लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जो शायद कभी नहीं भर पाएगा। हादसे में जान गंवाने वाले युवाओं में कानपुर का एक होनहार युवक भी शामिल था। जब उसका शव घर पहुंचा तो पूरे मोहल्ले में सन्नाटा छा गया। बेटे की लाश देखते ही मां का दर्द फूट पड़ा। वह शव से लिपटकर रोती रहीं और बार-बार यही कहती रहीं, "बेटा, तू इस तरह से लौटेगा, मुझे अंदाजा नहीं था।" वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
यह परिवार पहले से ही एक बड़ी त्रासदी झेल चुका था। करीब तीन साल पहले युवक के पिता की भी आग की एक दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई थी। उस समय परिवार पूरी तरह टूट गया था, लेकिन बेटे ने हिम्मत नहीं हारी। उसने पिता की कमी को पूरा करने की कोशिश की और परिवार की जिम्मेदारियां अपने कंधों पर उठा लीं। मां को भरोसा था कि बेटा ही अब उनके जीवन का सहारा बनेगा, लेकिन किस्मत ने एक बार फिर ऐसा वार किया कि पूरा परिवार बिखर गया।
परिजनों के मुताबिक युवक बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा था और कुछ बड़ा करने का सपना देखता था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने एनीमेशन और डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। नौकरी मिलने के बाद घर की आर्थिक स्थिति भी बेहतर होने लगी थी। मां अक्सर रिश्तेदारों से कहती थीं कि बेटा उनकी सबसे बड़ी ताकत है। परिवार को उम्मीद थी कि आने वाले वर्षों में उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाएगी।
हादसे वाले दिन भी युवक रोज की तरह काम पर गया था। घर से निकलते समय उसने मां से कहा था कि शाम तक लौट आएगा। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उसकी आखिरी विदाई होगी। दोपहर बाद आग लगने की खबर आई तो परिवार के लोगों ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जैसे-जैसे हादसे की गंभीरता सामने आती गई, परिवार की बेचैनी बढ़ती गई।
जब प्रशासन ने मृतकों की सूची जारी की और उसमें युवक का नाम सामने आया तो घर में कोहराम मच गया। मां बेसुध हो गईं। रिश्तेदारों ने किसी तरह उन्हें संभाला, लेकिन उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। परिवार के सदस्य तुरंत लखनऊ पहुंचे और अस्पताल में शव की पहचान की। उस क्षण को याद कर परिजन आज भी सिहर उठते हैं।
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि युवक बेहद मिलनसार और मेहनती था। वह हमेशा अपने परिवार की खुशियों के बारे में सोचता था। पड़ोसियों के अनुसार पिता की मौत के बाद उसने कभी हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करता रहा। उसकी कमाई से ही घर का खर्च चलता था। परिवार उसकी शादी की भी योजना बना रहा था और मां को उम्मीद थी कि जल्द ही घर में बहू आएगी। लेकिन अब उन्हीं सपनों की जगह मातम ने ले ली है।
शव जब कानपुर स्थित उसके घर पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मां का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल था। वह बेटे के चेहरे को बार-बार देखतीं और रोते हुए कहतीं कि भगवान ने उनसे सब कुछ छीन लिया। पहले पति और अब बेटे की मौत ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया है।
अंतिम यात्रा के दौरान पूरे इलाके में शोक का माहौल था। सैकड़ों लोग युवक को अंतिम विदाई देने पहुंचे। कई लोगों ने कहा कि इतना जिम्मेदार और मेहनती लड़का बहुत कम देखने को मिलता है। उसकी असमय मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।
लखनऊ अग्निकांड की यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि उन अनगिनत सपनों की कहानी है जो कुछ ही मिनटों में राख हो गए। जिस मां ने तीन साल पहले अपने पति को आग में खोया था, आज उसी मां को अपने जवान बेटे को भी खोना पड़ा। परिवार के लिए यह दर्द ऐसा है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी। बेटे की अंतिम विदाई के समय मां की चीखें और आंसू वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गए। यह दृश्य उन लोगों के दिलों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया, जिन्होंने उस दर्द को अपनी आंखों से देखा।










