कोई डॉक्टर अपराधी है तो गिरफ्तार क्यों नहीं हो सकता', RG कर मामले में पीड़िता की विधायक मां का सवाल

RG कर मामले में पीड़िता की मां और BJP विधायक रत्ना देबनाथ ने CBI जांच पर सवाल उठाए। पूछा- डॉक्टर अपराधी है तो उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा सकता।
कोई डॉक्टर अपराधी है तो गिरफ्तार क्यों नहीं हो सकता', RG कर मामले में पीड़िता की विधायक मां का सवाल
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कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेप-मर्डर मामले में पीड़िता की मां और पानिहाटी से भाजपा विधायक रत्ना देबनाथ ने एक बार फिर जांच की धीमी गति को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की जांच पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी बेटी को न्याय मिलने की प्रक्रिया अब भी उस गति से आगे नहीं बढ़ रही है, जिसकी उम्मीद परिवार ने की थी। रत्ना देबनाथ ने खास तौर पर इस बात पर सवाल उठाया कि यदि कोई डॉक्टर अपराध में शामिल है तो उसे गिरफ्तार करने में परेशानी क्यों होनी चाहिए। उनका कहना है कि उनकी बेटी भी डॉक्टर थी, इसलिए पेशे को किसी आरोपी के लिए सुरक्षा कवच नहीं बनाया जाना चाहिए।

रत्ना देबनाथ ने बुधवार को बैरकपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आरजी कर मामले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि मामले की जांच और न्याय की प्रक्रिया में तेजी आएगी, लेकिन उन्हें अभी भी ऐसा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। उनके मुताबिक, न्याय प्रक्रिया के कुछ महत्वपूर्ण हिस्से आगे नहीं बढ़ रहे हैं और परिवार लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।

पीड़िता की मां ने कहा कि उन्होंने कभी राजनीति में आने के बारे में नहीं सोचा था। उनका परिवार अपनी बेटी की हत्या के बाद राजनीति में आया। उन्होंने बताया कि बेटी की मौत के बाद परिवार का पूरा ध्यान न्याय हासिल करने पर रहा। उनका कहना है कि आरजी कर अस्पताल में उनकी बेटी के साथ हुई घटना ने बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था और उससे जुड़ी कई गंभीर कमियों को सामने ला दिया।

रत्ना देबनाथ ने CBI की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच एजेंसी की ओर से डॉक्टरों की गिरफ्तारी को लेकर जो तर्क दिया जा रहा है, वह उन्हें स्वीकार नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई व्यक्ति डॉक्टर है लेकिन उसके खिलाफ अपराध में शामिल होने के पर्याप्त आधार हैं, तो केवल उसके डॉक्टर होने के कारण गिरफ्तारी क्यों नहीं की जा सकती। उनका सीधा सवाल था कि अगर डॉक्टर अपराधी है और उनकी बेटी की हत्या में उसकी भूमिका है तो उसे गिरफ्तार करने में क्या दिक्कत है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी भी डॉक्टर थी। ऐसे में पेशे के आधार पर किसी व्यक्ति को विशेष रियायत दिए जाने का सवाल ही नहीं उठना चाहिए। परिवार चाहता है कि मामले में जिन लोगों की भी भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो। रत्ना देबनाथ ने जांच को और प्रभावी बनाने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग दोहराई।

आरजी कर मामले में जांच को लेकर पिछले कुछ समय से अदालत में भी सवाल उठते रहे हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट ने अगस्त में CBI की जांच की प्रगति पर असंतोष जताते हुए एजेंसी को जांच पूरी करने के लिए तीन सप्ताह की समयसीमा दी थी। अदालत ने कहा था कि वह जांच के अंत में मामले में निष्कर्ष तक पहुंचना चाहती है। अगली सुनवाई 24 सितंबर को निर्धारित की गई है।

इससे पहले जून में भी कलकत्ता हाई कोर्ट ने जांच की प्रगति पर असंतोष जताया था। अदालत ने कहा था कि जांच को पहले दिए गए निर्देशों के मुताबिक तार्किक निष्कर्ष तक नहीं पहुंचाया गया है। कोर्ट की टिप्पणियों से भी यह स्पष्ट हुआ कि मामले में जांच की गति को लेकर न्यायिक स्तर पर चिंता बनी हुई है।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज में अगस्त 2024 में एक महिला पीजी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना सामने आई थी। घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया था और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठे थे। मामले की जांच बाद में CBI को सौंपी गई थी।

मामले में मुख्य अपराध के अलावा अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं, घटना के बाद हुई गतिविधियों और पीड़िता के अंतिम संस्कार से जुड़े पहलुओं की भी जांच अलग-अलग स्तर पर हुई है। हाल के महीनों में अंतिम संस्कार से जुड़े आरोपों को लेकर भी पुलिस कार्रवाई हुई है। अगस्त 2026 में पश्चिम बंगाल पुलिस ने पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष को कथित जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराए जाने से जुड़े एक नए FIR के मामले में गिरफ्तार किया था।

इसके बाद सितंबर की शुरुआत में पानिहाटी नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन सोमनाथ डे को भी पुलिस ने बेंगलुरु से गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ भी पीड़िता के अंतिम संस्कार और कथित तौर पर सबूतों को प्रभावित करने से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। इन कार्रवाइयों के बाद आरजी कर मामले की जांच एक बार फिर चर्चा में है।

पीड़िता की मां लगातार इस मामले में सभी संभावित पहलुओं की जांच की मांग करती रही हैं। उनका कहना है कि परिवार को केवल मुख्य आरोपी को सजा मिलने से संतोष नहीं होगा, बल्कि अगर किसी अन्य व्यक्ति की भी अपराध, साक्ष्य छिपाने या मामले को प्रभावित करने में भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

रत्ना देबनाथ के ताजा बयान ऐसे समय में आए हैं जब कलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI को जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने एजेंसी से यह भी जानना चाहा है कि जांच के दौरान किन लोगों की भूमिका सामने आई है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने पहले की जांच रिपोर्ट पर भी असंतोष व्यक्त किया था।

परिवार का कहना है कि घटना को दो साल के करीब समय बीत चुका है, लेकिन न्याय की प्रक्रिया अभी भी पूरी नहीं हुई है। पीड़िता की मां के लिए यह लड़ाई केवल अपनी बेटी को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह चाहती हैं कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में भी बदलाव हो। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं और कहा कि उनकी बेटी की मौत के बाद परिवार को उन कमियों का सामना करना पड़ा, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

आरजी कर मामले में जांच की दिशा और गति को लेकर पहले भी पीड़िता के परिवार ने सवाल उठाए थे। अब एक बार फिर विधायक बनी पीड़िता की मां ने CBI की कार्रवाई पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि अगर जांच में किसी डॉक्टर या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके पेशे या पद को देखते हुए कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए।

इस मामले में अदालत की निगरानी और CBI की आगे की जांच अब बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाई कोर्ट ने जांच को निर्धारित समयसीमा में आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में CBI की ओर से अदालत में पेश की जाने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकता है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ी है और किन लोगों की भूमिका को लेकर एजेंसी के पास क्या तथ्य हैं।

फिलहाल पीड़िता की मां का कहना है कि परिवार को न्याय चाहिए और जांच में किसी भी संभावित आरोपी के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। उनका सवाल साफ है कि यदि कोई डॉक्टर अपराध में शामिल है तो सिर्फ डॉक्टर होने के कारण उसे गिरफ्तारी से अलग क्यों रखा जाए। उन्होंने CBI और जांच से जुड़े अधिकारियों से मामले को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

आरजी कर मामला लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति, स्वास्थ्य व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में रहा है। अब जांच की नई समयसीमा और पीड़िता की मां के ताजा बयान के बाद एक बार फिर सबकी नजर CBI की अगली कार्रवाई और अदालत में पेश होने वाली रिपोर्ट पर है। परिवार को उम्मीद है कि जांच जल्द निर्णायक स्थिति तक पहुंचेगी और उनकी बेटी को न्याय मिलेगा।

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