Jan Vishwas Bill: मामूली अपराधों के मामलों में राहत, लंबित मुकदमे वापस लेने की अपील

केंद्र सरकार ने जन विश्वास (संशोधन) बिल 2026 लागू किया। मामूली अपराध गैर-आपराधिक होंगे, लंबित मामले वापस लिए जाएंगे, और अदालतों पर बोझ कम होगा।

केंद्र सरकार ने जन विश्वास बिल 2026 लागू किया। इसके तहत छोटे अपराध गैर-आपराधिक होंगे, लगभग 5 करोड़ मामूली मामले वापस लिए जाएंगे। अदालतों पर बोझ कम होगा और व्यापारियों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

New Delhi: केंद्र सरकार ने जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2026 को लागू कर छोटे-मोटे अपराधों से जुड़े मामलों में बड़ी राहत देने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। इस बिल के तहत मामूली अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने और लंबित मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे आम जनता और व्यापारियों के लिए बड़ी राहत बताया है। 

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सभी संबंधित विभागों को ऐसे लंबित मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने पर विचार करने का निर्देश दिया है। इससे न केवल न्यायालयों पर बोझ कम होगा, बल्कि आम लोगों और व्यापारियों के जीवन को आसान बनाने में मदद मिलेगी।

विधेयक के मुख्य उद्देश्य

जन विश्वास (संशोधन) विधेयक के लागू होने के बाद 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इन बदलावों के जरिए करीब 1,000 छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक कर तर्कसंगत बनाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे कारोबार का माहौल सुधरेगा, अनावश्यक कानूनी झंझट और उत्पीड़न भी कम होगा। इस कदम को व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) और जीवन सुगमता (Ease of Living) बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

विभागों को दिए गए दिशा-निर्देश

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने बताया कि नए कानूनी प्रावधानों के मद्देनजर लंबित मामलों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून मंत्रालय के साथ मिलकर विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। 

Jan Vishwas Bill: मामूली अपराधों के मामलों में राहत, लंबित मुकदमे वापस लेने की अपील

अदालतों में लंबित मामूली मामलों की समीक्षा के लिए सामान्य सलाह पहले से ही जारी की जा चुकी है। जिन मामलों में अपराध गंभीर नहीं है, वहां संबंधित विभाग अदालत में आवेदन देकर मुकदमे वापस ले सकते हैं। इससे छोटे अपराधों से जुड़े मामलों का समाधान जल्दी और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

लगभग 5 करोड़ मामूली मामले

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि देश में करीब 5 करोड़ मामले ऐसे हैं जो मामूली अपराधों से जुड़े हैं। इनमें से अधिकांश मामलों को अदालत तक पहुंचना ही नहीं चाहिए था। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए कानून के लागू होने के बाद अभियोजक अदालतों से इन मामलों को बंद करने का अनुरोध करेंगे। 

गोयल ने बताया कि इन प्रावधानों के कारण कई स्तरों पर अनिश्चितता, भ्रष्टाचार और उत्पीड़न की स्थिति पैदा होती थी, जिसे अब समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भविष्य में भी कानूनों की समीक्षा के लिए सुझावों के प्रति खुली रहेगी। इसके अलावा, 12 राज्यों ने भी अपने कानूनों में छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने की पहल की है और अन्य राज्यों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

सजा में बदलाव

जन विश्वास बिल में कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। 57 प्रावधानों में कारावास समाप्त किया गया है, 158 प्रावधानों में जुर्माना हटाया गया है और 17 प्रावधानों में सजा को कम किया गया है। इसके अलावा, 113 प्रावधानों में कारावास और जुर्माने की जगह केवल आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। नई दिल्ली नगर परिषद अधिनियम, 1994 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में 67 संशोधन किए गए हैं, जिनका उद्देश्य नियमों को सरल और जीवन को सहज बनाना है।

पर्यावरण संबंधी मामलों में राहत

जन विश्वास बिल में पर्यावरण से जुड़े मामूली मामलों में भी राहत दी गई है। वायु प्रदूषण के मानकों के पहले उल्लंघन पर केवल जुर्माना लगाया जाएगा और ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जाएगा। दोबारा उल्लंघन होने पर कड़े प्रावधान लागू होंगे। ध्वनि प्रदूषण के मामलों में पहली बार केवल चेतावनी दी जाएगी और पुनरावृत्ति होने पर सामान्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस तरह नागरिकों और व्यापारियों को नियमों का पालन करने में मार्गदर्शन मिलेगा, जबकि अनावश्यक कानूनी दबाव कम होगा।

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