मध्यप्रदेश के जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने नरसिंहपुर में एक पटवारी को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। नामांतरण के बदले रिश्वत मांगी गई थी। आरोपी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे जांच जारी है।
नरसिंहपुर: मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने एक पटवारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पटवारी पर जमीन के नामांतरण (Mutation) के बदले 10 हजार रुपये की मांग करने का आरोप था, जिसमें पहली किश्त के रूप में 5 हजार रुपये लेते समय उसे पकड़ा गया। यह कार्रवाई सोमवार को गोटेगांव क्षेत्र में की गई, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच, 10 हजार की मांग का खुलासा
लोकायुक्त पुलिस को यह शिकायत संदीप कुमार सिंह, निवासी पड़रिया (गोटेगांव), द्वारा दी गई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी माता ममता देवी ने ग्राम मुआर में 7 एकड़ जमीन खरीदी थी, जिसके नामांतरण के लिए वे पटवारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे।
आरोप है कि हल्का नंबर 41, ग्राम मुरदई के पटवारी घनश्याम गढ़वाल ने नामांतरण प्रक्रिया पूरी करने के बदले 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जबलपुर ने मामले की प्रारंभिक जांच और सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई।
5 हजार रुपये पर बनी सहमति, लोकायुक्त ने बिछाया ट्रैप
जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी पटवारी 10 हजार रुपये की मांग कर रहा था, लेकिन बातचीत के बाद 5 हजार रुपये में सौदा तय हुआ।
इसके बाद लोकायुक्त टीम ने सुनियोजित तरीके से ट्रैप (जाल) बिछाया और आरोपी को पकड़ने की योजना बनाई। तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को रुपये लेकर भेजा गया और जैसे ही पटवारी ने रकम ली, टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
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निजी कार्यालय में हुई कार्रवाई, मौके पर पकड़ा गया आरोपी
यह कार्रवाई गोटेगांव के महिंद्रा शोरूम के पास स्थित टीला क्षेत्र में पटवारी के निजी कार्यालय में की गई। इसी स्थान पर आरोपी घनश्याम गढ़वाल को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
लोकायुक्त टीम ने मौके पर पंचनामा तैयार कर साक्ष्य एकत्र किए और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज
गिरफ्तार पटवारी घनश्याम गढ़वाल (उम्र 39 वर्ष), जो मूल रूप से पंचमुखी हनुमान कॉलोनी, बरही (जिला कटनी) का निवासी है, के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 13(1)(बी) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और विस्तृत जांच की जा रही है कि क्या इस तरह की अन्य शिकायतें भी पहले से मौजूद थीं।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर हुई कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश और पुलिस उप महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई।
इस ट्रैप ऑपरेशन में निरीक्षक राहुल गजभिए और निरीक्षक जितेंद्र यादव सहित लोकायुक्त जबलपुर की विशेष टीम शामिल रही।
अधिकारियों ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी ताकि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
नामांतरण प्रक्रिया में रिश्वतखोरी पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर जमीन नामांतरण जैसी बुनियादी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम नागरिकों को अपने वैध कार्यों के लिए भी रिश्वत देने को मजबूर होना पड़ता है, जो शासन व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन सिस्टम के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में रिश्वतखोरी की घटनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई हैं।
लोकायुक्त की सख्ती से बढ़ी उम्मीदें
लोकायुक्त की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। लगातार हो रही ट्रैप कार्रवाइयों से यह संकेत मिलता है कि सरकारी तंत्र में रिश्वतखोरी पर अब प्रशासन की नजर और भी सख्त हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी कार्रवाई से आम जनता को राहत मिलती है और सरकारी कामकाज में भरोसा बढ़ता है।









