महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने शनिवार को कहा कि वह चाहती हैं कि उनके पति महाराष्ट्र में ही रहें। यह टिप्पणी भाजपा के दिग्गज नेता की भविष्य की भूमिका को लेकर चल रही अटकलों के बीच आई है।
मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर जारी अटकलों के बीच उनकी पत्नी अमृता फडणवीस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र में ही रहें और उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह अपने पति को राज्य की राजनीति में बनाए रखने की कोशिश करेंगी।
अमृता फडणवीस का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब महाराष्ट्र की राजनीति में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के संभावित केंद्रीय भूमिका में जाने को लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि, भाजपा या केंद्र सरकार की ओर से फडणवीस को केंद्र में भेजे जाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
'मैं महाराष्ट्र में रहना चाहती हूं'

पंढरपुर स्थित भगवान विट्ठल मंदिर में आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पूजा-अर्चना के बाद पत्रकारों से बातचीत में अमृता फडणवीस ने अपने पति की भविष्य की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि वह खुद महाराष्ट्र में रहना चाहती हैं। उन्होंने कहा, 'मैं महाराष्ट्र में रहना चाहती हूं। मैं यह सुनिश्चित करूंगी कि देवेंद्रजी भी महाराष्ट्र में रहें।'
उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अमृता फडणवीस की टिप्पणी को उनके व्यक्तिगत विचार के तौर पर देखा जा रहा है और इससे देवेंद्र फडणवीस की राजनीतिक जिम्मेदारी में किसी संभावित बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती।
फडणवीस के केंद्र जाने की क्यों हो रही चर्चा?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के केंद्र में जाने की अटकलें उस समय तेज हुईं, जब शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने दावा किया कि आने वाले महीनों में यदि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में बदलाव होता है, तो फडणवीस को केंद्र की राजनीति में भेजा जा सकता है। राउत के दावे के अनुसार, ऐसी स्थिति में राज्य में भाजपा का कोई अन्य वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल सकता है। हालांकि, यह दावा फिलहाल राजनीतिक अटकलों तक सीमित है और भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और राज्य की राजनीति में उनका महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। ऐसे में उनकी भूमिका में किसी संभावित बदलाव की चर्चा राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जाती है।











