June Strawberry Moon 2026 जल्द ही रात के आसमान में दिखाई देगा। यह पूर्णिमा अपने बेहद नीचे दिखाई देने वाले रास्ते के कारण खास मानी जाती है। भारत में इसे साफ मौसम और खुले क्षितिज से आसानी से देखा जा सकेगा।
Tech: June Strawberry Moon 2026 इस महीने का सबसे खास खगोलीय नजारा बनने जा रहा है। यह पूर्णिमा उत्तरी गोलार्ध में सामान्य दिनों की तुलना में क्षितिज के काफी करीब दिखाई देगी। खगोल प्रेमियों के लिए यह चंद्रमा अपनी अनोखी स्थिति और आकर्षक दृश्य के कारण विशेष महत्व रखता है।
क्या है Strawberry Moon?
जून महीने की पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से Strawberry Moon कहा जाता है। नाम सुनकर ऐसा लग सकता है कि चंद्रमा का रंग गुलाबी या लाल दिखाई देगा, लेकिन ऐसा नहीं होता। इस नाम का संबंध चंद्रमा के रंग से नहीं बल्कि उत्तरी अमेरिका की मूल निवासी जनजातियों (Native American Tribes) द्वारा जून में शुरू होने वाले स्ट्रॉबेरी की फसल के मौसम से है। इसी वजह से जून की पूर्णिमा को Strawberry Moon कहा जाने लगा।
![]()
हर साल जून की पूर्णिमा इसी नाम से जानी जाती है और यह दुनियाभर के खगोल प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र होती है।
इस बार क्यों रहेगा खास?
June Strawberry Moon 2026 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उत्तरी गोलार्ध में सामान्य पूर्णिमा की तुलना में काफी नीचे दिखाई देगा। चंद्रमा दक्षिण-पूर्व दिशा से उदय होगा और पूरी रात क्षितिज के काफी करीब अपनी यात्रा करेगा। इसके कारण यह सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक बड़ा और चमकीला दिखाई दे सकता है। इसे अक्सर "Moon Illusion" कहा जाता है, जिसमें क्षितिज के पास मौजूद चंद्रमा आकार में बड़ा महसूस होता है, हालांकि उसका वास्तविक आकार नहीं बदलता।
सर्दियों में दिखाई देने वाली पूर्णिमा जहां आसमान में काफी ऊंचाई तक पहुंचती है, वहीं जून की पूर्णिमा अपेक्षाकृत नीचे रहती है। यही वजह है कि इस खगोलीय घटना को देखने का अनुभव अलग और खास माना जाता है।
भारत में कब और कैसे देखें?
भारत में Strawberry Moon को सूर्यास्त के बाद पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में खुले आसमान से आसानी से देखा जा सकता है। शहरों की तेज रोशनी से दूर किसी खुले मैदान, छत या ऊंची जगह से इसका दृश्य अधिक स्पष्ट मिलेगा।
इस खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी टेलीस्कोप या विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती। साफ मौसम होने पर इसे सामान्य आंखों से देखा जा सकता है। हालांकि दूरबीन (Binoculars) का उपयोग करने पर चंद्रमा की सतह के गड्ढे और अन्य विशेषताएं अधिक स्पष्ट दिखाई देंगी।
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, पूर्णिमा के उदय के शुरुआती एक से दो घंटे इस नजारे का आनंद लेने का सबसे अच्छा समय माना जाता है, क्योंकि उस दौरान चंद्रमा क्षितिज के सबसे करीब होता है और उसका दृश्य सबसे आकर्षक नजर आता है।









