हिमाचल के स्कूल से नेपाल के सेना प्रमुख तक, अब ब्रिटेन में राजदूत बनने की तैयारी में जनरल गौरव राणा

हिमाचल के सनावर स्कूल से पढ़े जनरल गौरव शमशेर राणा ब्रिटेन में नेपाल के राजदूत के लिए प्रस्तावित हैं। जानिए सेना प्रमुख से कूटनीति तक उनका पूरा सफर।
हिमाचल के स्कूल से नेपाल के सेना प्रमुख तक, अब ब्रिटेन में राजदूत बनने की तैयारी में जनरल गौरव राणा
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नेपाल के पूर्व सेना प्रमुख जनरल गौरव शमशेर जंग बहादुर राणा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। नेपाल सरकार ने उन्हें ब्रिटेन में अपना अगला राजदूत बनाने के लिए नामित किया है। 18 सितंबर 2026 को नेपाल सरकार ने ब्रिटेन समेत 13 देशों के लिए राजदूतों के नामों की सिफारिश की। गौरव शमशेर राणा का नाम यूनाइटेड किंगडम के लिए प्रस्तावित किया गया है। हालांकि अभी उनकी नियुक्ति पूरी तरह औपचारिक नहीं हुई है। संसदीय सुनवाई समिति की मंजूरी और संबंधित देश की सहमति यानी एग्रेमा मिलने के बाद ही वह आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन में नेपाल के राजदूत का पद संभाल सकेंगे।

गौरव शमशेर जंग बहादुर राणा का नाम नेपाल की सेना और कूटनीति, दोनों क्षेत्रों में जाना-पहचाना है। वह 2012 से 2015 तक नेपाल सेना के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ यानी सेना प्रमुख रहे। इससे पहले उन्होंने नेपाली सेना में चार दशक से ज्यादा समय तक सेवा की। सेना में उनका सफर 1974 में शुरू हुआ था और 2015 में सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए। उनके लंबे सैन्य करियर में नेपाल के राजनीतिक और सुरक्षा परिवर्तनों के कई महत्वपूर्ण दौर शामिल रहे।

गौरव राणा की कहानी हिमाचल प्रदेश से भी जुड़ी है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के कसौली के पास स्थित प्रतिष्ठित द लॉरेंस स्कूल, सनावर में पढ़ाई की। उपलब्ध जीवनी संबंधी जानकारी के अनुसार उनकी मां ने उन्हें ऐसे स्कूल में भेजने का फैसला किया था जहां वह अपने रिश्तेदारों के साथ रहकर पढ़ाई कर सकें। इस तरह नेपाल से निकलकर हिमाचल की पहाड़ियों में शिक्षा हासिल करने वाला यह विद्यार्थी आगे चलकर नेपाल की सेना के सर्वोच्च पद तक पहुंचा।

सनावर स्थित लॉरेंस स्कूल भारत के पुराने आवासीय स्कूलों में गिना जाता है और यहां से शिक्षा हासिल करने के बाद गौरव राणा ने सैन्य क्षेत्र में अपना करियर आगे बढ़ाया। उनकी शिक्षा केवल स्कूली स्तर तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ब्रिटेन की रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट, अमेरिका के यूएस आर्मी कमांड एंड जनरल स्टाफ कॉलेज और पाकिस्तान की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से भी प्रशिक्षण और उच्च सैन्य शिक्षा हासिल की। इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान की कायदे-ए-आजम यूनिवर्सिटी से डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज में मास्टर डिग्री और त्रिभुवन विश्वविद्यालय से इतिहास एवं राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की।

गौरव राणा का सैन्य करियर ऐसे समय में आगे बढ़ा जब नेपाल राजनीतिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा था। नेपाल में माओवादी विद्रोह के बाद पूर्व माओवादी लड़ाकों के नेपाली सेना में एकीकरण की प्रक्रिया हुई। सेना प्रमुख के तौर पर राणा ने इस प्रक्रिया की निगरानी की। उनके कार्यकाल में सेना के संगठनात्मक और रणनीतिक स्तर पर भी कई बदलाव हुए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने सेना की दीर्घकालिक रणनीतिक योजना पर भी काम किया।

2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भी गौरव राणा की भूमिका चर्चा में रही। सेना प्रमुख के रूप में उन्होंने राहत और बचाव अभियान का नेतृत्व किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भूकंप के बाद नेपाली सेना की राहत गतिविधियों को उन्होंने 'ऑपरेशन संकटमोचन' के तहत आगे बढ़ाया। यह दौर उनके सैन्य जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अभियानों में शामिल रहा।

गौरव राणा का अंतरराष्ट्रीय सैन्य अनुभव भी काफी व्यापक रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में लेबनान में नेपाली बटालियन की कमान संभाली। इस अनुभव ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, शांति अभियानों और विभिन्न देशों की सैन्य संस्थाओं के साथ काम करने का अवसर दिया। यही वजह है कि उनका अनुभव केवल नेपाल की सैन्य व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों तक फैला रहा।

गौरव शमशेर राणा का संबंध नेपाल के प्रभावशाली राणा परिवार से भी है। उनका जन्म 12 दिसंबर 1955 को काठमांडू में हुआ था। वह पूर्व मेजर जनरल आदित्य शमशेर जंग बहादुर राणा के बेटे हैं। उनका परिवार नेपाल के राणा शासक परिवार से जुड़ा रहा है। इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने सैन्य क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई और चार दशक से ज्यादा की सेवा के बाद नेपाल सेना के प्रमुख बने।

अब जब नेपाल सरकार ने उन्हें ब्रिटेन के लिए राजदूत बनाने की सिफारिश की है तो उनके सैन्य अनुभव के साथ-साथ ब्रिटेन से उनके पुराने संस्थागत संबंध भी चर्चा में हैं। उन्होंने ब्रिटेन की रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट से प्रशिक्षण लिया है। नेपाल और ब्रिटेन के संबंधों में नेपाली गोरखा सैनिकों का मुद्दा भी लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। इसलिए ब्रिटेन में संभावित राजदूत के रूप में उनका सैन्य और रणनीतिक अनुभव दोनों महत्वपूर्ण संदर्भ बनते हैं।

नेपाल और ब्रिटेन के बीच राजनयिक संबंधों का इतिहास भी काफी पुराना है। नेपाल ने 1934 में लंदन में अपना पहला विदेश स्थित राजनयिक मिशन स्थापित किया था। 1947 में इस मिशन को दूतावास के स्तर पर अपग्रेड किया गया। नेपाल के लंदन स्थित दूतावास के रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 23 राजदूत वहां सेवा दे चुके हैं। यदि नियुक्ति की पूरी संवैधानिक और राजनयिक प्रक्रिया पूरी होती है तो गौरव शमशेर राणा ब्रिटेन में नेपाल के 24वें राजदूत होंगे।

ब्रिटेन के लिए उनका नाम ऐसे समय में सामने आया है जब नेपाल-ब्रिटेन संबंधों में व्यापार, निवेश, विकास सहयोग और आर्थिक कूटनीति जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा नेपाल के पूर्व गोरखा सैनिकों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे भी दोनों देशों के संबंधों का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में एक पूर्व सेना प्रमुख का राजदूत पद के लिए प्रस्तावित होना इन विषयों के संदर्भ में भी खास महत्व रखता है।

लंदन में नेपाल के राजदूत के रूप में गौरव राणा की संभावित नियुक्ति का एक खास पहलू यह भी है कि नेपाल के राजनयिक इतिहास में राणा परिवार का पुराना संबंध रहा है। नेपाल के लंदन मिशन के शुरुआती वर्षों में भी राणा परिवार से जुड़े सैन्य अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। दूतावास के रिकॉर्ड में 1934 से 1936 तक जनरल बहादुर शमशेर जंग बहादुर राणा, 1936 से 1939 तक जनरल कृष्ण शमशेर जंग बहादुर राणा और 1939 से 1947 तक जनरल सिंह शमशेर जंग बहादुर राणा के नाम दर्ज हैं।

गौरव राणा का संभावित राजदूत पद इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि वह पहले सैन्य क्षेत्र में नेपाल का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और अब कूटनीतिक भूमिका में आने की तैयारी में हैं। सेना प्रमुख के तौर पर उनके कार्यकाल में सुरक्षा, सैन्य सुधार, आपदा राहत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े अनुभव रहे। अब अगर संसदीय सुनवाई और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तो यही अनुभव ब्रिटेन में नेपाल की राजनयिक जिम्मेदारियों में काम आ सकता है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेपाल सरकार ने गौरव शमशेर राणा के नाम की सिफारिश की है, अंतिम नियुक्ति नहीं। नेपाल की प्रक्रिया के तहत संसदीय सुनवाई समिति से मंजूरी और ब्रिटेन की ओर से एग्रेमा मिलने के बाद ही राष्ट्रपति औपचारिक नियुक्ति कर सकेंगे। इसलिए अभी उन्हें ब्रिटेन के नामित या प्रस्तावित राजदूत के तौर पर देखना सही होगा।

हिमाचल प्रदेश के सनावर स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाले गौरव शमशेर राणा का सफर नेपाली सेना के शीर्ष पद तक पहुंचा और अब वह नेपाल की कूटनीतिक सेवा में एक नई भूमिका की ओर बढ़ रहे हैं। अगर नियुक्ति की सभी प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं, तो वह लंदन में नेपाल के 24वें राजदूत के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके सामने नेपाल-ब्रिटेन के पुराने संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ व्यापार, निवेश, विकास सहयोग और गोरखा सैनिकों से जुड़े मुद्दों जैसे कई विषय होंगे।

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