शांति समझौते के एक दिन बाद इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हवाई हमला किया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई। हिजबुल्लाह ने अमेरिका की मध्यस्थता वाले नए समझौते को खारिज करते हुए इसे लेबनान की संप्रभुता के खिलाफ बताया।
इजराइल/हिज्बुल्लाह वॉर: मध्य पूर्व में स्थायी शांति की उम्मीदों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब अमेरिका की मध्यस्थता में हुए नए इजरायल-लेबनान समझौते के महज एक दिन बाद दक्षिणी लेबनान में इजरायल ने हवाई हमले किए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं।
दूसरी ओर, इजरायल का कहना है कि उसका निशाना एक ऐसा व्यक्ति था, जो उसकी सेना के लिए खतरा बन रहा था। हालांकि, इजरायली सेना ने उस व्यक्ति की पहचान या उसके कथित खतरे से जुड़ी कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के बीच हुए राजनीतिक समझौते के बावजूद जमीनी स्तर पर तनाव अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
दक्षिणी लेबनान के नबातियेह क्षेत्र में ड्रोन हमले, स्थानीय प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, पहला हमला दक्षिणी शहर नबातियेह अल-फौका में एक इजरायली ड्रोन द्वारा किया गया। इसके कुछ समय बाद उसी क्षेत्र में अतिरिक्त हवाई हमले भी हुए, जिनमें कई स्थानों को निशाना बनाया गया। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है और राहत एजेंसियों को तत्काल सक्रिय किया गया।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की कि घायल लोगों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में जारी है। घटनास्थल के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी नई स्थिति से निपटा जा सके। लगातार हो रहे सैन्य अभियानों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की चिंता और बढ़ा दी है।
अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ था चार सूत्रीय समझौता, स्थायी शांति की थी उम्मीद
वॉशिंगटन में अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान के बीच एक चार सूत्रीय समझौते पर सहमति बनी थी, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को कम करना और स्थायी शांति की दिशा में कदम बढ़ाना था। इस समझौते के तहत इजरायल दक्षिणी लितानी क्षेत्र से अपनी सेना हटाने पर सहमत हुआ, जबकि उस क्षेत्र का नियंत्रण पूरी तरह लेबनानी सेना को सौंपा जाना प्रस्तावित किया गया।
हालांकि, समझौते में यह भी प्रावधान रखा गया कि इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के विस्तारित सुरक्षा क्षेत्र में अपनी सीमित सैन्य उपस्थिति बनाए रख सकेगी। यही प्रावधान अब विवाद का मुख्य कारण बन गया है, क्योंकि हिजबुल्लाह और उसके समर्थक इसे लेबनान की संप्रभुता के खिलाफ मान रहे हैं।
हिजबुल्लाह ने समझौते को किया खारिज, नेतृत्व ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने इस समझौते को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए इसे लेबनान के लिए अपमानजनक और राष्ट्रीय संप्रभुता के साथ समझौता बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि लेबनानी सरकार ने ऐसे प्रावधान स्वीकार किए हैं जो देश के हितों के खिलाफ हैं। उनके अनुसार, इजरायल की सेना की वापसी को हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण से जोड़ना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
कासिम ने कहा कि यह समझौता ‘सभी लाल रेखाओं’ को पार करता है और इससे भविष्य में दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों पर स्थायी नियंत्रण का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिजबुल्लाह अपनी सशस्त्र प्रतिरोध नीति जारी रखेगा और किसी भी बाहरी दबाव के सामने झुकेगा नहीं।
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इजरायल ने सुरक्षा क्षेत्र में लंबी सैन्य मौजूदगी के दिए संकेत
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने भी समझौते के बाद स्पष्ट संकेत दिए कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में लंबे समय तक तैनात रह सकती है। उन्होंने सेना को निर्देश दिया कि वह विस्तारित सुरक्षा क्षेत्र में लंबे समय तक संचालन की तैयारी रखे।
यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें चल रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल अपनी उत्तरी सीमा की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और इसी कारण वह सुरक्षा क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बनाए रखने पर जोर दे रहा है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि: कैसे बढ़ा इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच टकराव
वर्तमान संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने इजरायल पर मिसाइल हमले किए। यह कार्रवाई उस इजरायली सैन्य अभियान के जवाब में बताई गई जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हुई थी। इसके बाद इजरायल ने लेबनान के विभिन्न हिस्सों में व्यापक हवाई अभियान शुरू किया और दक्षिणी लेबनान में जमीनी सैन्य कार्रवाई भी की।
तब से दोनों पक्षों के बीच लगातार सैन्य टकराव जारी है, जिसने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लाखों नागरिक लगातार असुरक्षा और विस्थापन का सामना कर रहे हैं।
भारी मानवीय नुकसान और बड़े पैमाने पर विस्थापन
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद से इजरायली सैन्य अभियानों में चार हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों अन्य घायल हुए हैं। इसके अलावा लगभग बारह लाख लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं, जिससे देश में मानवीय संकट और गहरा गया है।
दूसरी ओर, इजरायल का कहना है कि सीमा पर जारी संघर्ष में उसके कई सैनिक और नागरिक भी मारे गए हैं। दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ती हिंसा ने पूरे क्षेत्र में राहत और पुनर्वास की चुनौती को और गंभीर बना दिया है।
पहले भी विफल हो चुके हैं युद्धविराम के प्रयास
यह पहला अवसर नहीं है जब इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए गए हों। इससे पहले अप्रैल 2026 में अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम लागू किया गया था, लेकिन वह ज्यादा समय तक प्रभावी नहीं रह सका और दोनों पक्षों के बीच फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू हो गई। जून में दोनों देशों ने एक बार फिर संघर्ष विराम को पुनर्जीवित करने पर सहमति जताई थी।
अमेरिका ने यह भी घोषणा की थी कि वह ऐसे पायलट क्षेत्रों के निर्माण में सहयोग करेगा, जहां केवल लेबनानी सेना की मौजूदगी होगी और किसी गैर-राज्य सशस्त्र संगठन को वहां गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम से स्पष्ट है कि इन प्रयासों के बावजूद जमीनी स्तर पर विश्वास बहाली अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
क्या मध्य पूर्व में स्थायी शांति अभी भी दूर है?
नए समझौते के तुरंत बाद हुए हवाई हमलों और हिजबुल्लाह की तीखी प्रतिक्रिया ने यह संकेत दिया है कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति की राह अभी आसान नहीं है। जहां एक ओर अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय शक्तियां कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय सुरक्षा, सैन्य उपस्थिति और गैर-राज्य सशस्त्र संगठनों की भूमिका जैसे मुद्दे अब भी विवाद का केंद्र बने हुए हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश समझौते को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं या फिर सीमा पर बढ़ता तनाव एक बार फिर व्यापक संघर्ष का रूप लेता है। फिलहाल दक्षिणी लेबनान की ताजा घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक समझौतों के बावजूद क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।









