जर्मनी के University of Würzburg के शोधकर्ताओं ने एक नया AI टूल विकसित किया है, जो कीलाकार लिपि (cuneiform script) में लिखी गई प्राचीन मिट्टी की गोलियों को पढ़ने और समझने के तरीके को बदल सकता है।
World News: जर्मनी के वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से प्राचीन इतिहास की एक बड़ी पहेली सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। टीम ने एक उन्नत AI टूल विकसित किया है, जो लगभग 3500 साल पुरानी हित्ती सभ्यता की कीलाकार (Cuneiform) लिपि को पढ़ने और विश्लेषण करने में सक्षम है। इस तकनीक के जरिए प्राचीन अनातोलिया क्षेत्र की सभ्यता से जुड़े कई भूले-बिसरे रहस्यों के उजागर होने की उम्मीद बढ़ गई है।
AI टूल ‘Paleographicum’ से खुल रहे प्राचीन ग्रंथों के राज
शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस सिस्टम का नाम ‘पैलियोग्राफिकम (Paleographicum)’ रखा गया है। यह एक अत्याधुनिक पैटर्न-रिकग्निशन तकनीक पर आधारित AI टूल है, जो हजारों साल पुरानी मिट्टी की गोलियों पर उकेरी गई क्यूनिफॉर्म लिपि का विश्लेषण कर सकता है। यह तकनीक न केवल अक्षरों को पहचानती है, बल्कि विभिन्न लेखकों द्वारा इस्तेमाल की गई लेखन शैली और सूक्ष्म अंतर को भी समझने में सक्षम है।
वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय के अनुसार, यह AI सिस्टम लगभग 70,000 डिजिटाइज्ड तस्वीरों का विश्लेषण कर रहा है, जिनमें 50 लाख से अधिक क्यूनिफॉर्म अक्षर शामिल हैं। यह तकनीक समान या मिलते-जुलते अक्षरों और लेखन संरचनाओं को तुरंत पहचान लेती है, जिससे शोध प्रक्रिया बेहद तेज हो गई है। पहले जिस काम में शोधकर्ताओं को कई दिनों या हफ्तों का समय लगता था, अब वही काम कुछ ही मिनटों में पूरा किया जा सकता है।
तीन दिन का काम अब सिर्फ पांच मिनट में
प्रोफेसर डैनियल श्वमर, जो वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय में प्राचीन निकट पूर्वी अध्ययन विभाग के प्रमुख हैं, ने इस तकनीक को एक “क्रांतिकारी बदलाव” बताया है। उनके अनुसार, पहले केवल कुछ मिट्टी की गोलियों की तुलना करने में तीन दिन लगते थे, लेकिन अब AI की मदद से यह काम लगभग पांच मिनट में हो जाता है। उनका कहना है कि यह तकनीक शोधकर्ताओं के हजारों घंटे बचा रही है और ऐतिहासिक शोध को नई गति दे रही है।
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हित्ती सभ्यता और उसकी रहस्यमयी लिपि
हित्ती सभ्यता लगभग 1600 ईसा पूर्व में आज के आधुनिक तुर्की (अनातोलिया) क्षेत्र में विकसित हुई थी। इस सभ्यता ने मिट्टी की गोलियों पर कीलाकार लिपि में विशाल मात्रा में रिकॉर्ड छोड़ा है। समय के साथ इनमें से कई ग्रंथ टूट गए और दुनिया भर के संग्रहालयों में बिखर गए। इन टुकड़ों को जोड़ना और उनका सही अर्थ समझना हमेशा से इतिहासकारों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है।
क्यूनिफॉर्म लिपि में लगभग 375 अलग-अलग चिन्ह होते हैं, और प्रत्येक लेखक की अपनी अलग शैली होती थी, जिससे इन ग्रंथों को समझना और भी कठिन हो जाता था।
AI कैसे बदल रहा है इतिहास की पढ़ाई का तरीका
शोध के अनुसार, इस परियोजना में हर लेखक की अलग-अलग लेखन शैली—जैसे अक्षरों का दबाव, दूरी और स्वरूप—को समझना महत्वपूर्ण है। कुछ लेखक अधिक गहराई से दबाकर लिखते थे, जिससे अक्षर मोटे और अलग दिखते थे, जबकि कुछ हल्के और साफ लिखते थे। AI इन सूक्ष्म अंतरों को पहचानकर टूटे हुए ग्रंथों को जोड़ने में मदद कर रहा है।
यह परियोजना जर्मनी के टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ डॉर्टमुंड के सहयोग से विकसित की गई है और यह DFG-फंडेड CuKa (Computer-Assisted Cuneiform Analysis) परियोजना का हिस्सा है।









