छात्रा को किस कर रहा था टीचर, भाई ने पीटा: गोरखपुर में एक्स्ट्रा क्लास के बहाने रोका था; आरोपी बोला- मेरी बहन जैसी, राखी भी बांधती है

गोरखपुर में एक्स्ट्रा क्लास के बहाने छात्रा को रोककर शिक्षक पर किस करने का आरोप लगा। छात्रा के भाई ने शिक्षक की पिटाई की, आरोपी ने बहन जैसी होने की सफाई दी।
छात्रा को किस कर रहा था टीचर, भाई ने पीटा: गोरखपुर में एक्स्ट्रा क्लास के बहाने रोका था; आरोपी बोला- मेरी बहन जैसी, राखी भी बांधती है
Photo Credit / Attribution: Google

गोरखपुर में एक छात्रा के साथ शिक्षक के कथित व्यवहार को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। आरोप है कि शिक्षक ने छात्रा को एक्स्ट्रा क्लास के बहाने रोक लिया और उसके साथ आपत्तिजनक हरकत की। इसी दौरान छात्रा के भाई को घटना की जानकारी हुई तो उसने शिक्षक की पिटाई कर दी। घटना के बाद स्कूल और आसपास के इलाके में चर्चा तेज हो गई। मामले में शिक्षक की ओर से अलग सफाई सामने आई है। उसका कहना है कि छात्रा उसके लिए बहन जैसी है और वह उसे राखी भी बांधती है। हालांकि, छात्रा के साथ कथित तौर पर किस करने की घटना को लेकर लगाए गए आरोपों ने शिक्षक-छात्र संबंध और स्कूल में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि मामला उस समय सामने आया जब स्कूल की नियमित कक्षाएं खत्म होने के बाद छात्रा को अतिरिक्त पढ़ाई यानी एक्स्ट्रा क्लास के नाम पर रोकने की बात सामने आई। आरोप के मुताबिक, छात्रा को यह भरोसा दिलाया गया था कि अतिरिक्त पढ़ाई के लिए उसे कुछ समय और स्कूल में रहना होगा। इसी दौरान शिक्षक ने उसके साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार किया। छात्रा ने जब इस व्यवहार का विरोध किया तो मामला परिवार तक पहुंचा। इसके बाद छात्रा के भाई ने शिक्षक से इस संबंध में जवाब मांगा और दोनों के बीच विवाद बढ़ गया।

परिवार की ओर से लगाए गए आरोप के अनुसार, छात्रा को एक्स्ट्रा क्लास के नाम पर रोके जाने के बाद शिक्षक ने उसके साथ नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की। आरोप है कि इसी दौरान शिक्षक छात्रा को किस कर रहा था। यह देखकर या घटना की जानकारी मिलने के बाद छात्रा के भाई का गुस्सा फूट पड़ा और उसने शिक्षक की पिटाई कर दी। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुटने और विवाद बढ़ने की बात भी सामने आई है।

शिक्षक की ओर से आरोपों को लेकर अलग पक्ष रखा गया है। आरोपी शिक्षक का कहना है कि छात्रा उसके लिए बहन जैसी है। उसने यह भी कहा कि छात्रा उसे राखी बांधती है। शिक्षक की इस सफाई के बाद मामले में दोनों पक्षों के दावों को लेकर स्थिति और संवेदनशील हो गई है। एक तरफ छात्रा के परिवार की ओर से शिक्षक के व्यवहार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वहीं शिक्षक अपने और छात्रा के बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता होने की बात कह रहा है। ऐसे में वास्तविक घटनाक्रम क्या था, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

इस घटना ने स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल में शिक्षक और छात्र के बीच संबंध पूरी तरह शैक्षणिक और सुरक्षित होना जरूरी है। खासकर तब, जब किसी छात्रा को नियमित कक्षा समाप्त होने के बाद अतिरिक्त क्लास के नाम पर रोका जाता है, तो स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में अभिभावकों को जानकारी देना, स्कूल में पर्याप्त निगरानी रखना और जरूरत पड़ने पर महिला शिक्षिका या अन्य जिम्मेदार स्टाफ की मौजूदगी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि छात्रा को एक्स्ट्रा क्लास के नाम पर किस परिस्थिति में रोका गया था और उस दौरान कक्षा या परिसर में कौन-कौन मौजूद था। यदि स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं तो फुटेज की जांच से घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा छात्रा, शिक्षक, स्कूल स्टाफ और परिवार के सदस्यों के बयान भी मामले की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

घटना के बाद छात्रा के परिवार में नाराजगी का माहौल है। परिवार का आरोप है कि शिक्षक को छात्रा के साथ किसी भी तरह की ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए थी। उनका कहना है कि शिक्षक और छात्र के बीच विश्वास का रिश्ता होता है और शिक्षक से बच्चों की सुरक्षा तथा मार्गदर्शन की अपेक्षा की जाती है। यदि किसी शिक्षक पर छात्रा के साथ अनुचित व्यवहार का आरोप लगता है तो स्कूल प्रबंधन को मामले को दबाने के बजाय निष्पक्ष तरीके से इसकी जांच करानी चाहिए।

दूसरी ओर, शिक्षक की ओर से दिया गया यह तर्क कि छात्रा उसे बहन मानती है और राखी बांधती है, जांच में अपने आप में आरोपों को खत्म नहीं करता। किसी भी घटना की वास्तविकता इस बात से तय होगी कि उस समय क्या हुआ था। छात्रा की सहमति, उसकी उम्र, घटनास्थल की परिस्थितियां, उपलब्ध साक्ष्य और दोनों पक्षों के बयान जांच के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं। इसलिए मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस या संबंधित अधिकारियों की जांच का इंतजार करना जरूरी है।

अगर छात्रा नाबालिग है तो उसकी पहचान सार्वजनिक करना कानून और पत्रकारिता की दृष्टि से उचित नहीं होगा। ऐसे मामलों में पीड़िता की पहचान छिपाकर ही घटना की जानकारी दी जानी चाहिए। परिवार, स्कूल और प्रशासन को भी छात्रा की निजता और मानसिक सुरक्षा का ध्यान रखना होगा। किसी भी प्रकार का वीडियो, फोटो या व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करना छात्रा के लिए आगे परेशानी पैदा कर सकता है।

घटना के बाद स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। यह पता लगाया जाना जरूरी होगा कि एक्स्ट्रा क्लास किस शिक्षक द्वारा और किस अनुमति के तहत कराई जा रही थी। क्या इसकी जानकारी स्कूल प्रशासन को थी, क्या अन्य शिक्षक या कर्मचारी आसपास मौजूद थे और क्या छात्रा को नियमित समय के बाद रोकने की कोई आधिकारिक व्यवस्था थी, जैसे सवालों के जवाब मामले को समझने में मदद करेंगे।

ऐसे मामलों में केवल मारपीट से समस्या का समाधान नहीं होता। यदि किसी शिक्षक पर छात्रा के साथ आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप है तो शिकायत को संबंधित अधिकारियों के सामने रखा जाना चाहिए और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। छात्रा के भाई द्वारा शिक्षक की पिटाई किए जाने की घटना भी कानून-व्यवस्था के लिहाज से अलग विषय हो सकती है। जांच एजेंसियां दोनों घटनाक्रमों को अलग-अलग देख सकती हैं।

गोरखपुर की इस घटना ने अभिभावकों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है। स्कूल भेजे जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवार यह उम्मीद करते हैं कि शिक्षक और स्कूल प्रबंधन उनकी जिम्मेदारी समझेंगे। अतिरिक्त कक्षाओं, ट्यूशन या स्कूल के बाद रुकने की स्थिति में अभिभावकों को स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है। इससे बच्चों की सुरक्षा भी बढ़ती है और किसी विवाद की स्थिति में तथ्य स्पष्ट करने में भी मदद मिलती है।

फिलहाल मामले में सामने आए आरोपों और शिक्षक की सफाई के बीच सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। छात्रा के परिवार की शिकायत, शिक्षक का बयान, प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी, स्कूल में उपलब्ध रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज जैसे साक्ष्य यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि घटना वास्तव में किस तरह हुई। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है, जबकि आरोप गलत पाए जाने पर स्थिति अलग होगी।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है। नियमों का पालन, शिक्षकों की जवाबदेही, शिकायत व्यवस्था और अभिभावकों के साथ पारदर्शी संवाद भी उतना ही जरूरी है। खासकर छात्राओं से जुड़े मामलों में शिकायत सामने आते ही संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि छात्रा पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।

Leave a comment