कद्दू का हलवा सुनहरे रंग की एक रसीली मिठाई है, जो पके हुए पीले कद्दू से बनाई जाती है। बहुत से लोग कद्दू की सब्जी पसंद नहीं करते, लेकिन इसका हलवा इतना लाजवाब होता है कि पहचानना मुश्किल हो जाता है कि यह कद्दू से बना है। यह स्वाद में गाजर के हलवे जैसा ही समृद्ध होता है, लेकिन इसकी बनावट अधिक मलाईदार होती है।
सामग्री
- पीला कद्दू: 500 ग्राम (छिला और कद्दूकस किया हुआ)
- चीनी: ½ कप (स्वादअनुसार)
- शुद्ध घी: 3-4 बड़े चम्मच
- दूध: 1 कप (फुल क्रीम)
- मावा (खोया): ½ कप
- इलायची पाउडर: ½ छोटा चम्मच
- मेवे: बादाम, काजू और किशमिश (कटे हुए)
बनाने का तरीका
- कद्दू भूनना: एक कढ़ाई में घी गर्म करें और कद्दूकस किया हुआ कद्दू डालें। इसे मध्यम आंच पर 5-7 मिनट तक भूनें जब तक कि इसका कच्चापन निकल न जाए।
- दूध में पकाना: अब इसमें दूध डालें और ढककर धीमी आंच पर पकाएं जब तक कद्दू पूरी तरह नरम न हो जाए और दूध सूख न जाए।
- चीनी मिलाना: जब मिश्रण गाढ़ा हो जाए, तब इसमें चीनी डालें। चीनी पानी छोड़ेगी, इसे लगातार चलाते हुए तब तक पकाएं जब तक हलवा दोबारा गाढ़ा न हो जाए।
- मावा और मेवे: अब इसमें मावा (यदि इस्तेमाल कर रहे हैं), इलायची पाउडर और तले हुए मेवे डालें।
- फिनिशिंग: जब हलवा कढ़ाई के किनारे छोड़ने लगे और घी अलग होने लगे, तो आंच बंद कर दें।
परोसने के तरीके
- गरमा-गरम: कद्दू के हलवे का असली स्वाद इसे गरमा-गरम परोसने में ही आता है।
- गार्निश: परोसते समय ऊपर से थोड़े और कटे हुए मेवे और केसर के धागे डालें।
खाने के फायदे
कद्दू का हलवा विटामिन और खनिजों का खजाना है। इसमें मौजूद विटामिन A और बीटा-कैरोटीन आंखों की रोशनी के लिए बहुत फायदेमंद हैं और त्वचा में चमक लाते हैं। चूंकि इसमें फाइबर भरपूर होता है, इसलिए यह अन्य भारी मिठाइयों की तुलना में पाचन के लिए बेहतर है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है और इसमें मौजूद सूखे मेवे व घी शरीर को सर्दियों में आवश्यक गर्माहट और ऊर्जा प्रदान करते हैं।











