भारत में 35 साल से कम उम्र के युवाओं में मानसिक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के आंकड़ों के अनुसार, 60 फीसदी मानसिक बीमारियां इसी उम्र वर्ग में देखी जा रही हैं। विशेषज्ञों ने चेताया है कि समय पर पहचान और इलाज न होने पर यह समस्या गंभीर हो सकती है। डिजिटल जीवनशैली, सोशल मीडिया और रोजगार की अनिश्चितता मुख्य कारक हैं।
Mental Health Crisis in India: युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य अब गंभीर चिंता का विषय बन गया है। इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के आंकड़ों के अनुसार, 35 साल से कम उम्र के 60 फीसदी लोग मानसिक रोगों से प्रभावित हैं। यह समस्या मुख्य रूप से डिजिटल लाइफस्टाइल, सोशल मीडिया, रोजगार की अनिश्चितता और सामाजिक दबावों की वजह से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज और जीवनशैली में सुधार इसे नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
कम उम्र में बढ़ते मानसिक रोगों के कारण
पूर्व IHBAS निदेशक डॉ. निमेश देसाई के अनुसार, समय पर इलाज न होना और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी प्रमुख कारण हैं। युवावस्था में शुरू होने वाले मानसिक विकार यदि जल्दी उपचारित न किए जाएं, तो जीवन भर रह सकते हैं और व्यक्ति तथा परिवार दोनों पर असर डालते हैं।
इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. सविता मल्होत्रा ने बताया कि डिजिटल जीवनशैली, सोशल मीडिया की तुलना, रोजगार की अनिश्चितता और रिश्तों में तनाव युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर दबाव डाल रहे हैं। अकेलापन और सामाजिक बदलाव इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं।

मेंटल हेल्थ सुधार के आसान उपाय
डॉक्टरों ने कुछ सरल उपाय सुझाए हैं, जैसे रोज एक ही समय पर सोना और जागना, नियमित व्यायाम और योग करना, और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग। यह छोटे कदम मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य की गिरती स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। समय पर पहचान और इलाज, परिवार और समाज का सहयोग, तथा स्वस्थ जीवनशैली इसे नियंत्रित कर सकती है। मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना अब जरूरी है।













