्टिक सर्जरी में सिंथेटिक मैटेरियल या हल्के सुधार से चेहरे की बनावट सुधारी जाती है, जबकि फेस ट्रांसप्लांट में चेहरा मूल रूप से बदलता है और नसें, मांसपेशियां भी जुड़ती हैं। यही कारण है कि यह प्रक्रिया अधिक जटिल और जोखिम भरी होती है।
दुनियाभर में अब तक केवल 50 से अधिक ट्रांसप्लांट ही सफलतापूर्वक हुए हैं। भारत में पहला पूर्ण फेस ट्रांसप्लांट 2017 में कोच्चि के एमृता इंस्टीट्यूट में हुआ था। दिल्ली एम्स अब इस सुविधा को उपलब्ध कराकर मरीजों को नई उम्मीद दे रहा है।
कैसे मिलेगा इलाज
एम्स में फेस ट्रांसप्लांट के लिए मरीज को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद टेस्ट और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सर्जरी के लिए डेट तय की जाएगी। सर्जरी में कई विभागों जैसे प्लास्टिक, बर्न, ऑटोरिनोलैरिंगोलॉजी, ट्रांसप्लांट इम्यूनोलॉजी और क्रिटिकल केयर टीमों का सहयोग होता है।













