झारखंड के लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र में इंसान और जंगली हाथियों के बीच बढ़ते संघर्ष की एक गंभीर घटना सामने आई है। फसल और घर को हाथियों से बचाने के लिए लगाए गए बिजली प्रवाहित तार की चपेट में आने से एक जंगली हाथी की मौत हो गई। घटना बालूमाथ प्रखंड की झाबर पंचायत के कोमर गांव स्थित कुशी टोला पारनदी इलाके की बताई जा रही है। हाथियों के लगातार गांव में पहुंचने और फसल को नुकसान पहुंचाने से ग्रामीण परेशान थे। इसी डर के कारण एक ग्रामीण ने अपने घर और खेत के आसपास बाड़ लगाकर उसमें बिजली का करंट प्रवाहित कर दिया था। इसी बाड़ की चपेट में आने से हाथी की मौके पर ही मौत हो गई। वन विभाग की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि घटना से करीब पांच दिन पहले इसी इलाके में जंगली हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया था। कोमर गांव के कुशी टोला पारनदी निवासी बिफा उरांव के घर में हाथी घुस आया था। उस समय बिफा उरांव अपनी पत्नी और बच्चे के साथ घर में सो रहे थे। रात में अचानक हाथी के घर के पास पहुंचने और नुकसान पहुंचाने की आवाज सुनकर परिवार के लोगों में दहशत फैल गई। किसी तरह परिवार के सदस्य घर से बाहर निकले और अपनी जान बचाई। इसके बाद हाथी ने घर के एक हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया और घर के अंदर रखा अनाज भी खा गया।
घर को नुकसान पहुंचाने के बाद हाथियों ने आसपास के खेतों का भी रुख किया। बिफा उरांव के घर के पास लगी मक्का की फसल को हाथियों ने रौंद दिया और काफी फसल बर्बाद हो गई। ग्रामीणों के लिए यह केवल फसल का नुकसान नहीं था, बल्कि परिवार की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा खतरा बन गया था। हाथियों के दोबारा गांव में आने की आशंका के कारण परिवार और आसपास के लोग काफी डरे हुए थे। इसी परिस्थिति में ग्रामीण ने अपने घर और फसल की सुरक्षा के लिए घर के तीन तरफ बाड़ लगा दी। बाद में इस बाड़ में बिजली का करंट प्रवाहित कर दिया गया।
इसी दौरान हाथियों का झुंड दोबारा गांव की ओर पहुंच गया। रविवार रात इलाके में करीब 15 हाथियों के झुंड के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। वन विभाग के ट्रैकर और दूसरे कर्मचारी रात करीब दो बजे तक हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे और उन्हें गांव से दूर रखने की कोशिश कर रहे थे। कुछ समय के लिए हाथियों को गांव से दूर भगाने में सफलता भी मिली, लेकिन बाद में झुंड फिर गांव की तरफ लौट आया। हाथियों के इसी दोबारा लौटने के दौरान एक हाथी ग्रामीण के मकई के खेत की ओर पहुंच गया और पहले से लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट लगने से हाथी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
हाथी की मौत की जानकारी सुबह इलाके में तेजी से फैल गई। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। मौके पर मृत हाथी को देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई। घटना की सूचना वन विभाग और पुलिस को दी गई, जिसके बाद संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। वन विभाग ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और बिजली प्रवाहित तार लगाए जाने समेत घटना के दूसरे पहलुओं की जांच शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि हाथी की मौत के वास्तविक कारण और पूरे घटनाक्रम की स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी।
वन समिति के अध्यक्ष सुनील उरांव के अनुसार, खेत में इस तरह खतरनाक तरीके से बिजली का तार लगाने को लेकर पहले भी ग्रामीणों को मना किया गया था। उनका कहना है कि बिजली प्रवाहित तार के कारण ही हाथी की जान गई। घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि जंगली हाथियों से फसल बचाने के लिए ग्रामीणों द्वारा अपनाए जा रहे ऐसे उपाय कितने खतरनाक हो सकते हैं। खेतों के चारों ओर करंट प्रवाहित तार लगाने से केवल वन्यजीवों को ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों और मवेशियों को भी गंभीर खतरा हो सकता है।
घटना के समय इलाके में हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही थी। बताया गया है कि अगर वनकर्मी हाथियों को भगाने के लिए उस समय मौके पर पहुंचते तो वे भी बिजली प्रवाहित तार की चपेट में आ सकते थे। इस वजह से घटना ने वन विभाग के सामने भी सुरक्षा को लेकर चुनौती खड़ी कर दी है। जंगली हाथियों को गांव से दूर रखने के दौरान अगर खेतों और घरों के आसपास इस तरह करंट वाले तार लगाए गए हों तो वनकर्मियों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है।
वन विभाग के रेंजर नंद कुमार मेहता ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की गई है। हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल की जांच के बाद ही मौत से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी। इसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल वन विभाग यह भी पता लगा रहा है कि बिजली का तार किस तरह लगाया गया था और उसमें करंट कहां से प्रवाहित किया जा रहा था।
बालूमाथ और आसपास का इलाका जंगली हाथियों के विचरण के लिए जाना जाता है। यहां समय-समय पर हाथियों के झुंड जंगल से निकलकर गांवों और खेतों तक पहुंच जाते हैं। हाथियों के गांव में आने के बाद कई बार फसल को नुकसान पहुंचने के साथ घरों को भी क्षति होती है। अगस्त के अंत में भी बालूमाथ वन क्षेत्र के धाधू गांव में जंगली हाथियों के झुंड द्वारा दो घरों को नुकसान पहुंचाने और कई एकड़ कृषि भूमि की फसल बर्बाद करने की खबर सामने आई थी। ऐसे मामलों के कारण ग्रामीणों में हाथियों को लेकर लगातार डर बना रहता है।
ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक तरफ जंगली हाथियों से अपनी जान और फसल बचाने की चिंता रहती है, वहीं दूसरी तरफ हाथियों को रोकने के लिए अपनाए जाने वाले असुरक्षित तरीकों से गंभीर हादसे हो सकते हैं। इस घटना में भी घर और मक्का की फसल को पहले हाथियों से नुकसान पहुंचा था। इसके बाद परिवार ने दोबारा हाथियों के आने के डर से बिजली प्रवाहित बाड़ का सहारा लिया और अंत में उसी बाड़ की चपेट में एक हाथी की जान चली गई। घटना ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को सामने ला दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के लगातार गांवों की ओर आने से उन्हें अपने घर, बच्चों और फसलों की सुरक्षा की चिंता रहती है। उनका मानना है कि वन विभाग को हाथियों की गतिविधियों की लगातार निगरानी के साथ-साथ गांवों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित तरीके से हाथियों को दूर रखने के उपायों की जानकारी भी देनी चाहिए। अगर समय रहते प्रभावी व्यवस्था हो तो ग्रामीणों को अपनी तरफ से जोखिम भरे उपाय करने की जरूरत कम हो सकती है।
फिलहाल मृत हाथी के पोस्टमार्टम और वन विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिजली प्रवाहित बाड़ किस तरह लगाई गई थी और घटना के संबंध में किस पर क्या कार्रवाई होगी। वन विभाग की टीम हाथियों के झुंड की गतिविधियों पर भी नजर रख रही है, क्योंकि इलाके में अन्य हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों के सामने अभी भी खतरा बना हुआ है। घटना के बाद आसपास के गांवों में भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
लातेहार की यह घटना केवल एक जंगली हाथी की मौत का मामला नहीं है, बल्कि इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की गंभीर तस्वीर भी सामने रखती है। ग्रामीण अपनी फसल और घर बचाने के लिए परेशान हैं, वहीं हाथियों के प्राकृतिक विचरण क्षेत्र सिकुड़ने और गांवों के आसपास उनकी आवाजाही बढ़ने से टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं। इस स्थिति में बिजली प्रवाहित तार जैसे जानलेवा उपाय किसी भी समय इंसान, मवेशी या दूसरे वन्यजीव के लिए भी घातक साबित हो सकते हैं। इसलिए ग्रामीणों की सुरक्षा और हाथियों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से प्रभावी और सुरक्षित व्यवस्था की जरूरत है।









