सोलन जिले में बरसात के मौसम के बीच पीलिया और डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। बारिश के दौरान दूषित पानी और भोजन के कारण संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में बीमारी से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी शुरू करने की तैयारी की है, ताकि किसी भी क्षेत्र में मरीजों की संख्या बढ़ने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बरसात के मौसम में विशेष सतर्कता बरतने पर जोर दिया जा रहा है। पीलिया और डायरिया को जलजनित बीमारियों में शामिल किया जाता है और दूषित पानी इनके फैलने का प्रमुख कारण बन सकता है। ऐसे में पेयजल स्रोतों की स्वच्छता, साफ पानी का इस्तेमाल और व्यक्तिगत साफ-सफाई बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। विभाग की निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य संभावित मामलों की जल्द पहचान करना और संक्रमण को व्यापक स्तर पर फैलने से रोकना है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर बीमारी से जुड़े आंकड़ों पर नजर रखी जाएगी। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से सामने आने वाले संदिग्ध मामलों की जानकारी जुटाकर स्थिति का आकलन किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश का एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) भी बीमारी के मामलों की दैनिक रिपोर्टिंग और संभावित प्रकोप के शुरुआती संकेतों की पहचान पर आधारित है। सोलन जिले में भी इस निगरानी व्यवस्था के तहत रिपोर्टिंग यूनिट सक्रिय हैं।
बरसात के दौरान जल स्रोतों के दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है। तेज बारिश के कारण कई जगहों पर पानी की पाइपलाइनों, प्राकृतिक जलस्रोतों और अन्य पेयजल स्रोतों में गंदगी पहुंच सकती है। यदि ऐसे पानी का बिना उचित उपचार के इस्तेमाल किया जाए तो डायरिया, पीलिया और दूसरी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को साफ और सुरक्षित पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
डायरिया होने पर शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी तेजी से हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में यह स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है। वहीं पीलिया के मामलों में त्वचा और आंखों का पीला पड़ना, पेशाब का रंग गहरा होना, कमजोरी, भूख कम लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण सामने आने पर मरीज को स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बरसात में एक ही क्षेत्र से कम समय में बड़ी संख्या में मरीज सामने आने पर बीमारी के संभावित प्रकोप का संकेत मिल सकता है। रोजाना मिलने वाले मामलों के आंकड़ों की समीक्षा से स्वास्थ्य अधिकारी यह पता लगा सकते हैं कि किसी खास इलाके में बीमारी सामान्य स्तर पर है या मामलों में असामान्य बढ़ोतरी हो रही है। हिमाचल प्रदेश के IDSP में भी ऐसे रोगों के लिए दैनिक रिपोर्टिंग और शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान की व्यवस्था है।
सोलन में स्वास्थ्य विभाग पहले भी विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करता रहा है। हाल की समीक्षा बैठकों में जिले के स्वास्थ्य संस्थानों और अधिकारियों के माध्यम से स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया है। ऐसे में बरसात के दौरान पीलिया और डायरिया की निगरानी को संक्रमण की स्थिति पर नजर रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे बारिश के मौसम में खान-पान और पानी को लेकर विशेष सावधानी बरतें। पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी का ही इस्तेमाल करें। खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचें और खाने से पहले तथा शौचालय के इस्तेमाल के बाद साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं। घर के आसपास पानी जमा न होने दें और यदि किसी जलस्रोत के दूषित होने की आशंका हो तो उसका पानी पीने से बचें।
अस्पतालों में पीलिया या डायरिया के लक्षणों के साथ पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में यदि बढ़ोतरी होती है तो स्वास्थ्य विभाग उसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार कर सकता है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों को भेजकर स्थिति की जांच, लोगों को जागरूक करने और बीमारी की रोकथाम के उपाय किए जा सकते हैं।
बरसात के मौसम में सोलन जिले में स्वास्थ्य विभाग की रोजाना निगरानी का मकसद बीमारी के मामलों को बढ़ने से पहले नियंत्रित करना है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी के साथ आम लोगों की सतर्कता भी संक्रमण रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साफ पानी पीना, स्वच्छ भोजन करना और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करना इस मौसम में बीमारी से बचाव के सबसे जरूरी उपायों में शामिल हैं









