जयपुर में USDT निवेश स्कैम का भंडाफोड़, 70 दिन में पैसा दोगुना करने के नाम पर 50 से अधिक लोग ठगे गए

जयपुर पुलिस ने क्रिप्टो और USDT निवेश के नाम पर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। 70 दिन में पैसा दोगुना का झांसा देकर 50 से ज्यादा लोगों से ठगी की गई।

राजधानी जयपुर पुलिस ने क्रिप्टो और USDT निवेश के नाम पर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। आरोपियों ने 70 दिन में पैसा दोगुना करने का झांसा देकर 50 से ज्यादा लोगों से ठगी की और 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो क्रिप्टोकरेंसी और यूएसडीटी (USDT) में निवेश के नाम पर लोगों को ठग रहा था। यह गिरोह “70 दिन में पैसा दोगुना” करने का झांसा देकर निवेशकों को फंसाता था और अब तक 50 से अधिक लोगों से धोखाधड़ी किए जाने की पुष्टि हुई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो विद्याधर नगर क्षेत्र में फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे।

HLX, JUPITER और AiPF जैसे नामों से चल रही थी फर्जी निवेश योजनाएं

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी कई फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म जैसे HLX, JUPITER, AiPF और Value City के नाम से लोगों को आकर्षित करते थे। इन योजनाओं को इस तरह पेश किया जाता था कि वे असली क्रिप्टो ट्रेडिंग या ब्लॉकचेन आधारित निवेश प्रणाली लगें। निवेशकों को यह दिखाया जाता था कि उनका पैसा तेजी से बढ़ रहा है, जबकि वास्तविकता में पूरा सिस्टम फर्जी डैशबोर्ड पर आधारित था। इसी नकली लाभ के आधार पर लोगों को बार-बार अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था।

क्रिप्टो और USDT के नाम पर फंसाकर की जाती थी ठगी

गिरोह के सदस्य लोगों को डिजिटल करेंसी और ब्लॉकचेन तकनीक का झांसा देकर निवेश के लिए राजी करते थे। निवेशकों से पैसे लेकर उन्हें यूएसडीटी में बदला जाता था और फिर एक फर्जी प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर दिखाया जाता था। इस प्लेटफॉर्म पर बढ़ते हुए रिटर्न का नकली डेटा दिखाकर लोगों को भरोसे में लिया जाता था। बाद में निवेशक और अधिक लाभ के लालच में अपनी पूरी बचत तक लगा देते थे और अंत में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता था।

बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर बनाया गया नेटवर्क का हिस्सा

पुलिस के अनुसार इस पूरे रैकेट को चलाने के लिए बेरोजगार युवाओं को नौकरी और कमाई का झांसा देकर कॉल सेंटर में भर्ती किया जाता था। इन युवाओं को रोजाना टारगेट दिया जाता था कि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को फोन कर निवेश के लिए तैयार करें। उन्हें यह बताया जाता था कि वे एक वैध निवेश कंपनी के लिए काम कर रहे हैं, जबकि वास्तव में वे एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा बन चुके थे। यह तरीका इस गिरोह को तेजी से विस्तार देने में मदद कर रहा था।

जयपुर में USDT निवेश स्कैम का भंडाफोड़, 70 दिन में पैसा दोगुना करने के नाम पर 50 से अधिक लोग ठगे गए

30,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों से जुड़े बड़े दावे

पुलिस कार्रवाई के बीच आरोपियों के खिलाफ गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के संकेत भी मिले हैं। आरोप है कि यह नेटवर्क केवल छोटे निवेश तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे बड़े स्तर पर संपत्तियों और धन के नियंत्रण की योजना भी थी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों का उद्देश्य निवेश के नाम पर अधिक से अधिक धन इकट्ठा कर अचानक गायब हो जाना था। हालांकि कुल ठगी की राशि की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।

गिरफ्तार आरोपी और पुलिस की जांच

पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें सीकर के लापवा निवासी राजेंद्र बाजिया, झुंझुनूं के ओजटू निवासी संजय स्वामी और सीकर के लाडपुरा निवासी रेणुका गढ़वाल शामिल हैं। ये सभी जयपुर में किराए के मकानों में रहकर फर्जी कॉल सेंटर का संचालन कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हो सकता है और इसके अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह ने कुल कितनी राशि की ठगी की है और कितने लोग इसके शिकार बने हैं।

50 से अधिक लोग शिकार, जांच में बढ़ सकता है आंकड़ा

अब तक की जांच में 50 से अधिक लोगों के साथ धोखाधड़ी की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन पुलिस को आशंका है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। कई पीड़ित अभी सामने नहीं आए हैं या उन्हें यह एहसास नहीं हुआ है कि वे ठगी का शिकार हुए हैं। पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।

पुलिस की अपील और साइबर ठगी से सावधानी की चेतावनी

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी निवेश योजना में अत्यधिक और असामान्य मुनाफे के दावों पर भरोसा न करें। विशेष रूप से “कम समय में पैसा दोगुना” जैसी स्कीम अक्सर साइबर ठगों का जाल होती हैं। पुलिस ने कहा है कि किसी भी संदिग्ध निवेश गतिविधि की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

डिजिटल निवेश के बढ़ते खतरे और सबक

यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि डिजिटल निवेश और क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते चलन के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। तकनीकी शब्दों और हाई रिटर्न के वादों का इस्तेमाल कर ठग आम लोगों को आसानी से फंसा लेते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश से पहले पूरी जानकारी और सत्यापन बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसे आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।

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