गोपालपुर के MDM BRP विकास कुमार पद से हटाए गए, सरकारी आदेश में छेड़छाड़ और फर्जी ऑडिट कराने का आरोप

भागलपुर के गोपालपुर में MDM BRP विकास कुमार पर सरकारी आदेश में छेड़छाड़ और फर्जी ऑडिट कराने का आरोप लगा है। विभाग ने उन्हें पद से हटा दिया है।
गोपालपुर के MDM BRP विकास कुमार पद से हटाए गए, सरकारी आदेश में छेड़छाड़ और फर्जी ऑडिट कराने का आरोप
Photo Credit / Attribution: google

भागलपुर। जिले के गोपालपुर प्रखंड में मध्याह्न भोजन योजना (MDM) से जुड़े कामकाज को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रखंड साधन सेवी (BRP) विकास कुमार को पद से हटा दिया गया है। उन पर सरकारी आदेश में कथित रूप से छेड़छाड़ करने और फर्जी तरीके से ऑडिट कराने का आरोप है। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। मामला सरकारी दस्तावेजों और विद्यालयों के ऑडिट की प्रक्रिया से जुड़ा होने के कारण विभागीय स्तर पर भी इसकी चर्चा हो रही है।

आरोप है कि गोपालपुर में मध्याह्न भोजन योजना से संबंधित सरकारी आदेश का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत किया गया। सरकारी आदेश में छेड़छाड़ कर ऑडिट की प्रक्रिया को प्रभावित करने और फर्जी ऑडिट कराने की बात सामने आई है। इसी मामले को गंभीर मानते हुए विभाग ने विकास कुमार को उनके पद से हटा दिया है। हालांकि, आरोपों की पूरी पुष्टि विभागीय जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही हो सकेगी।

मध्याह्न भोजन योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना में खाद्यान्न, राशि के उपयोग, बच्चों की उपस्थिति और भोजन वितरण से जुड़े रिकॉर्ड का नियमित निरीक्षण और ऑडिट महत्वपूर्ण होता है। ऑडिट के माध्यम से यह जांच की जाती है कि सरकारी राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए हुआ है या नहीं। ऐसे में ऑडिट से जुड़े सरकारी आदेश में छेड़छाड़ का आरोप विभाग के लिए गंभीर विषय माना जा रहा है।

गोपालपुर प्रखंड में BRP की भूमिका विद्यालयों और विभाग के बीच समन्वय स्थापित करने तथा योजना से संबंधित कार्यों की निगरानी से जुड़ी होती है। ऐसे पद पर कार्यरत कर्मी के खिलाफ सरकारी दस्तावेजों में कथित हेरफेर और फर्जी ऑडिट कराने का आरोप सामने आने के बाद विभाग ने कार्रवाई की है। अब इस मामले में संबंधित आदेश, ऑडिट से जुड़े रिकॉर्ड और पूरी प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण होगी।

भागलपुर शिक्षा विभाग पहले भी वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ी से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में गोपालपुर का यह मामला सामने आने के बाद सरकारी योजनाओं के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। मध्याह्न भोजन योजना सीधे स्कूली बच्चों के पोषण से जुड़ी है, इसलिए इसके रिकॉर्ड और खर्च में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।

विकास कुमार को पद से हटाए जाने के बाद अब यह देखना होगा कि विभागीय जांच में आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं। सरकारी आदेश में कथित छेड़छाड़ किस स्तर पर हुई, ऑडिट किस तरह कराया गया और इसमें अन्य किसी कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं, इन सभी पहलुओं की पड़ताल जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर विकास कुमार को पद से हटाए जाने की कार्रवाई हुई है, जबकि आरोपों की विस्तृत पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही होगी।

Leave a comment