JSSC CGL नियुक्ति को हाई कोर्ट ने माना सही, SIT जांच जारी रखने के दिए थे निर्देश

JSSC CGL मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया पर लगी रोक हटाई थी। कोर्ट ने SIT जांच जारी रखने और सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति के निर्देश दिए थे।

रांची में JSSC CGL नियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच झारखंड हाई कोर्ट के पुराने आदेश की चर्चा है। कोर्ट ने दिसंबर 2025 में नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक हटाकर SIT जांच जारी रखने और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का निर्देश दिया था।

रांची: JPSC की 14वीं सिविल सेवा नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद के बीच JSSC CGL भर्ती में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी सामने आया है। हालांकि, इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट करीब एक साल की सुनवाई के बाद दिसंबर 2025 में याचिकाकर्ताओं की प्रमुख मांगें खारिज कर चुका है। कोर्ट ने SIT जांच जारी रखने और सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ किया था।

JSSC CGL नियुक्ति पर हाई कोर्ट का पुराना आदेश फिर चर्चा में

झारखंड में JPSC की 14वीं सिविल सेवा नियुक्ति को लेकर छात्र आंदोलन के बीच JSSC CGL परीक्षा और नियुक्ति में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया जा रहा है। CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग आंदोलन से जुड़े प्रमुख मुद्दों में शामिल हो गई है। हालांकि, इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट पहले ही विस्तृत सुनवाई कर अपना फैसला सुना चुका है।

JSSC CGL नियुक्ति से जुड़े मामले में हाई कोर्ट में करीब एक साल तक सुनवाई चली थी। तीन दिसंबर 2025 को खंडपीठ ने मामले में अपना महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाई गई तीन प्रमुख मांगों को स्वीकार नहीं किया और SIT जांच को आगे जारी रखने का निर्देश दिया।

CBI जांच और Result पर रोक की मांग हुई थी

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराने की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने जांच की निगरानी हाई कोर्ट से कराने और JSSC CGL के परिणाम पर रोक लगाए रखने की भी मांग रखी थी।

हाई कोर्ट ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है कि SIT मामले की उचित तरीके से जांच नहीं कर रही है। इसी वजह से कोर्ट ने SIT जांच को जारी रखना उचित माना।

अदालत ने जांच एजेंसी को निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी करने का निर्देश भी दिया था। आदेश के अनुसार, SIT को छह महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करने को कहा गया था।

Result पर लगी रोक हटाकर नियुक्ति का रास्ता साफ

सुनवाई के दौरान JSSC CGL के परिणाम को लेकर पहले लगाई गई रोक भी महत्वपूर्ण मुद्दा रही। हाई कोर्ट ने बाद में परिणाम पर लगी रोक हटा दी और सरकार को सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।

कोर्ट के आदेश के बाद JSSC CGL में चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई। इस तरह अदालत के आदेश के बाद सफल उम्मीदवारों के लिए नियुक्ति का रास्ता स्पष्ट हुआ और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ी।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में जांच के दौरान सामने आने वाली अनियमितताओं को लेकर भी सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि गलत प्रक्रिया में शामिल पाए गए 10 अभ्यर्थियों के अलावा यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

SIT जांच का परिणाम रहेगा महत्वपूर्ण

JSSC CGL मामले में हाई कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने के बजाय SIT जांच जारी रखने का रास्ता अपनाया था। इसलिए आगे की जांच में सामने आने वाले तथ्यों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

वर्तमान में JPSC की 14वीं सिविल सेवा नियुक्ति को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। इसी बीच JSSC CGL को लेकर भी सवाल उठने से पुराने हाई कोर्ट आदेश की चर्चा तेज हुई है। हालांकि, CGL मामले में अदालत पहले ही CBI जांच, कोर्ट की निगरानी में जांच और परिणाम पर रोक जैसी मांगों को खारिज कर चुकी है।

अब इस पूरे मामले में SIT की जांच और उसके निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। यदि जांच के दौरान किसी अन्य अभ्यर्थी या संबंधित व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो हाई कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुसार सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

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