अफ्रीका के घाना में झुंझुनूं के कारोबारी देवेन्द्र सैन की उनके ही कर्मचारियों ने पैसे और लालच में हत्या कर दी। 17 दिन बाद शव भारत लाया गया और अलसीसर में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
झुंझुनू: पश्चिम अफ्रीकी देश घाना में राजस्थान के झुंझुनूं जिले के युवा कारोबारी देवेन्द्र सैन की हत्या का मामला सामने आया है, जिसने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। 35 वर्षीय देवेन्द्र की हत्या उनके ही कर्मचारियों द्वारा रची गई साजिश में की गई थी। घटना के 17 दिन बाद उनका पार्थिव शरीर भारत लाया गया और शनिवार को उनके पैतृक गांव अलसीसर में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। गांव में हर आंख नम थी और अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचे।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
देवेन्द्र सैन अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। उनके पीछे वृद्ध पिता, माता, पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। बेटे की मौत की खबर और फिर 17 दिन बाद शव घर पहुंचने से परिवार पूरी तरह टूट गया।
पिता शंभू दयाल सैन और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे गांव ने परिवार को सांत्वना देने की कोशिश की, लेकिन माहौल बेहद गमगीन रहा।
छुट्टियों के बाद घाना लौटते ही रची गई साजिश
जानकारी के अनुसार, देवेन्द्र पिछले कुछ समय से भारत में अपने परिवार के साथ थे और 20 अप्रैल को घाना के कुमासी शहर लौटे थे। वे अपने व्यापार से जुड़े हिसाब-किताब की जांच करना चाहते थे।
वापस पहुंचते ही उन्होंने अपने कर्मचारियों से दो महीनों के व्यापार का हिसाब मांगा, जिसमें कथित तौर पर बड़ी वित्तीय गड़बड़ी सामने आई। इसी डर और लालच में कर्मचारियों ने उनके खिलाफ हत्या की साजिश रच डाली।
हत्या की पूरी वारदात कैसे हुई
घाना पुलिस की जांच के अनुसार, 23 अप्रैल को जब देवेन्द्र नकदी लेकर जा रहे थे, तभी उनके घरेलू नौकर जॉन अडोकपो उर्फ पीटर ने उनकी गतिविधियों की जानकारी अपराधियों को दी।
इसके बाद रास्ते में उन पर चाकुओं से हमला किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। हत्या के बाद शव को उनकी ही कार की डिग्गी में डालकर एक सुनसान इलाके में फेंक दिया गया।
यह पूरी वारदात सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी, ताकि इसे लूटपाट का मामला दिखाया जा सके।
पुलिस जांच में बड़ा खुलासा, कई आरोपी गिरफ्तार
घाना पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि यह हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक संगठित साजिश थी।

गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
- जॉन अडोकपो उर्फ पीटर (मुख्य मुखबिर और घरेलू नौकर)
- हाकिम कुदजो जूनियर (साजिश का मास्टरमाइंड और सीसीटीवी तकनीशियन)
- उस्मान मोरो
- मोरो सुले
पुलिस ने आरोपियों के पास से लूटा गया आईफोन, नकदी और ऑफिस का सर्वर भी बरामद किया है, जिसे सबूत मिटाने के लिए बदला गया था।
सबूत मिटाने की कोशिश भी नाकाम
जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी हाकिम कुदजो जूनियर ने घटना के बाद सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को हटाने और सबूत नष्ट करने के लिए सर्वर को ही बदल दिया था।
हालांकि, तकनीकी जांच और पुलिस की तत्परता के चलते पूरा नेटवर्क उजागर हो गया और सभी आरोपी पकड़ लिए गए।
17 दिन बाद भारत लौटा शव, गांव में मातम
कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के बाद 17 दिनों की लंबी प्रक्रिया पूरी कर शव को भारत लाया गया। जब पार्थिव शरीर अलसीसर गांव पहुंचा तो पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया।
अंतिम संस्कार में भारी भीड़ उमड़ी और हर किसी ने नम आंखों से देवेन्द्र को अंतिम विदाई दी।
विदेश में भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय व्यापारियों और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय समुदाय और परिवार ने केंद्र सरकार से विदेशों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
देवेन्द्र सैन की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि विश्वासघात और लालच की दर्दनाक कहानी बनकर सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।











