जोधपुर के मंडोर में 80 वर्षीय महिला का गला दबाकर सोने-चांदी के गहने और नकदी लूटने वाले 19 वर्षीय आरोपी को पुलिस ने 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और साइबर सेल की मदद से गिरफ्तार कर लिया।
जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर शहर में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ हुई लूट की वारदात का पुलिस ने सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है। आरोपी ने खुद को किरायेदार बताकर बुजुर्ग महिला का विश्वास जीता और फिर घर में अकेला पाकर उनका गला दबाकर सोने-चांदी के गहने तथा नकदी लूटकर फरार हो गया।
घटना के बाद जोधपुर पुलिस ने व्यापक जांच अभियान चलाया। सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, साइबर तकनीक और स्थानीय खुफिया जानकारी की मदद से आरोपी की पहचान की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। यह मामला बुजुर्गों के खिलाफ बढ़ते अपराधों और आधुनिक तकनीक के जरिए अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस की भूमिका को एक बार फिर सामने लाता है।
किरायेदार बनने के बहाने घर में दाखिल हुआ आरोपी
पुलिस के अनुसार यह घटना 12 जून 2026 को जोधपुर के मण्डोर क्षेत्र में हुई। शिकायतकर्ता भोलाराम ने पुलिस को बताया कि उनकी 80 वर्षीय मां गिड़िया बाई सुबह अपने घर के बाहर अकेली बैठी थीं।
इसी दौरान एक युवक उनके पास पहुंचा और पहले पानी की मटकी खरीदने की इच्छा जताई। बातचीत के दौरान उसने यह भी कहा कि उसे किराए पर रहने के लिए एक कमरा चाहिए। महिला ने उसकी बात पर भरोसा किया और मकान की ऊपरी मंजिल पर बने कमरे को दिखाने के लिए उसे साथ ले गईं।
पुलिस का कहना है कि आरोपी पहले से ही लूट की योजना बनाकर आया था और उसने महिला के अकेले होने का फायदा उठाया।
गला दबाकर लूटे गहने और नकदी
कमरा दिखाने के दौरान आरोपी ने अचानक महिला पर हमला कर दिया। उसने उनका गला दबाया और उन्हें जमीन पर गिरा दिया, जिससे बुजुर्ग महिला खुद का बचाव नहीं कर सकीं।
इसके बाद आरोपी ने महिला के कानों में पहनी सोने की टोंटियां, पैरों में पहनी चांदी की रिमझोड़ और नकदी से भरा बैग लूट लिया। वारदात को अंजाम देने के बाद वह मौके से फरार हो गया।
परिजनों को घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई और महिला को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई।
पुलिस ने बनाई विशेष जांच टीम
घटना की गंभीरता को देखते हुए जोधपुर पुलिस ने तत्काल विशेष जांच टीम का गठन किया। पुलिस उपायुक्त (पूर्व) के निर्देशन में मण्डोर थाना पुलिस और अन्य विशेष इकाइयों को जांच में लगाया गया।
जांच टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और आरोपी के संभावित भागने के रास्तों की पहचान की। इसके साथ ही आसपास के व्यापारिक प्रतिष्ठानों, पेट्रोल पंपों, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज एकत्र की गई।
पुलिस का उद्देश्य आरोपी की गतिविधियों का पूरा क्रम तैयार करना था ताकि उसकी पहचान और गिरफ्तारी जल्द से जल्द सुनिश्चित की जा सके।
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200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई
जांच के दौरान पुलिस ने लगभग 200 सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया। फुटेज के आधार पर संदिग्ध युवक की गतिविधियों और उसके आने-जाने के मार्ग का पता लगाया गया।
सीसीटीवी फुटेज से प्राप्त तस्वीरों को साइबर सेल और तकनीकी टीम के साथ साझा किया गया। विभिन्न स्थानों से मिले वीडियो को जोड़कर पुलिस ने आरोपी की पहचान और उसके वाहन तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में डिजिटल निगरानी प्रणाली अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और इस मामले में भी यही तकनीक पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग साबित हुई।
साइबर सेल की मदद से आरोपी तक पहुंची पुलिस
सीसीटीवी विश्लेषण के साथ-साथ साइबर सेल ने तकनीकी सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध की गतिविधियों का विश्लेषण किया। पुलिस ने वाहन की पहचान और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी को मिलाकर आरोपी का पता लगाया।
इसके बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर आरोपी को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
जैसलमेर निवासी 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में 19 वर्षीय जीतू उर्फ जितेंद्र उर्फ लीलू को गिरफ्तार किया है। आरोपी जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र के शिवपुरा गांव का निवासी है।
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसने पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं। इसके अलावा लूटे गए गहनों और नकदी की बरामदगी के लिए भी कार्रवाई जारी है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि वारदात में आरोपी अकेला शामिल था या किसी अन्य व्यक्ति ने भी उसकी मदद की थी।
बुजुर्गों को निशाना बनाने की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय
हाल के वर्षों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों को निशाना बनाकर चोरी और लूट की घटनाओं में कई स्थानों पर बढ़ोतरी देखी गई है। अपराधी अक्सर खुद को ग्राहक, किरायेदार, बिजली कर्मचारी, सर्वे एजेंट या अन्य परिचित व्यक्ति बताकर घर में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ नागरिकों को अजनबियों पर तुरंत भरोसा करने से बचना चाहिए और किसी भी अपरिचित व्यक्ति को घर के अंदर ले जाने से पहले परिवार के अन्य सदस्यों या पड़ोसियों को जानकारी देनी चाहिए।
तकनीक आधारित पुलिसिंग की सफलता
इस मामले में पुलिस की जांच आधुनिक तकनीक और पारंपरिक खुफिया तंत्र के संयोजन का उदाहरण बनकर सामने आई है। सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण, साइबर तकनीक और स्थानीय सूचना नेटवर्क के प्रभावी उपयोग से पुलिस ने कम समय में आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ते सीसीटीवी नेटवर्क और डिजिटल जांच प्रणाली के कारण अब अपराधियों के लिए पहचान छिपाना पहले की तुलना में अधिक कठिन होता जा रहा है।
जांच जारी, लूट का सामान बरामद करने का प्रयास
पुलिस फिलहाल आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर रही है और लूटे गए गहनों तथा नकदी की बरामदगी के लिए विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड, उसके संभावित सहयोगियों और इस तरह की अन्य घटनाओं में उसकी संलिप्तता की भी जांच की जाएगी।
यह मामला एक ओर जहां वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता को रेखांकित करता है, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखाता है कि आधुनिक तकनीक और सुनियोजित पुलिस जांच के माध्यम से गंभीर अपराधों का शीघ्र खुलासा किया जा सकता है।









