IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने AI को "सुनामी" करार दिया। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह अवसर है, लेकिन 40% नौकरियों पर असर पड़ सकता है। भारत में सही नीतियों और स्किल डेवलपमेंट से लाभ उठाया जा सकता है।
नई दिल्ली: India AI Impact Summit 2026 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए दोधारी तलवार बताया। उन्होंने कहा कि AI वैश्विक उत्पादकता और विकास के लिए बड़ा अवसर है, लेकिन इसके प्रभाव से रोजगार बाजार में बड़े बदलाव आ सकते हैं। जॉर्जीवा ने इसे "लेबर मार्केट पर सुनामी" करार दिया और कहा कि इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
AI से वैश्विक अर्थव्यवस्था को लाभ
जॉर्जीवा के अनुसार, AI वैश्विक GDP वृद्धि दर को सालाना 0.8 प्रतिशत अंक तक बढ़ा सकता है। इसका मतलब है कि COVID-19 से पहले के स्तर से भी तेज आर्थिक वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि AI के माध्यम से नई नौकरियां, व्यवसाय और अवसर पैदा होंगे। इस तकनीक का सही उपयोग करने से देशों की विकास दर में सुधार होगा और उत्पादकता बढ़ेगी।
AI के लाभ को लेकर उन्होंने इसे "शानदार अवसर" बताया और कहा कि अगर देशों ने इसे सही दिशा में लागू किया तो आर्थिक वृद्धि तेज होगी। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके साथ ही रोजगार बाजार में गंभीर बदलाव भी आएंगे, जिनका प्रबंधन करना जरूरी है।
भारत के लिए AI एक सुनहरा अवसर
क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने खासतौर से भारत के संदर्भ में सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत की मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, युवा आबादी, नवाचार और उद्यमिता AI को लोकतांत्रिक बनाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि AI का सही उपयोग कर भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बन सकता है और 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल कर सकता है।
उन्होंने भारत को AI के उपयोग और नवाचार के लिए एक उपयुक्त मंच करार दिया। जॉर्जीवा ने कहा कि भारत की युवा आबादी और तकनीकी तैयारी इसे AI क्रांति का लाभ उठाने में सक्षम बनाएगी।
रोजगार बाजार पर गंभीर खतरा
![]()
उत्साह के बावजूद जॉर्जीवा ने चेताया कि AI वैश्विक स्तर पर 40 प्रतिशत नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। उभरते बाजारों में 40% और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में 60% नौकरियां AI के प्रभाव से प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि एंट्री-लेवल जॉब्स सबसे ज्यादा जोखिम में हैं, खासकर युवाओं के लिए।
जॉर्जीवा ने बताया कि कुछ नौकरियां समाप्त हो सकती हैं, कुछ बदल जाएंगी, और कुछ अधिक कुशल और उच्च वेतन वाली बनेंगी। उन्होंने चेताया कि अगर नीतियां सही नहीं रहीं तो असमानता बढ़ सकती है। इसलिए स्किल डेवलपमेंट, रीस्किलिंग, शिक्षा सुधार और मजबूत नीतियों की जरूरत है।
Infosys चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने बताया भविष्य
इसी सम्मेलन में Infosys चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कहा कि AI क्रांति केवल कोडिंग तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में ध्यान AI सिस्टम को संचालित करने, ऑर्केस्ट्रेट करने और बिजनेस में प्रभावी ढंग से लागू करने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि यह बदलाव स्मार्टफोन और क्लाउड जैसी तकनीकों से भी ज्यादा मूलभूत होगा और बिजनेस मॉडल, ऑपरेशन और टैलेंट को पूरी तरह बदल देगा।
नीलेकणि ने अनुमान लगाया कि AI वैश्विक स्तर पर 170 मिलियन नए हाई-ग्रोथ जॉब्स पैदा कर सकता है। इन नौकरियों में AI इंजीनियर्स, फॉरेंसिक एनालिस्ट्स, AI लीड्स और फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स जैसी भूमिकाएं शामिल होंगी। वहीं, कुछ पुरानी भूमिकाएं जैसे बेसिक कोडिंग और QA टेस्टिंग कम प्रासंगिक हो सकती हैं।
स्किल डेवलपमेंट और रीस्किलिंग जरूरी
जॉर्जीवा ने जोर दिया कि AI के लाभ उठाने के लिए स्किल डेवलपमेंट और रीस्किलिंग अहम हैं। उन्होंने कहा कि नई नौकरियों के लिए लोगों को प्रशिक्षित करना होगा, ताकि वे AI और ऑटोमेशन के बदलावों के साथ तालमेल बैठा सकें। शिक्षा सुधार और नीतिगत समर्थन से युवाओं को AI क्रांति में हिस्सेदार बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि भारत जैसी युवा-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए यह सुनहरा मौका है। युवा आबादी को सही प्रशिक्षण और कौशल प्रदान कर देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।









