बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी से जुड़े कथित लेन-देन और टिकट बिक्री के दावों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन आरोपों को “राजनीतिक साजिश” और पार्टी को बदनाम करने की कोशिश बताया है।
लखनऊ: Bahujan Samaj Party (BSP) के भीतर कथित लेनदेन और टिकट वितरण से जुड़े आरोपों के बीच पार्टी प्रमुख Mayawati को सफाई देनी पड़ी है। मामला उस वायरल वीडियो से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें BSP के यूपी अध्यक्ष Vishwanath Pal पर कथित तौर पर पार्टी प्रमुख से मुलाकात के लिए पैसे और टिकट के बदले बड़ी रकम की चर्चा करते हुए दिखने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इस वीडियो की प्रामाणिकता को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विवाद बढ़ने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। वहीं BSP की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश बताया गया है।
मायावती ने आरोपों को बताया “षड्यंत्र”
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लंबी पोस्ट जारी करते हुए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि चुनावों के नजदीक आते ही कुछ राजनीतिक और मीडिया वर्ग BSP को बदनाम करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। उन्होंने लिखा कि बहुजन समाज पार्टी एक विचारधारा आधारित आंदोलन है, जो डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों पर चलती है और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए काम करती है।
मायावती ने अपने बयान में कहा कि BSP किसी भी तरह के बड़े पूंजीपतियों या धनी व्यक्तियों के सहारे नहीं चलती, बल्कि यह पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के योगदान पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें जानबूझकर पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश कर रही हैं ताकि चुनावी माहौल में भ्रम पैदा किया जा सके।
टिकट चयन प्रक्रिया पर क्या कहा गया?
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मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी में टिकट चयन की प्रक्रिया पूरी तरह संगठनात्मक और आंतरिक मूल्यांकन पर आधारित होती है। उन्होंने कहा कि BSP के पदाधिकारी और कार्यकर्ता संभावित उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग करते हैं, जिसमें उनकी:
- सामाजिक पृष्ठभूमि
- राजनीतिक अनुभव
- संगठन के प्रति निष्ठा
- और चुनाव जीतने की क्षमता
जैसे मानकों पर जांच की जाती है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रस्तुत करना मीडिया के एक वर्ग की जिम्मेदारी को कमजोर करता है।
वायरल वीडियो को लेकर विवाद
विवाद की शुरुआत उस वीडियो से हुई, जिसमें BSP यूपी अध्यक्ष विश्वनाथ पाल से जुड़े कुछ कथित दावे सामने आए। वीडियो में टिकट और मुलाकात के बदले पैसे की चर्चा जैसी बातें बताई गईं, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, और BSP नेतृत्व ने इन्हें पूरी तरह खारिज किया है।
मायावती ने आरोप लगाया कि चुनावों के समय BSP को कमजोर करने और उसके वोट बैंक को प्रभावित करने के लिए इस तरह के कथित प्रोपेगेंडा फैलाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी लगातार अपने मिशन 2027 के लक्ष्य की ओर काम कर रही है और ऐसे आरोपों से उसका ध्यान भटकाया नहीं जा सकता।मायावती ने अपने संदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के “भ्रामक प्रचार” का शिकार न हों और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दें।
उन्होंने यह भी कहा कि BSP का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के लिए समान अवसर और न्याय सुनिश्चित करना है, और यह पार्टी अपने मूल सिद्धांतों पर पूरी तरह अडिग है। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह विवाद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी प्रमुख दल अपने-अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं और इस दौरान आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।










