खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारी पुनीत भट्ट पर पत्नी की शिकायत के बाद दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज हुआ है। महिला ने 1 करोड़ रुपए और फॉर्च्यूनर कार मांगने, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में दहेज प्रताड़ना का एक हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है। शहर के प्रसिद्ध Khajrana Ganesh Temple से जुड़े पुजारी पुनीत भट्ट के खिलाफ उनकी पत्नी की शिकायत पर दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का मामला दर्ज किया गया है।
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि शादी के कुछ महीनों बाद ही पति और ससुराल पक्ष ने उनसे और उनके मायके वालों से 1 करोड़ रुपये नकद और एक Toyota Fortuner SUV लाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। मांग पूरी नहीं होने पर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
इस मामले ने न केवल शहर में चर्चा पैदा की है, बल्कि दहेज उत्पीड़न जैसे सामाजिक अपराधों पर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
महिला थाना पुलिस ने जांच के बाद दर्ज किया केस
इंदौर महिला थाना पुलिस के अनुसार, पीड़िता की शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच की गई। दोनों पक्षों के बयान लिए गए और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुनीत भट्ट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
महिला थाना प्रभारी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पहले जनसुनवाई में आवेदन लिया गया था। इसके बाद विस्तृत जांच प्रक्रिया पूरी की गई। फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और साक्ष्यों को इकट्ठा किया जा रहा है।
Madhya Pradesh Police ने कहा है कि मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
मई 2025 में हुई थी शादी, जुलाई के बाद बदलने लगे हालात
पीड़िता के अनुसार, उनकी शादी 17 मई 2025 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। यह शादी दोनों की दूसरी शादी थी। शुरुआत में वैवाहिक जीवन सामान्य रहा और परिवार का व्यवहार भी ठीक था।
लेकिन महिला का कहना है कि जुलाई 2025 के बाद ससुराल पक्ष का रवैया अचानक बदलने लगा। धीरे-धीरे उन पर आर्थिक दबाव बढ़ाया गया और मायके से बड़ी रकम लाने के लिए कहा जाने लगा।
पीड़िता का आरोप है कि पहले अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाया गया, लेकिन बाद में पति और परिवार के अन्य सदस्यों ने खुलकर दहेज की मांग शुरू कर दी।
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1 करोड़ रुपये और फॉर्च्यूनर की मांग का आरोप
शिकायत के अनुसार, पति और ससुराल पक्ष ने महिला से कहा कि वह अपने मायके से 1 करोड़ रुपये नकद और एक फॉर्च्यूनर कार लेकर आए। महिला ने आरोप लगाया कि जब उसने ऐसा करने से इनकार किया, तो उसके साथ दुर्व्यवहार शुरू हो गया।
पीड़िता का कहना है कि उन्हें लगातार अपमानित किया गया, मानसिक दबाव में रखा गया और कई बार शारीरिक रूप से भी प्रताड़ित किया गया। उनका यह भी आरोप है कि ससुराल पक्ष ने उन्हें घर से निकालने की कोशिश की।
महिला ने अपनी शिकायत में पति के अलावा सास, ननद, नंदोई और देवरों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
पहले भी पुलिस आयुक्त कार्यालय में दी थी शिकायत
इससे पहले पीड़िता ने करीब 22 दिन पहले इंदौर पुलिस आयुक्त कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में भी शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
जनसुनवाई के बाद मामला महिला थाना पुलिस को सौंपा गया, जहां विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए और उपलब्ध दस्तावेजों का अध्ययन किया।
अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपों का समर्थन करने वाले अन्य सबूत, जैसे संदेश, कॉल रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट या गवाह मौजूद हैं या नहीं।
खजराना मंदिर से जुड़ाव के कारण मामला चर्चा में
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोपी पुजारी शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक खजराना गणेश मंदिर से जुड़े हैं। यह मंदिर मध्य भारत के सबसे प्रसिद्ध आस्था केंद्रों में गिना जाता है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
ऐसे में मंदिर से जुड़े व्यक्ति पर लगे आरोपों ने सामाजिक और धार्मिक हलकों में भी चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच तथ्यों और कानून के आधार पर की जाएगी।
दहेज उत्पीड़न: अब भी गंभीर सामाजिक चुनौती
भारत में दहेज प्रथा कानूनी रूप से अपराध है, लेकिन इसके बावजूद दहेज उत्पीड़न के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षित और सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित परिवारों में भी ऐसी घटनाएं इस समस्या की गहराई को दिखाती हैं।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर शिकायत, पुलिस की निष्पक्ष जांच और कानूनी सहायता पीड़ितों के लिए बेहद जरूरी है।
कानून और समाज की भूमिका
दहेज प्रताड़ना से जुड़े मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही काफी नहीं है। समाज को भी पीड़ित महिलाओं के समर्थन में खड़ा होना होगा। परिवार, समुदाय और संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे ऐसी प्रथाओं के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाएं।










