केटीआर ने आरोप लगाया कि हैदराबाद मेट्रो रेल में 30,000 करोड़ रुपये का घोटाला हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री Revanth Reddy पर निजी हितों के लिए सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए केंद्र और राज्य सरकार की आलोचना की।
हैदराबाद: तेलंगाना में हैदराबाद मेट्रो रेल परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (KTR) ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि दोनों नेता मेट्रो रेल मुद्दे पर “राजनीतिक ड्रामा” कर रहे हैं, जबकि इसके पीछे करीब 30,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों से जुड़ा कथित बड़ा घोटाला छिपा हुआ है।
KTR ने दावा किया कि मेट्रो रेल से जुड़ी जमीन और संपत्तियों के नियंत्रण को लेकर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की कोशिश की जा रही है, जिससे राज्य के सार्वजनिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है।
250 एकड़ जमीन और 30,000 करोड़ की संपत्तियों पर विवाद
सेरिलिंगमपल्ली में BRS कार्यकर्ताओं की एक बड़ी बैठक को संबोधित करते हुए KTR ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी लगभग 250 एकड़ मूल्यवान मेट्रो रेल से जुड़ी जमीन और 30,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अपने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों को सौंपने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित योजना का हिस्सा है, जिसके तहत सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हितों में बदला जा रहा है। KTR के अनुसार, राज्य सरकार पर दबाव बनाकर L&T मेट्रो रेल अधिकारियों को राज्य से बाहर जाने के लिए मजबूर किया गया, ताकि इन परिसंपत्तियों पर नियंत्रण आसान हो सके।
14,000 करोड़ रुपये के कर्ज को लेकर भी आरोप
BRS नेता ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार L&T मेट्रो रेल के लगभग 14,000 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ जनता पर डालने की तैयारी कर रही है। उनका कहना है कि यह कदम केवल मेट्रो संपत्तियों पर नियंत्रण पाने के लिए उठाया जा रहा है, जबकि यह वित्तीय जिम्मेदारी निजी कंपनी की होनी चाहिए।
KTR ने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो यह परियोजना आर्थिक संकट में फंस सकती है और इसका सीधा असर राज्य की जनता पर पड़ेगा। उन्होंने इसे जनता के हितों के खिलाफ एक “खतरनाक वित्तीय निर्णय” बताया।
केंद्र और राज्य सरकार पर मिलीभगत के आरोप
KTR ने अपने भाषण में यह भी सवाल उठाया कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में तेलंगाना के विकास के लिए प्रतिबद्ध है, तो उसने पिछली BRS सरकार द्वारा प्रस्तावित मेट्रो विस्तार योजना को मंजूरी क्यों नहीं दी। उन्होंने कहा कि लाकड़ीकापुल से पाटनचेरु तक मेट्रो विस्तार का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के छोटे शहरों में भी मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। KTR ने आरोप लगाया कि राज्य में कांग्रेस सरकार और केंद्र में भाजपा सरकार सार्वजनिक रूप से भले ही एक-दूसरे का विरोध करती दिखती हों, लेकिन दिल्ली में दोनों की कार्यशैली “समान उद्देश्य” की ओर इशारा करती है।
एयरपोर्ट मेट्रो प्रोजेक्ट पर भी उठे सवाल
BRS नेता ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो परियोजना को रद्द कर दिया, जिससे शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने दावा किया कि दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने मेट्रो विस्तार को मंजूरी दिलाने में विफलता दिखाई है। KTR ने दोनों नेताओं पर जनता को गुमराह करने और राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
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राजनीतिक बयानबाजी तेज, तीखे आरोप-प्रत्यारोप
KTR ने अपने भाषण में यह भी कहा कि राज्य में चल रही मौजूदा राजनीतिक स्थिति केवल दिखावे की लड़ाई है, जबकि वास्तविक मुद्दों को पीछे धकेल दिया गया है। उन्होंने कहा कि मेट्रो परियोजना जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के मुद्दे को राजनीतिक टकराव का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर तीखी टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि उनकी कार्यशैली “टूटी-फूटी राजनीतिक सोच” से प्रभावित है, जो राज्य के विकास के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।
सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे विवाद पर राज्य सरकार या केंद्र सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक हलकों में इस बयान के बाद नई बहस शुरू हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मेट्रो रेल जैसी बड़ी परियोजनाओं को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज होते हैं, तो इसका असर निवेश, शहरी विकास और सार्वजनिक परिवहन योजनाओं पर पड़ सकता है।
हैदराबाद मेट्रो: एक महत्वपूर्ण शहरी परियोजना
हैदराबाद मेट्रो रेल परियोजना भारत की सबसे बड़ी शहरी परिवहन परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। यह शहर की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए बनाई गई थी।
इस परियोजना में निजी और सार्वजनिक भागीदारी मॉडल के तहत निवेश किया गया है, जिससे यह आर्थिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बन जाती है। ऐसे में इसके संचालन और संपत्तियों को लेकर कोई भी विवाद सीधे तौर पर शहर के विकास पर असर डाल सकता है।
राजनीतिक टकराव के बीच जनता की चिंता
लगातार बढ़ते राजनीतिक आरोपों के बीच आम जनता के बीच भी चिंता देखी जा रही है। लोग चाहते हैं कि मेट्रो जैसी आवश्यक सेवाएं राजनीतिक विवादों से प्रभावित न हों और इसका विस्तार तेजी से पूरा किया जाए।
शहर के विकास और सार्वजनिक परिवहन की जरूरतों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि सभी पक्षों को मिलकर समाधान की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि परियोजना में किसी प्रकार की बाधा न आए।
आगे की राह क्या होगी?
फिलहाल इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी तेज है और आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है। यदि आरोपों की जांच होती है, तो यह तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। दूसरी ओर, यदि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर मेट्रो विस्तार और वित्तीय संरचना पर सहमति बनाते हैं, तो यह परियोजना आगे बढ़ सकती है और शहर को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सकती है। अभी के लिए, हैदराबाद मेट्रो रेल केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का केंद्र बनती नजर आ रही है, जिसका भविष्य आने वाले समय की राजनीतिक दिशा पर निर्भर करेगा।









