मणिपुर विधानसभा में गृह मंत्री ने बताया कि 2023 से जारी जातीय हिंसा में 306 लोगों की जान गई है, जबकि 49 लोग अब भी लापता हैं। फरवरी 2025 में राष्ट्रपति शासन लगा था, जिसे 4 फरवरी 2026 को हटाया गया।
इम्फाल: मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बीच राज्य सरकार ने विधानसभा में संघर्ष के मानवीय प्रभाव से जुड़ा आंकड़ा पेश किया है। गृह मंत्री ने विधानसभा सत्र के दूसरे दिन बताया कि हिंसा में अब तक 306 लोगों की मौत हुई है, जबकि 49 लोग अभी भी लापता हैं। लंबे समय से चले आ रहे इस संघर्ष ने राज्य की सुरक्षा, प्रशासन और राजनीतिक व्यवस्था को भी प्रभावित किया है।
3 मई 2023 को शुरू हुआ जातीय संघर्ष
मणिपुर में जातीय हिंसा की शुरुआत 3 मई 2023 को हुई थी। यह संघर्ष पहाड़ी जिलों में आयोजित एक Tribal Solidarity March के बाद शुरू हुआ। यह मार्च मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति यानी Scheduled Tribe (ST) का दर्जा देने की मांग के विरोध में आयोजित किया गया था।
इसके बाद राज्य में हिंसा फैल गई और लंबे समय तक सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। संघर्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई लोग लापता हुए। गृह मंत्री द्वारा विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, हिंसा से संबंधित घटनाओं में 306 लोगों की मौत हुई है, जबकि 49 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
विधानसभा में सामने आया हिंसा का असर
राज्य विधानसभा के जारी सत्र के दूसरे दिन गृह मंत्री ने हिंसा से जुड़े ये आंकड़े सदन के सामने रखे। आंकड़े मणिपुर में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के व्यापक प्रभाव को दर्शाते हैं।
306 मौतों और 49 लोगों के अब भी लापता होने का आंकड़ा इस बात को रेखांकित करता है कि मई 2023 में शुरू हुआ संघर्ष केवल तत्काल हिंसक घटनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।
हिंसा के कारण राज्य में सुरक्षा और प्रशासन से जुड़ी परिस्थितियां भी चुनौतीपूर्ण बनी रहीं। लंबे समय तक जारी अशांति के बीच केंद्र सरकार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा।
फरवरी 2025 में लगा राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में लंबे समय तक जारी अशांति के बीच फरवरी 2025 में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। इसके बाद राज्य का प्रशासन राष्ट्रपति शासन के तहत संचालित हुआ।
राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने का घटनाक्रम मणिपुर में जारी राजनीतिक और सुरक्षा संकट की गंभीरता को दर्शाता था। इससे पहले राज्य में मई 2023 से जातीय संघर्ष लगातार चिंता का विषय बना हुआ था।
4 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति शासन समाप्त
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को 4 फरवरी 2026 को समाप्त कर दिया गया। इसके बाद राज्य में नई सरकार का गठन हुआ और युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
नई सरकार के गठन के साथ मणिपुर में निर्वाचित सरकार की वापसी हुई। यह घटनाक्रम फरवरी 2025 से लागू राष्ट्रपति शासन की समाप्ति के बाद सामने आया।
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युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद राज्य की राजनीतिक व्यवस्था फिर से निर्वाचित सरकार के नियंत्रण में आ गई। हालांकि, विधानसभा में सामने आए 306 मौतों और 49 लोगों के लापता होने के आंकड़े बताते हैं कि हिंसा के मानवीय प्रभाव का मुद्दा अभी भी गंभीर बना हुआ है।
मैतेई समुदाय को ST दर्जे की मांग बना विवाद का केंद्र
मणिपुर में 2023 में शुरू हुए संघर्ष की पृष्ठभूमि में मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग से जुड़ा विवाद भी था। इसी मुद्दे के विरोध में पहाड़ी जिलों में Tribal Solidarity March आयोजित किया गया था।
मार्च के बाद हिंसा भड़क उठी और स्थिति धीरे-धीरे व्यापक जातीय संघर्ष में बदल गई। इसके प्रभाव ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित किया और लंबे समय तक सामान्य स्थिति बहाल करना चुनौती बना रहा।
49 लोगों का अब भी लापता होना चिंता का विषय
विधानसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, हिंसा के दौरान 306 लोगों की मौत हुई, जबकि 49 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों का आंकड़ा संघर्ष के बाद परिवारों के सामने बनी अनिश्चितता को भी दर्शाता है।
किसी व्यक्ति के लापता होने की स्थिति में परिवारों के लिए उसके बारे में जानकारी हासिल करना और उसके ठिकाने का पता लगाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में विधानसभा में सामने आया 49 लापता लोगों का आंकड़ा संघर्ष के मानवीय पहलू को सामने लाता है।
नई सरकार के सामने सामान्य स्थिति बहाल करने की चुनौती
4 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति शासन समाप्त होने के बाद युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। इसके साथ राज्य के सामने लंबे समय से चले आ रहे जातीय तनाव के बाद सामान्य राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति को मजबूत करने की चुनौती भी बनी हुई है।
विधानसभा में हिंसा से संबंधित आंकड़ों का सामने आना ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब राज्य में निर्वाचित सरकार दोबारा काम कर रही है। 306 मौतें और 49 लोगों का लापता होना संघर्ष के दीर्घकालिक प्रभाव की गंभीरता को दर्शाता है।
मणिपुर में 3 मई 2023 से शुरू हुआ जातीय संघर्ष राज्य के हालिया इतिहास की सबसे गंभीर राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों में शामिल रहा है। फरवरी 2025 में राष्ट्रपति शासन और फरवरी 2026 में उसकी समाप्ति के बाद सत्ता में नई सरकार की वापसी हुई है। हालांकि, विधानसभा में प्रस्तुत मानवीय नुकसान के आंकड़े बताते हैं कि संघर्ष का प्रभाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।










