मेरठ से बदायूं तक गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल लागू होने के बाद दैनिक वाहन संख्या घटकर करीब 12 हजार रह गई। हालांकि वीकेंड पर ट्रैफिक में 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज हो रही है, जिसे संचालन एजेंसी सकारात्मक संकेत मान रही है।
मेरठ: गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली शुरू होने के बाद भले ही रोजाना गुजरने वाले वाहनों की संख्या कम हुई हो, लेकिन वीकेंड पर ट्रैफिक में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। संचालन एजेंसी का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे पर बढ़ते भरोसे का संकेत है और वर्ष के अंत तक यातायात में और तेजी आने की उम्मीद है।
टोल लागू होने के बाद कम हुआ दैनिक ट्रैफिक
मेरठ से प्रयागराज तक विकसित गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। उद्घाटन के बाद शुरुआती 15 दिनों तक इस मार्ग पर वाहनों से कोई टोल शुल्क नहीं लिया गया। इस अवधि में मेरठ से बदायूं तक के पहले पैकेज पर प्रतिदिन 18 हजार से अधिक वाहन गुजर रहे थे।
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हालांकि 16 मई की रात से टोल वसूली शुरू होने के बाद यातायात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। संचालन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, दैनिक वाहन संख्या घटकर औसतन 12 हजार के आसपास पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि टोल लागू होने के बाद कई वाहन चालकों ने वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना शुरू कर दिया, जिससे ट्रैफिक पर असर पड़ा।
वीकेंड पर बढ़ रहा एक्सप्रेसवे का उपयोग
हाल के आंकड़े बताते हैं कि सप्ताहांत पर गंगा एक्सप्रेसवे का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। शनिवार और रविवार को मेरठ से बदायूं के बीच गुजरने वाले वाहनों की संख्या 13 से 14 हजार तक पहुंच रही है, जो सामान्य दिनों की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्शाती है।
संचालनकर्ता एजेंसी का कहना है कि छुट्टी के दिनों में लंबी दूरी की यात्रा, पारिवारिक कार्यक्रम और पर्यटन के कारण लोग एक्सप्रेसवे को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि धीरे-धीरे इस मार्ग की उपयोगिता लोगों के बीच बढ़ रही है।
दिसंबर के बाद और बढ़ने की उम्मीद
गंगा एक्सप्रेसवे के पहले पैकेज का संचालन कर रही एजेंसी का मानना है कि फिलहाल ट्रैफिक स्थिर होने की प्रक्रिया में है। अधिकारियों के अनुसार, जैसे-जैसे लोग इस मार्ग की सुविधाओं और समय की बचत को समझेंगे, दैनिक यातायात में भी वृद्धि होगी।
एजेंसी का अनुमान है कि दिसंबर के बाद एक्सप्रेसवे पर वाहन संख्या वास्तविक क्षमता के करीब पहुंच सकती है। इसके पीछे औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ोतरी, लंबी दूरी की आवाजाही और एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाले नए संपर्क मार्गों का भी योगदान रहने की संभावना है। फिलहाल वीकेंड पर दर्ज हो रही बढ़ोतरी को भविष्य में बेहतर ट्रैफिक का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।









