केरल के त्रिपुनिथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज में ABVP ने छात्रसंघ की 12 सामान्य सीटों पर निर्विरोध जीत का दावा कया है। लंबे समय तक SFI के प्रभाव वाले इस कॉलेज में पिछले साल भी ABVP ने बहुमत हासिल किया था।
कोच्चि: केरल के त्रिपुनिथुरा स्थित गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने सभी 12 सामान्य सीटों पर निर्विरोध जीत का दावा किया है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसी अन्य छात्र संगठन के उम्मीदवार मैदान में नहीं थे। यह कॉलेज लंबे समय तक स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के प्रभाव वाला परिसर माना जाता रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक आधिकारिक परिणाम की औपचारिक घोषणा अभी बाकी थी।
त्रिपुनिथुरा में ABVP का दावा
कोच्चि जिले के त्रिपुनिथुरा स्थित गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव को लेकर इस बार ABVP ने सभी 12 सामान्य सीटों पर जीत का दावा किया है। रिपोर्टों के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया 18 सितंबर को समाप्त हुई और इस दौरान अन्य छात्र संगठनों की ओर से उम्मीदवार नहीं उतारे गए।
इसी आधार पर ABVP ने सभी 12 सीटों पर निर्विरोध जीत का दावा किया। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि कुछ रिपोर्टों में इसे जीत के रूप में बताया गया है, जबकि Times of India की रिपोर्ट में कहा गया है कि औपचारिक परिणाम की घोषणा अभी बाकी थी।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस कॉलेज में SFI का छात्रसंघ पर लंबे समय तक प्रभाव रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, SFI करीब तीन से चार दशकों तक कॉलेज यूनियन को नियंत्रित करती रही।
SFI के लंबे प्रभाव वाले कैंपस में बदलाव
गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज, त्रिपुनिथुरा को लंबे समय से वामपंथी छात्र संगठन SFI के प्रभाव वाले कॉलेज के तौर पर देखा जाता रहा है। Times of India के मुताबिक SFI ने इस परिसर में तीन दशक से अधिक समय तक छात्रसंघ पर नियंत्रण बनाए रखा था। एक अन्य रिपोर्ट में यह अवधि करीब 36 साल बताई गई है।
हालांकि, पिछले साल से कॉलेज की छात्र राजनीति में बदलाव दिखाई देने लगा। ABVP ने पिछले छात्रसंघ चुनाव में SFI उम्मीदवारों को हराकर बहुमत हासिल किया था। इस बार संगठन ने सभी 12 सामान्य सीटों पर निर्विरोध जीत का दावा किया है।
इस तरह पिछले चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद ABVP की स्थिति इस साल और मजबूत हुई है।
इस बार चुनाव में क्यों नहीं उतरे दूसरे संगठन?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस साल कॉलेज में अन्य छात्र संगठनों के उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल नहीं किया। ABVP केरल के राज्य सचिव यदु कृष्णन ने इसे संगठन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
उनके अनुसार, कॉलेज में SFI का लंबे समय तक प्रभाव रहा, लेकिन इस बार नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने तक SFI की ओर से उम्मीदवार नहीं उतारे गए।
हालांकि, SFI की ओर से इस घटनाक्रम की एक अलग व्याख्या सामने आई है। SFI एर्नाकुलम जिला सचिव आशीष एस आनंद ने कॉलेज में छात्रों की संख्या में गिरावट को इसका एक कारण बताया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद संस्थान में नामांकन घटा है और कॉलेज में अब 100 से कम छात्र हैं। उनके मुताबिक संस्थान बंद होने की स्थिति का भी सामना कर रहा है।
इसलिए ABVP की संगठनात्मक बढ़त और कॉलेज में घटते छात्र नामांकन—दोनों पहलुओं को इस चुनाव के संदर्भ में अलग-अलग समझना जरूरी है।
ABVP ने क्या कहा?
ABVP ने त्रिपुनिथुरा कॉलेज में अपने प्रदर्शन को संगठन के विस्तार से जोड़कर देखा है। संगठन की ओर से कहा गया कि पिछले साल बहुमत हासिल करने के बाद इस बार सभी 12 सामान्य सीटों पर जीत उसके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
ABVP केरल के राज्य सचिव यदु कृष्णन ने इस परिणाम को संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया। संगठन ने यह भी कहा कि लगातार दो चुनावों में बेहतर प्रदर्शन उसके लंबे समय के कैंपस कार्य का परिणाम है।
हालांकि, ABVP के इन राजनीतिक और संगठनात्मक दावों को संगठन के अपने बयान के रूप में देखना चाहिए।
SFI ने दी अलग वजह
SFI की ओर से कॉलेज में चुनावी स्थिति को छात्र संख्या में गिरावट से जोड़ा गया है। SFI एर्नाकुलम जिला सचिव आशीष एस आनंद के अनुसार, कोविड-19 के बाद कॉलेज में दाखिले में कमी आई और इसका असर छात्र राजनीति पर भी पड़ा।
उन्होंने कहा कि SFI ने 36 वर्षों तक कॉलेज यूनियन का नेतृत्व किया था, लेकिन 2020 के बाद छात्रों की संख्या कम होने लगी। उनका आरोप है कि ABVP ने इसी परिस्थिति का इस्तेमाल परिसर में अपना आधार मजबूत करने के लिए किया।
इस बयान के आधार पर यह स्पष्ट है कि दोनों संगठनों की ओर से इस घटनाक्रम की अलग-अलग व्याख्या की जा रही है।
त्रिपुनिथुरा में स्थानीय राजनीति का भी संदर्भ
कॉलेज चुनाव ऐसे समय में हुआ है जब त्रिपुनिथुरा की स्थानीय राजनीति में भी बदलाव देखने को मिला है। 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद BJP त्रिपुनिथुरा नगरपालिका में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 53 सदस्यीय नगरपालिका परिषद में BJP के 21 सदस्य, LDF के 20 और UDF के 12 सदस्य थे। इसके बाद BJP ने नगरपालिका के चेयरपर्सन और वाइस चेयरपर्सन पद भी हासिल किए।
हालांकि, नगरपालिका चुनाव और कॉलेज छात्रसंघ चुनाव अलग-अलग चुनाव हैं। कॉलेज में ABVP की स्थिति को सीधे पूरे त्रिपुनिथुरा या केरल के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का संकेत मानना उचित नहीं होगा।
DUSU चुनाव में भी ABVP का प्रदर्शन
त्रिपुनिथुरा की घटना से कुछ दिन पहले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में भी ABVP ने तीन केंद्रीय पदों पर जीत दर्ज की थी।
2026 के DUSU चुनाव में ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद जीते। ABVP के यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्मण राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन विजयी हुए।
यश डबास ने NSUI के विजय शंकर मीणा को हराया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार डबास को 24,576 वोट मिले, जबकि मीणा को 22,523 वोट मिले।
इस चुनाव में ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पद जीते, जबकि एक पद निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया।
केरल और दिल्ली के परिणामों को एक साथ कैसे देखें?
दिल्ली और केरल के छात्रसंघ चुनावों में ABVP के प्रदर्शन ने राष्ट्रीय स्तर पर छात्र राजनीति को लेकर चर्चा बढ़ाई है। हालांकि, दोनों परिसरों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं।
दिल्ली में DUSU के चार केंद्रीय पदों के लिए प्रतिस्पर्धी चुनाव हुआ, जिसमें ABVP ने तीन पद जीते। इसके विपरीत, त्रिपुनिथुरा के गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज में इस साल अन्य छात्र संगठनों के उम्मीदवारों के नामांकन नहीं करने के कारण ABVP ने सभी 12 सामान्य सीटों पर निर्विरोध जीत का दावा किया। इस अंतर को ध्यान में रखते हुए दोनों परिणामों की तुलना करते समय चुनावी प्रक्रिया और स्थानीय परिस्थितियों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
आधिकारिक परिणाम और आगे की तस्वीर
त्रिपुनिथुरा कॉलेज में ABVP के सभी 12 सामान्य सीटों पर निर्विरोध जीत के दावे के बावजूद उपलब्ध रिपोर्टों में आधिकारिक परिणाम की घोषणा की स्थिति को लेकर सावधानी बरती गई है। नामांकन प्रक्रिया 18 सितंबर को समाप्त हो चुकी थी और अन्य संगठनों के उम्मीदवार मैदान में नहीं थे। कॉलेज महात्मा गांधी विश्वविद्यालय (MGU), कोट्टायम से संबद्ध है। विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव 29 सितंबर को निर्धारित हैं।
त्रिपुनिथुरा कॉलेज का घटनाक्रम इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि एक ऐसे परिसर में, जहां SFI का लंबे समय तक प्रभाव रहा, ABVP ने पिछले साल बहुमत हासिल करने के बाद इस बार सभी 12 सामान्य सीटों पर निर्विरोध जीत का दावा किया है। SFI ने इस बदलाव को छात्र संख्या में गिरावट से जोड़कर अपनी प्रतिक्रिया दी है। अब कॉलेज के आधिकारिक चुनाव परिणाम और आगे की छात्र राजनीतिक गतिविधियां इस बदलाव की तस्वीर को और स्पष्ट करेंगी।












