वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेतों के बीच सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी समझौते की खबरों के बाद निवेशकों की सुरक्षित निवेश (safe-haven) मांग कमजोर हुई, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा।
बिजनेस न्यूज़: United States और Iran के बीच तीन महीने से अधिक समय तक चली लड़ाई के बाद कथित अंतरिम समझौते की खबरों से वैश्विक बाजारों में बड़ा असर देखने को मिला है। इस समझौते की वजह से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद से सप्लाई बाधित होने की आशंका घट गई है।
इसका सीधा असर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश (safe haven assets) पर भी पड़ा। शुरुआती कारोबार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX India) पर सोने की कीमत करीब 1,600 रुपये प्रति 10 ग्राम गिर गई, जबकि चांदी में लगभग 6,300 रुपये प्रति किलोग्राम की तेज गिरावट देखी गई।
MCX पर सोने-चांदी में बड़ी गिरावट
MCX डेटा के अनुसार:
सोना
- पिछला बंद: ₹1,53,879 प्रति 10 ग्राम
- ओपनिंग: ₹1,52,306
- गिरावट: लगभग ₹1,716 (करीब 1.10%)
- दिन के निचले स्तर पर: ₹1,52,163
चांदी
- पिछला बंद: ₹2,51,807 प्रति किलोग्राम
- ओपनिंग: ₹2,48,000
- शुरुआती गिरावट: ₹6,298 तक
- ट्रेडिंग स्तर: ₹2,46,433 (लगभग ₹5,374 की गिरावट के साथ)
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से कीमती धातुओं में दबाव बढ़ा है।
प्रमुख शहरों में सोने के दाम
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भारत के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने के भाव इस प्रकार रहे:
- दिल्ली: ₹1,51,250
- मुंबई: ₹1,51,100
- कोलकाता: ₹1,51,100
- चेन्नई: ₹1,53,380
- लखनऊ: ₹1,51,250
- कानपुर: ₹1,51,250
- पटना: ₹1,51,150
- जयपुर: ₹1,51,250
- इंदौर: ₹1,51,150
- भोपाल: ₹1,51,150
इसी तरह 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,38,500 से ₹1,40,600 के बीच रहा, जबकि 18 कैरेट सोना ₹1,11,700 से ₹1,13,470 के दायरे में कारोबार करता दिखा।
सर्राफा बाजार में भी नरमी
घरेलू सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमतें स्थिर से कमजोर रहीं, जबकि चांदी में अधिक गिरावट देखी गई।
- 24 कैरेट सोना: लगभग ₹1,51,100 प्रति 10 ग्राम
- 22 कैरेट सोना: ₹1,38,500
- 18 कैरेट सोना: ₹1,13,320
- चांदी: लगभग ₹2,60,000 प्रति किलोग्राम (गिरावट के साथ)
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी में यह गिरावट अस्थायी हो सकती है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ब्याज दरों की भविष्य की दिशा अभी भी कीमती धातुओं के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है।








